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Fatehabad News: गलियों में चल रहे होटल-रेस्टोरेंट और कोचिंग सेंटर, बेसमेंट में प्रोग्राम, अग्निशमन यंत्र तक नहीं
Fri, 05 Jun 2026 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Fri, 05 Jun 2026 11:21 PM IST
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फतेहाबाद का ठाकर बस्ती क्षेत्र जहां पर अस्पताल और कोचिंग सेंटर है लेकिन जाम की स्थिति रही है
- फोटो : संवाद
फतेहाबाद। दिल्ली और हिसार में होटल में आग लगने की हुई हाल ही में घटनाओं के बाद भी प्रशासन सबक नहीं ले रहा है। शहर और कस्बों की संकरी गलियों में संचालित हो रहे होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल और कोचिंग सेंटरों में अग्नि सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। अधिकांश संस्थानों में आग से बचाव के लिए जरूरी उपकरण तक उपलब्ध नहीं हैं।
कई जगहों पर बेसमेंट में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं जबकि आपात स्थिति में लोगों के सुरक्षित निकास की व्यवस्था भी नहीं है। इसके बावजूद संबंधित विभाग की कार्रवाई केवल नोटिसों तक सीमित नजर आ रही है। करीब 150 संस्थानों ने अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त कर रखा है लेकिन इनमें से लगभग आधे संस्थानों ने तीन वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद भी एनओसी का नवीनीकरण नहीं करवाया है। नियमों के अनुसार निर्धारित अवधि के बाद एनओसी का नवीनीकरण कराना अनिवार्य है ताकि सुरक्षा मानकों की दोबारा जांच की जा सके। अधिकारी खुद मान रहे हैं कि संस्थान संचालक बचाव के महंगे यंत्र लगवाने से बच रहे हैं।
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मुख्य बाजार में बेसमेंट में चल रही दुकानें, यंत्र तक नहीं
हाल ही में कई जगहों पर होटल, कोचिंग सेंटर और व्यावसायिक भवनों में आग लगने की घटनाओं ने कई सवाल खड़े किए हैं। इसके बावजूद जिले में बड़ी संख्या में संस्थान बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के संचालित हो रहे हैं। कई इमारतों में आपातकालीन निकास द्वार तक नहीं हैं तो कहीं अग्निशमन यंत्र खराब अवस्था में पड़े हैं। संकरी गलियों में स्थित भवनों तक दमकल वाहनों की पहुंच भी मुश्किल हो सकती है जिससे किसी भी हादसे की स्थिति में जानमाल का बड़ा नुकसान होने की आशंका बनी रहती है। शहर के मुख्य बाजार में बेसमेंट में दुकानें बनी हैं। यहां पर आग बुझाने के यंत्रों तक की व्यवस्था नहीं है।
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शहर के बीचों बीच बने रेस्टोरेंट और होटल
शहर के शिव चौक, चार मरला कॉलोनी, ठाकर बस्ती में होटल और कोचिंग सेंटर बने हैं। पड़ताल में सामने आया है कि बेसमेंट में प्रोग्राम किए जा रहे है जबकि निकासी की व्यवस्था बहुत कम है। यहां पर आग लगने की स्थिति में अग्निशमन यंत्र तक नहीं लगे हैं। सिरसा रोड पर बने कई होटलों व रेस्टोरेंट भी मानक पूरे नहीं कर रहे हैं।
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ये होने चाहिए अग्नि सुरक्षा के इंतजाम
विशेषज्ञों के अनुसार होटल, रेस्टोरेंट, कोचिंग सेंटर और व्यावसायिक संस्थानों में आग से बचाव के लिए फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशमक यंत्र), फायर अलार्म सिस्टम, स्मोक डिटेक्टर, फायर हाइड्रेंट, स्प्रिंकलर सिस्टम, आपातकालीन निकास द्वार, इमरजेंसी लाइटिंग, फायर होज रील और स्पष्ट निर्देश वाले निकासी मार्ग होने चाहिए। साथ ही कर्मचारियों और स्टाफ को समय-समय पर अग्निशमन प्रशिक्षण भी दिया जाना जरूरी है।
