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पाकिस्तान के खिलाफ लड़ने का मिले मौका तो सबसे पहले उठाउंगा हथियार : दीवायाराम

Mon, 28 Apr 2025 12:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Mon, 28 Apr 2025 12:07 AM IST
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If I get a chance to fight against Pakistan, I will be the first one to take up arms: Diwayaram
गांव रतनगढ़ में रह रहा 25 वर्ष पूर्व पाकिस्तान से आया दिवाया राम  अपने परिवार के साथ,स्त्रोत स्
रतिया। पहलगाम हमले के बाद केंद्र सरकार के पाकिस्तानी नागरिकों को देश छोड़ने के ऐलान के बाद जिला प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क हो गया है। करीब 18 वर्ष पहले पाकिस्तान छोड़कर रतिया क्षेत्र में आए हिंदू परिवारों के भी दस्तावेज जांचे जा रहे हैं।
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वर्ष 2014 से पहले से भारत में रहे रहे हैं तो इनको पाकिस्तान नहीं लौटाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां इस मामले में इन पर भी पूरी नजर रखे हुए है। इस बात की पुष्टि जिला पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन ने की है। उनका कहना है कि पाकिस्तान से आए परिवार जिले में रह रहे हैं। वह परिवार नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत जिले में बसे हुए हैं। उन्हें पाकिस्तान वापस नहीं भेजा रहा है।
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25 वर्षों में जब भी भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध के हालात बनते हैं तो प्रशासन की नजरे इन पाकिस्तानी हिंदू परिवारों की तरफ टिक जाती है। हर बार इन्हें जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। जब तक हालात सामान्य नहीं होते तब तक इन पाकिस्तानी हिंदू परिवारों में भय का माहौल बना रहता है।
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वर्ष 2000 में भारत आए
पाकिस्तान में बेनजीर भुट्टो की 1989 की सरकार में अल्पसंख्यक कोटे से सांसद होने का दावा करने वाले 80 वर्षीय अल्लाह दीवाया राम का कहना है कि उसने जिंदगी के 55 साल पाकिस्तान में गुजारे। वो पाकिस्तान के सियासतदानों को अच्छी तरह जानते हैं कि वे बातों से नहीं युद्ध से ही सबक सीखेंगे। उन्होंने कहा कि भारत को पाकिस्तान पर हमला करना चाहिए। युद्ध के दौरान अगर उन्हें किसी मोर्चे पर भेजा जाता है तो वह उसके लिए भी तैयार हैं।
हिंदू होने की वजह से किया तंग, तभी किया पलायन
ओढ समाज से संबंधित दीवाया राम पुत्र भोरी राम ने बताया कि आजादी के समय भारत से बने पाकिस्तान के समय उनके काफी रिश्तेदार क्षेत्र के गांव सरदारे वाला व रोहतक के मदीना में आकर रहने लगे, लेकिन उनका परिवार पाकिस्तान में ही पंजाब क्षेत्र के नुहिया जिले के चक 150 टीरिया में रहने लगा। दीवाया राम ने बताया कि जब भारत-पाकिस्तान अलग हुए तो उनकी उम्र 2 वर्ष थी। पाकिस्तान बनने के बाद से ही वहां पर हिंदुओं को हेय नजर से देखा जाता था। बांग्लादेश बनने के बाद पाकिस्तान में हिंदुओं पर अत्याचार शुरू हो गए। बहन बेटियों को संभाल कर रखना मुश्किल हो गया। वहां रसूख होने के बावजूद भी उन्हें हिंदू होने के चलते काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। जिससे तंग आकर आखिरकार वह परिवार के साथ वर्ष 2000 में भारत आ गए। उन्होंने बताया कि जब वह पाकिस्तान छोड़कर आए तो उस वक्त उनके साथ उसकी पत्नी राजो माई, मां और आठ लड़के तथा दो लड़कियों सहित 13 लोग थे। वह लोग रोहतक के मदीना गांव में रहे। जिसके बाद वर्ष 2008 में वह रतिया क्षेत्र के गांव रतनगढ़ में रहने लगे। उन्होंने बताया कि इस दौरान उसकी एक और बेटी पैदा हुई। रतनगढ़ में रहकर ही उन्होंने अपनी तीनों बेटियों और 7 बेटों की शादी की।
शुरू में लिया था एक माह का वीजा
दीवायाराम अपने परिवार के साथ शुरू में सिर्फ एक माह का वीजा लेकर भारत आए थे। इसके बाद वे साल 2018 तक अपने परिवार का वीजा बढ़वाते रहे। पहले वीजा हर साल बढ़वाना पड़ता था। उसके बाद एक से पांच साल तक का वीजा मिलने लगा। उन्होंने कहा कि यहां आने के बाद पिछले 25 साल से उन्हें सभी का भरपूर सहयोग मिला है। जिसके चलते उनका व उनके परिवार के सदस्यों का जीवन अच्छा चल रहा है। अब उनका 30 सदस्यों का भरा पूरा परिवार है।
कुल्फी बेचकर करते है पालन-पोषण, बेटे कर रहे हैं गोसेवा
वह जहां गांव-गांव कुल्फी बेचकर परिवार का पालन पोषण करते हैं। वहीं उनके बेटे गोशाला में गोसेवा तथा क्षेत्र में चौकीदारी का कार्य करके सेवाभाव के साथ-साथ परिवार को चला रहे हैं। पाकिस्तान वापस भेजने की बात सोच कर ही उनका परिवार सिहर उठता है, क्योंकि भारत आने के बाद से ही उनके बच्चों की शादियां भी आसपास के क्षेत्र में हुई हैं। उन्हें उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही सीएए के तहत नागरिकता मिलेगी और वह अपने आप को भारतीय कहलवाना पसंद करेंगे।

