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पराली जलाने की घटनाओं को रोकने वाली ग्राम पंचायतें होंगी प्रोत्साहित: डीसी
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जिले में जो पंचायतें अपने गांव में पराली जलाने की घटनाओं को रोकेंगी और किसानों को पराली प्रबंधन के बारे में जागरूक करेंगी, उन ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहित किया जाएगा। यह जानकारी उपायुक्त महावीर कौशिक ने लघु सचिवालय के सभागार में कृषि, राजस्व और पंचायत विभाग के अधिकारियों की पराली प्रबंधन विषय पर आयोजित की गई बैठक में दी। उपायुक्त महावीर कौशिक ने कहा कि जिले के 63 गांव रेड जोन और 66 गांव येलो जोन में है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इन गांवों में जागरूकता अभियान चलाए और किसानों को पराली प्रबंधन बारे बताएं। जिन गांवों में कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) है, उनकी सूची पोर्टल पर अपलोड करें ताकि किसान उनसे संपर्क करके पराली प्रबंधन बारे मशीनी उपकरण किराए पर ले सकें। जिले में कहीं भी पराली में आग नहीं लगे, इस लक्ष्य को लेकर प्रशासनिक अधिकारी काम करें। किसान कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से फसल अवशेष प्रबंधन करना सुनिश्चित करें। इसके बावजूद अगर कोई किसान पराली जलाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं पराली जलाने की घटना को रोकने में जन प्रतिनिधि व संबंधित एसएचओ की सीधी जिम्मेदारी बनती है। अगर किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा पट्टे पर दी हुई जमीन पर फानों में आग लगती है तो पट्टेदार सहित संबंधित कर्मचारी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
कस्टम हायरिंग सेंटर लेने के लिए आए 163 आवेदन
बैठक में पोर्टल पर आए हुए 216 कस्टम हायरिंग सेंटरों के आवेदनों पर विचार किया गया और निर्णय लिया गया कि रेडजोन और येलो जाने में आने वाले किसान समूहों को प्राथमिकता के आधार पर कस्टम हायरिंग सेंटर दिए जाए। रेडजोन में 101 व येलो जोन में आए 62 आवेदनों को मंजूरी दी गई। जिला में पहले से ही 414 कस्टम हायरिंग सेंटर काम कर रहे हैं।
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कस्टम हायरिंग सेंटर लेने के लिए आए 163 आवेदन
बैठक में पोर्टल पर आए हुए 216 कस्टम हायरिंग सेंटरों के आवेदनों पर विचार किया गया और निर्णय लिया गया कि रेडजोन और येलो जाने में आने वाले किसान समूहों को प्राथमिकता के आधार पर कस्टम हायरिंग सेंटर दिए जाए। रेडजोन में 101 व येलो जोन में आए 62 आवेदनों को मंजूरी दी गई। जिला में पहले से ही 414 कस्टम हायरिंग सेंटर काम कर रहे हैं।
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