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Fatehabad News: बाढ़ से उजड़ चुके आशियानों में बेबस जिंदगी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 21 Sep 2023 11:07 PM IST
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Helpless life in houses destroyed by floods
फतेहाबाद। जिले में दो माह पहले आई बाढ़ शहर के नजदीक लगती ढाणियों में कहर बनकर बरपी। रात को अचानक आए बाढ़ के पानी के कारण यहां के बाशिंदों को शरणार्थी शिविरों में शरण लेनी पड़ी। पानी हटा तो जब यह लोग अपने घरों को गए तो मंजर खौफजदा मिला, मकान जर्जर हो चुके थे। अब इन्हीं जर्जर व टूटे आशियानों में लोग अपनी जिंदगी बिताने को मजबूर हैं जो कभी भी गिर सकता है। यहां तक कि ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर भी उनके मकानों के नुकसान का ब्योरा नहीं डल पाया है।
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गौरतलब है कि फतेहाबाद में 13 जुलाई से बाढ़ का कहर शुरू हुआ था। सबसे पहले जाखल में घग्गर के तटबंध टूटने के कारण जाखल, कुलां व टोहाना तथा बाद में इसका प्रकोप फतेहाबाद में आ गया। बाढ़ का पानी फतेहाबाद की ढाणी टाहलीवाली, ढाणी बिकानेरी, ढाणी दिल्ली की आबादी तक पहुंच गया था और प्रशासन ने यहां के रहने वाले लोगों को शहर के अरोड़वंश धर्मशाला, मॉडल संस्कृति स्कूल व नई अनाज मंडी में ठहराया था। बाढ़ का पानी तो निकल गया, लेकिन इन ढाणियों में रहने वाले लोगों के लिए यह काफी मुसीबत भरा रहा है। ढाणी टाहलीवाली में करीब 50 घर हैं और ऐसा कोई घर नहीं जिसको नुकसान नहीं पहुंचा है। कई घरों का आधा हिस्सा दरक कर गिर चुका है। मजबूरन लोगों को इन्हीं घरों में आश्रय लेना पड़ रहा है। कई मकान तो ऐसे हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं, इन मकानों के लोग घर के बाहर ही आश्रय लिए बैठे हैं, क्योंकि यह मकान कभी भी गिर सकते हैं। घरों में बने शौचालय तक खराब हो गए हैं। इन ढाणियों की लाइफ लाइन बिल्कुल चरमरा गई है। संवाद
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ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर नहीं हुआ नुकसान का ब्योरा अपलोड
सरकार ने बाढ़ के कारण फसलों, मकानों व पशुओं के हुए नुकसान की जानकारी देने के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल को खोल दिया था। लेकिन इन ढाणियों के लोगों के घर लाल डोरे में आते हैं और पोर्टल पर मकान की रजिस्ट्री मांगी जा रही है, जो इनके पास नहीं है। जिस कारण यह नुकसान का ब्यौरा देने से भी वंचित रह गए हैं।
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बाढ़ से दोनों मकान हुए तबाह
मेरे दो मकान गांव में थे और दोनों बाढ़ से पूरी तरह से गिर चुके हैं। मैं मजदूरी का काम करता हूं और मेहनत मजदूरी करके मैंने दोनों मकान बनाए थे और अब यह दोनों गिर चुके हैं। अब दोबारा बनाने पड़ेंगे और सरकार से भी कोई सहायता नहीं मिली है।
-अमनदीप, ढाणी टाहलीवाली

तिरपाल में गुजार रहे रात
हमारे परिवार के तीन मकान थे, तीनों ही गिर चुके हैं। 19 दिन पहले हमको नई अनाज मंडी में शरणार्थी शिविर में रहना पड़ा। जब वापस आए तो मकान पूरी तरह से जर्जर हो चुके थे। सांपों ने यहां पर डेरा डाला हुआ था। अब मकान गिरने के कगार पर हैं और उनको बाहर तिरपाल डाल कर सोना पड़ता है।
-मनजीत कौर, ढाणी टाहलीवाली

कभी भी गिर सकता है मकान
बाढ़ आने से दो माह पहले ही हमने मकान निर्माण का कार्य शुरू किया था। मकान आधा ही बना था कि बाढ़ आ गई, जिससे मकान पूरी तरह से जर्जर हो गया है और कभी भी गिर सकता है। बेटियों की शादी के लिए मकान बनाना आरंभ किया था, अब यह भी गिरने के कगार पर हैं। बेटी की शादी करनी है, तो कैसे करूं, समझ नहीं आ रही।
-छिंदा सिंह, ग्रामीण

बाढ़ ने पूरी तरह से किया तबाह
बाढ़ ने हमें पूरी तरह से तबाह कर दिया। मकान में रखा सामान भी खराब हो गया है। पशुओं के लिए रखी तूड़ी भी बाढ़ के पानी में बह गया। अब दोबारा पशुओं के लिए तूड़ी खरीदकर लानी पड़ी है। सरकार या प्रशासन से मदद की उम्मीद है।

-मनजीत कौर, ढाणी टाहलीवाली

कोट
ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर जो लोग मकान के मालिक थे, वह आवेदन कर सकते थे। अगर उनकी मलकियत नहीं दिख रही तो ऐसा सरकार की ओर से कोई आदेश नहीं है कि उनकी मदद की जाए। पोर्टल पर आए नुकसान की रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई है।

-राजेश कुमार, एसडीएम, फतेहाबाद
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