2006 में आया था ओमप्रकाश का परिवार
- क्षेत्र में सोने की धुलाई का काम करने वाली दीवाया राम का चचेरा भाई ओमप्रकाश अपने पिता सोनाराम व तीन भाइयों व अन्य परिवार के साथ पाकिस्तान से 2006 में रतिया आया था। भारत आने के 3 वर्ष बाद ही 2009 में ओमप्रकाश का विवाह क्षेत्र क्षेत्र के उस वक्त के विधायक रहे ज्ञानचंद ओढ की नजदीकी रिश्तेदारी में गांव सरदारेवाला में ही हुआ था। उसके दो अन्य भाइयों की शादी भी बाद में जिला फतेहाबाद के क्षेत्र में हुई है। ओमप्रकाश ने बताया कि उसके चचेरे भाई भी उनके साथ पाकिस्तान से फतेहाबाद आए थे। अब वे फतेहाबाद के ही गांव भोडियाखेड़ा में जीवन बसर कर रहे हैं। उनके परिवार के 6 सदस्यों को भारत की नागरिकता मिल चुकी है। परिवार के अन्य लोगों के दस्तावेज भी भारत सरकार के पास भेजे गए हैं। उम्मीद है कि जल्द वे भी भारतीय नागरिक कहलाएंगे। ओमप्रकाश ने बताया कि प्रशासन ने 2 दिन पूर्व उनके परिवार के दस्तावेज मंगवाए थे, जिनकी जांच के बाद लौटा दिया गया। जिला प्रशासन ने उन्हें आश्वासन दिया है कि उन्हें जल्द ही भारत की नागरिकता मिल जाएगी।


जिले में कुछ लोग पाकिस्तान से आकर यहां रह रहे हैं, जो कि नागरिक संशोधन कानून के अंतर्गत आते हैं। जिले से कोई भी व्यक्ति वापस भेजे जाने के नियम के अंतर्गत नहीं आता। दस्तावेजों की जांच एक रूटीन प्रक्रिया है। जो सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस समय-समय पर करती है।
सिद्धांत जैन, एसपी, फतेहाबाद।
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