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12 गांव+8 बड़ी ढाणियां= 8 पुलिसकर्मी+2 पुरानी बाइक= नशा नियंत्रण कैसे
ब्यूरो/अमर उजाला फतेहाबाद
Updated Sun, 06 Dec 2015 11:47 PM IST
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मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रशासन ने दावा किया कि पंजाब के सीमावर्ती गांवों में अब तस्कर बख्शे नहीं जाएंगे। विवाद के केन्द्र में अलीका गांव था तो पुलिस विभाग ने वहां नाका ठोक दिया।
फिर से दावे हुए कि नशा तस्करी रोकने के लिए गंभीरता से प्रयास किए जा रहे हैं। अब पुलिस विभाग के इन दावों की पोल तब खुली जब अमर उजाला ने पंजाब के सीमावर्ती गांवों पिलछियां, नागपुर, अलीका आदि का दौरा किया।
जिन गांवों में नशा तस्करी रोकने के लिए पुलिस के आला अफसर गंभीरता की बात करते हैं, वो सभी गांव दरअसल नागपुर पुलिस चौकी के तहत आते हैं। लगभग 12 गांव और 8 के करीब बड़ी ढाणियां हैं।
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रास्ता नापें तो 25 किलोमीटर से अधिक रास्ता है। इन 12 गांवों और 8 ढाणियों को संभालने वाली नागपुर पुलिस चौकी में कुल 8 कर्मचारी हैं। चौकी प्रभारी भी इसमें शामिल हैं।
गश्त या घटनास्थल पर पहुंचने के लिए 2005 मॉडल की दो बाइक हैं। जो दो से अधिक सवारियों के बैठने पर चलने से इंकार कर दें।
अब इनके सहारे पुलिस विभाग नशा माफिया से निपटने की बात (दावा) करता है तो अब कोई क्या कहे। नागपुर पुलिस चौकी के कर्मचारियों की दिलेरी पर संदेह नहीं है, लेकिन बात सिस्टम की है।
पिलछियां में हादसा हो तो नागपुर से पहुंचने में लगेगा आधे से पौना घंटा
पंजाब सीमा पर प्रदेश के आखिरी गांव पिलछियां में अगर कोई वारदात हो गई और समय रहते नागपुर चौकी को इसकी जानकारी भी मिल गई तो तुरंत निकलने पर भी पिलछियां पहुंचने में आधे से पौने घंटे का समय लग जाएगा।
जबकि दूसरी ओर पिलछियां से पंजाब बार्डर महज दो किलोमीटर है। अपराधियों को पांच मिनट से ज्यादा समय नहीं लगेगा वारदात को अंजाम देकर पंजाब निकल भागने के लिए।
8 में से दो शिकायत लिखने के लिए तो दो कोर्ट केसों के लिए
8 पुलिस कर्मचारियों वाली नागपुर पुलिस चौकी में तकरीबन 2 कर्मचारी शिकायतें एवं अन्य क्लर्की के कामों में व्यस्त रहते हैं। लगभग दो से तीन कर्मचारी कोर्ट केसों के चक्कर में चौकी से बाहर ही रहते हैं।
ऐसे में चौकी प्रभारी सहित 4 कर्मचारी 2005 मॉडल की बाइक भगाकर नशे की तस्करी पर कितनी नकेल कस सकेंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
ये गांव हैं नागपुर पुलिस चौकी के अंतर्गत
बीट चार्ट के मुताबिक नागपुर पुलिस चौकी के अंतर्गत 12 गांव शामिल हैं। इन गांवों में नागपुर, खूनन, बीराबदी, गंदा, मड़, मलवाला, अलीका, हुकमावाली, हड़ोली, तामसपुरा, सहारना और चन्नकोठी शामिल हैं।
इस बारे में जब जिले के नए पुलिस कप्तान ओपी नरवाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उनके संज्ञान में ये मामला नहीं था। नागपुर पुलिस चौकी के लिए अतिरिक्त पुलिसकर्मियों और वाहन की व्यवस्था की जाएगी।
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फिर से दावे हुए कि नशा तस्करी रोकने के लिए गंभीरता से प्रयास किए जा रहे हैं। अब पुलिस विभाग के इन दावों की पोल तब खुली जब अमर उजाला ने पंजाब के सीमावर्ती गांवों पिलछियां, नागपुर, अलीका आदि का दौरा किया।
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जिन गांवों में नशा तस्करी रोकने के लिए पुलिस के आला अफसर गंभीरता की बात करते हैं, वो सभी गांव दरअसल नागपुर पुलिस चौकी के तहत आते हैं। लगभग 12 गांव और 8 के करीब बड़ी ढाणियां हैं।
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रास्ता नापें तो 25 किलोमीटर से अधिक रास्ता है। इन 12 गांवों और 8 ढाणियों को संभालने वाली नागपुर पुलिस चौकी में कुल 8 कर्मचारी हैं। चौकी प्रभारी भी इसमें शामिल हैं।
गश्त या घटनास्थल पर पहुंचने के लिए 2005 मॉडल की दो बाइक हैं। जो दो से अधिक सवारियों के बैठने पर चलने से इंकार कर दें।
अब इनके सहारे पुलिस विभाग नशा माफिया से निपटने की बात (दावा) करता है तो अब कोई क्या कहे। नागपुर पुलिस चौकी के कर्मचारियों की दिलेरी पर संदेह नहीं है, लेकिन बात सिस्टम की है।
पिलछियां में हादसा हो तो नागपुर से पहुंचने में लगेगा आधे से पौना घंटा
पंजाब सीमा पर प्रदेश के आखिरी गांव पिलछियां में अगर कोई वारदात हो गई और समय रहते नागपुर चौकी को इसकी जानकारी भी मिल गई तो तुरंत निकलने पर भी पिलछियां पहुंचने में आधे से पौने घंटे का समय लग जाएगा।
जबकि दूसरी ओर पिलछियां से पंजाब बार्डर महज दो किलोमीटर है। अपराधियों को पांच मिनट से ज्यादा समय नहीं लगेगा वारदात को अंजाम देकर पंजाब निकल भागने के लिए।
8 में से दो शिकायत लिखने के लिए तो दो कोर्ट केसों के लिए
8 पुलिस कर्मचारियों वाली नागपुर पुलिस चौकी में तकरीबन 2 कर्मचारी शिकायतें एवं अन्य क्लर्की के कामों में व्यस्त रहते हैं। लगभग दो से तीन कर्मचारी कोर्ट केसों के चक्कर में चौकी से बाहर ही रहते हैं।
ऐसे में चौकी प्रभारी सहित 4 कर्मचारी 2005 मॉडल की बाइक भगाकर नशे की तस्करी पर कितनी नकेल कस सकेंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
ये गांव हैं नागपुर पुलिस चौकी के अंतर्गत
बीट चार्ट के मुताबिक नागपुर पुलिस चौकी के अंतर्गत 12 गांव शामिल हैं। इन गांवों में नागपुर, खूनन, बीराबदी, गंदा, मड़, मलवाला, अलीका, हुकमावाली, हड़ोली, तामसपुरा, सहारना और चन्नकोठी शामिल हैं।
इस बारे में जब जिले के नए पुलिस कप्तान ओपी नरवाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उनके संज्ञान में ये मामला नहीं था। नागपुर पुलिस चौकी के लिए अतिरिक्त पुलिसकर्मियों और वाहन की व्यवस्था की जाएगी।