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संस्थानों की नियमित जांच की जा रही है और नियमों का पालन नहीं करने वालों को नोटिस भी जारी किए जा रहे हैं। उच्चाधिकारियों से विशेष अभियान के निर्देश मिलने पर व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाया जाएगा। लोगों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-प्रदीप कुमार, सब फायर ऑफिसर
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कई जगहों पर बेसमेंट में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं जबकि आपात स्थिति में लोगों के सुरक्षित निकास की व्यवस्था भी नहीं है। इसके बावजूद संबंधित विभाग की कार्रवाई केवल नोटिसों तक सीमित नजर आ रही है। करीब 150 संस्थानों ने अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त कर रखा है लेकिन इनमें से लगभग आधे संस्थानों ने तीन वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद भी एनओसी का नवीनीकरण नहीं करवाया है। नियमों के अनुसार निर्धारित अवधि के बाद एनओसी का नवीनीकरण कराना अनिवार्य है ताकि सुरक्षा मानकों की दोबारा जांच की जा सके। अधिकारी खुद मान रहे हैं कि संस्थान संचालक बचाव के महंगे यंत्र लगवाने से बच रहे हैं।
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मुख्य बाजार में बेसमेंट में चल रही दुकानें, यंत्र तक नहीं
हाल ही में कई जगहों पर होटल, कोचिंग सेंटर और व्यावसायिक भवनों में आग लगने की घटनाओं ने कई सवाल खड़े किए हैं। इसके बावजूद जिले में बड़ी संख्या में संस्थान बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के संचालित हो रहे हैं। कई इमारतों में आपातकालीन निकास द्वार तक नहीं हैं तो कहीं अग्निशमन यंत्र खराब अवस्था में पड़े हैं। संकरी गलियों में स्थित भवनों तक दमकल वाहनों की पहुंच भी मुश्किल हो सकती है जिससे किसी भी हादसे की स्थिति में जानमाल का बड़ा नुकसान होने की आशंका बनी रहती है। शहर के मुख्य बाजार में बेसमेंट में दुकानें बनी हैं। यहां पर आग बुझाने के यंत्रों तक की व्यवस्था नहीं है।
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शहर के बीचों बीच बने रेस्टोरेंट और होटल
शहर के शिव चौक, चार मरला कॉलोनी, ठाकर बस्ती में होटल और कोचिंग सेंटर बने हैं। पड़ताल में सामने आया है कि बेसमेंट में प्रोग्राम किए जा रहे है जबकि निकासी की व्यवस्था बहुत कम है। यहां पर आग लगने की स्थिति में अग्निशमन यंत्र तक नहीं लगे हैं। सिरसा रोड पर बने कई होटलों व रेस्टोरेंट भी मानक पूरे नहीं कर रहे हैं।
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ये होने चाहिए अग्नि सुरक्षा के इंतजाम
विशेषज्ञों के अनुसार होटल, रेस्टोरेंट, कोचिंग सेंटर और व्यावसायिक संस्थानों में आग से बचाव के लिए फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशमक यंत्र), फायर अलार्म सिस्टम, स्मोक डिटेक्टर, फायर हाइड्रेंट, स्प्रिंकलर सिस्टम, आपातकालीन निकास द्वार, इमरजेंसी लाइटिंग, फायर होज रील और स्पष्ट निर्देश वाले निकासी मार्ग होने चाहिए। साथ ही कर्मचारियों और स्टाफ को समय-समय पर अग्निशमन प्रशिक्षण भी दिया जाना जरूरी है।
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संस्थानों की नियमित जांच की जा रही है और नियमों का पालन नहीं करने वालों को नोटिस भी जारी किए जा रहे हैं। उच्चाधिकारियों से विशेष अभियान के निर्देश मिलने पर व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाया जाएगा। लोगों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-प्रदीप कुमार, सब फायर ऑफिसर