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Fatehabad News: तीनों विधानसभा क्षेत्र के उम्मीदवारों के चुनावी खर्च की हुई जांच
Sat, 28 Sep 2024 10:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 28 Sep 2024 10:13 PM IST
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विधानसभा चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों के व्यय लेखा संबंधी रजिस्टर की जांच करते चुनाव खर्च पर्यवेक
फतेहाबाद। विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग की ओर से नियुक्त खर्च पर्यवेक्षक आईआरएस सुधाकर शुक्ला ने शनिवार को जिला परिषद कार्यालय में तीनों विधानसभा क्षेत्र टोहाना, फतेहाबाद और रतिया से चुनाव लड़ रहे सभी प्रत्याशियों के व्यय लेखा संबंधी रजिस्टर की जांच की। इस मौके पर उम्मीदवारों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। उनके चुनावी व्यय दस्तावेजों, दैनिक व्यय रजिस्टर, कैश और बैंक रजिस्टर का निरीक्षण किया गया।
बता दें, चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी के लिए 40 लाख रुपये की व्यय सीमा निर्धारित की है। उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों को चुनावी व्यय को निर्वाचन आयोग की ओर से निर्धारित व्यय सीमा के भीतर रखने को लेकर सजग किया गया।
सुधाकर शुक्ला ने बताया कि निर्वाचन आयोग की ओर से निर्धारित 40 लाख रुपये से अधिक की राशि व्यय करने पर प्रत्याशी के विजयी होने पर भी उसकी सदस्यता जा सकती है। इसलिए सभी प्रत्याशी निर्वाचन आयोग की ओर से निर्धारित सीमा के अंदर ही प्रचार पर धनराशि व्यय करें। उनके चुनावी व्यय की निगरानी के लिए वीडियो सर्विलेंस टीमें लगातार नजर रख रही हैं।
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शैडो ऑब्जर्वेशन रजिस्टर पर उनके सारे खर्च की गणना की जा रही है। व्यय रजिस्टर का मिलान शैडो ऑब्जर्वेशन रजिस्टर से नहीं होता है तो प्रत्याशी को नोटिस जारी किया जाएगा। प्रत्याशी के नामांकन के दिन से लेकर परिणाम घोषित होने तक के सारे खर्चे को प्रत्याशी के चुनाव खर्च में जोड़ा जाएगा और प्रचार के सारे खर्च का हिसाब परिणाम घोषित होने के एक महीने के अंदर देना होगा। अगर प्रत्याशी खर्च का हिसाब नहीं देता है तो वह तीन साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता है। 10 हजार से ज्यादा का भुगतान चेक के माध्यम से करना होता है।
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बता दें, चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी के लिए 40 लाख रुपये की व्यय सीमा निर्धारित की है। उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों को चुनावी व्यय को निर्वाचन आयोग की ओर से निर्धारित व्यय सीमा के भीतर रखने को लेकर सजग किया गया।
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सुधाकर शुक्ला ने बताया कि निर्वाचन आयोग की ओर से निर्धारित 40 लाख रुपये से अधिक की राशि व्यय करने पर प्रत्याशी के विजयी होने पर भी उसकी सदस्यता जा सकती है। इसलिए सभी प्रत्याशी निर्वाचन आयोग की ओर से निर्धारित सीमा के अंदर ही प्रचार पर धनराशि व्यय करें। उनके चुनावी व्यय की निगरानी के लिए वीडियो सर्विलेंस टीमें लगातार नजर रख रही हैं।
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शैडो ऑब्जर्वेशन रजिस्टर पर उनके सारे खर्च की गणना की जा रही है। व्यय रजिस्टर का मिलान शैडो ऑब्जर्वेशन रजिस्टर से नहीं होता है तो प्रत्याशी को नोटिस जारी किया जाएगा। प्रत्याशी के नामांकन के दिन से लेकर परिणाम घोषित होने तक के सारे खर्चे को प्रत्याशी के चुनाव खर्च में जोड़ा जाएगा और प्रचार के सारे खर्च का हिसाब परिणाम घोषित होने के एक महीने के अंदर देना होगा। अगर प्रत्याशी खर्च का हिसाब नहीं देता है तो वह तीन साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता है। 10 हजार से ज्यादा का भुगतान चेक के माध्यम से करना होता है।