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Fatehabad News: पराली प्रबंधन के वैज्ञानिक उपायों की जानकारी दी
Wed, 01 Oct 2025 11:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Wed, 01 Oct 2025 11:19 PM IST
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किसानों को संबोधित करते हुए कृषि विभाग के अधिकारी। सूचना विभाग।
टोहाना। कृषि विभाग की ओर से बुधवार को गांव बिढ़ाई खेड़ा में पराली प्रबंधन विषय पर जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विषय विशेषज्ञ रामेश्वर दास ने की। शिविर में किसानों को पराली जलाने से होने वाले दुष्परिणामों, पर्यावरण पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव और पराली प्रबंधन के वैज्ञानिक उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई।
कृषि विषय विशेषज्ञ रामेश्वर दास ने कहा कि धान की पराली जलाने से वातावरण में जहरीली गैसें निकलती हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है और लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। धुएं से सांस, आंख और त्वचा संबंधी रोग फैलते हैं। इतना ही नहीं, पराली जलाने से खेत की मिट्टी की उर्वरक क्षमता घट जाती है और उसमें मौजूद उपयोगी कीट व सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं। किसानों को समझाया गया कि पराली को खेतों में मिलाकर मिट्टी की सेहत को बेहतर बनाया जा सकता है। इससे न केवल भूमि की उर्वरता बढ़ेगी बल्कि रासायनिक खादों पर खर्च भी कम होगा। सरकार द्वारा पराली प्रबंधन उपकरणों पर सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, स्ट्रॉ रीपर, स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, रोटावेटर और बेलर-क्यूम-रीपर बाइंडर जैसे आधुनिक यंत्र शामिल हैं। किसान इन उपकरणों का उपयोग कर पराली को खेत में ही समेट सकते हैं या उसकी गांठ बनाकर विभिन्न उद्योगों को बेच सकते हैं।
इस अवसर पर कृषि निरीक्षक मनोज कुमार, पंचायत सचिव कृष्ण कुमार, सरपंच रमेश, नंबरदार संजय कुमार, अमित बुढ़ानिया, रामचन्द्र सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
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1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दे रही सरकार
पराली प्रबंधन करने वाले किसानों को सरकार 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दे रही है। किसान पराली को बोझ न मानें, बल्कि इसे आय का साधन बनाएं। पराली की गांठ बनाकर बिजली संयंत्र, पेपर मिलों और मशरूम उत्पादन इकाइयों को बेचा जा सकता है। इससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी होगी और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलेगा।
फोटो 7 -
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कृषि विषय विशेषज्ञ रामेश्वर दास ने कहा कि धान की पराली जलाने से वातावरण में जहरीली गैसें निकलती हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है और लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। धुएं से सांस, आंख और त्वचा संबंधी रोग फैलते हैं। इतना ही नहीं, पराली जलाने से खेत की मिट्टी की उर्वरक क्षमता घट जाती है और उसमें मौजूद उपयोगी कीट व सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं। किसानों को समझाया गया कि पराली को खेतों में मिलाकर मिट्टी की सेहत को बेहतर बनाया जा सकता है। इससे न केवल भूमि की उर्वरता बढ़ेगी बल्कि रासायनिक खादों पर खर्च भी कम होगा। सरकार द्वारा पराली प्रबंधन उपकरणों पर सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, स्ट्रॉ रीपर, स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, रोटावेटर और बेलर-क्यूम-रीपर बाइंडर जैसे आधुनिक यंत्र शामिल हैं। किसान इन उपकरणों का उपयोग कर पराली को खेत में ही समेट सकते हैं या उसकी गांठ बनाकर विभिन्न उद्योगों को बेच सकते हैं।
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इस अवसर पर कृषि निरीक्षक मनोज कुमार, पंचायत सचिव कृष्ण कुमार, सरपंच रमेश, नंबरदार संजय कुमार, अमित बुढ़ानिया, रामचन्द्र सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
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1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दे रही सरकार
पराली प्रबंधन करने वाले किसानों को सरकार 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दे रही है। किसान पराली को बोझ न मानें, बल्कि इसे आय का साधन बनाएं। पराली की गांठ बनाकर बिजली संयंत्र, पेपर मिलों और मशरूम उत्पादन इकाइयों को बेचा जा सकता है। इससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी होगी और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलेगा।
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