{"_id":"679e79d42861f8f203097e2a","slug":"i-tried-so-hard-to-get-out-of-the-pack-that-my-life-was-saved-jarnail-fatehabad-news-c-127-1-shsr1017-128688-2025-02-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"मैं गड्डी तों निकलन दी कोशिश कित्ती तां बच गई जान : जरनैल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मैं गड्डी तों निकलन दी कोशिश कित्ती तां बच गई जान : जरनैल
Sun, 02 Feb 2025 01:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 02 Feb 2025 01:15 AM IST
विज्ञापन
क्रूजर गाड़ी से निकलने के बाद आपबीती बताते हुए जरनैल सिंह।
फतेहाबाद। क्रूजर गाड़ी भाखड़ा नहर में गिरने के बाद सबसे पहले खुद ही गांव महमड़ा निवासी जरनैल सिंह बाहर निकल कर आए थे। नहर से बाहर आने के बाद उसने पहले गुजरे राहगीरों से मदद मांगी लेकिन नहीं मिली और फिर आगे चला गया। वहां बैठे दो राहगीरों ने गांव सरदारेवाला पहुंचाया और गांव में अनाउंसमेंट करवाकर ग्रामीणों को इकट्ठा किया। इसके बाद काफी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी गई। जरनैल ने कहा कि मैं गड्डी तों निकलन दी कोशिश कित्ती तां बच गई जान, तैरना आंदा सी।
महमड़ा निवासी जरनैल सिंह ने आपबीती बताते हुए बताया कि गांव महमड़ा से 28 जनवरी को मासी के बेटे की शादी में गए थे। 29 को बारात में गए थे और 31 जनवरी को पार्टी के बाद वहां से चले थे। जब डबवाली के पास पहुंचे तो धुंध आ गई थी। मामा गाड़ी चला रहा था। जब गाड़ी गिरी तो उसने तुरंत खिड़की को खोला लेकिन नहीं खुली। इसके बाद दोबारा प्रयास किया तो कोट अड़ गया। जिसे उसने उतार दिया और तैरना आता था तो बाहर निकल आया। नहर करीब 15 से 20 फुट गहरी है। बाहर आया तो दो लोग मिले उन्हें रोका लेकिन नहीं रुके और फिर आगे चला तो दो आदमी बैठे थे। मैंने रोते हुए घटना के बारे में बताया।
इसके बाद उसे वह गांव सरदारेवाला में ले गए और और पहनने को कपड़े दिए। मौके पर आए तो काफी ग्रामीण पहुंच गए थे। मुझे घबराहट होने लगी तो उसे दोबारा गांव में ले गए। गाड़ी में बहन, माता, मौसा, मामी, मामी पंजाब की, मासी के बेटे और पुत्रवधु, भांजा व भांजी व बहन की बहू थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
महमड़ा निवासी जरनैल सिंह ने आपबीती बताते हुए बताया कि गांव महमड़ा से 28 जनवरी को मासी के बेटे की शादी में गए थे। 29 को बारात में गए थे और 31 जनवरी को पार्टी के बाद वहां से चले थे। जब डबवाली के पास पहुंचे तो धुंध आ गई थी। मामा गाड़ी चला रहा था। जब गाड़ी गिरी तो उसने तुरंत खिड़की को खोला लेकिन नहीं खुली। इसके बाद दोबारा प्रयास किया तो कोट अड़ गया। जिसे उसने उतार दिया और तैरना आता था तो बाहर निकल आया। नहर करीब 15 से 20 फुट गहरी है। बाहर आया तो दो लोग मिले उन्हें रोका लेकिन नहीं रुके और फिर आगे चला तो दो आदमी बैठे थे। मैंने रोते हुए घटना के बारे में बताया।
विज्ञापन
इसके बाद उसे वह गांव सरदारेवाला में ले गए और और पहनने को कपड़े दिए। मौके पर आए तो काफी ग्रामीण पहुंच गए थे। मुझे घबराहट होने लगी तो उसे दोबारा गांव में ले गए। गाड़ी में बहन, माता, मौसा, मामी, मामी पंजाब की, मासी के बेटे और पुत्रवधु, भांजा व भांजी व बहन की बहू थी।
विज्ञापन