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Fatehabad News: सरकार के नए आदेशों से सरपंच एसोसिएशन में रोष

Thu, 06 Jul 2023 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Thu, 06 Jul 2023 11:16 PM IST
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Fury in the Sarpanch Association due to the new orders of the government
फतेहाबाद में पत्रकारों से बातचीत करते सरपंच एसोसिएशन के प्रदेश प्रवक्ता चंद्रमोहन पोटलिया।
फतेहाबाद। सरपंच एसोसिएशन के प्रदेश प्रवक्ता एवं भट्टूकलां ब्लॉक सरपंच एसोसिएशन के प्रधान चंद्रमोहन पोटलिया ने कहा कि सरकार बार-बार पंचायती राज अधिनियम में बदलाव करके ग्रामीण, किसान व सरपंचों के हाथ बांधने का काम कर रही है। नौ जुलाई को समालखा में होने जा रही सरपंचों की महापंचायत में इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा और नए आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
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वीरवार को पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि हाल ही में सरकार ने छह जून को जो आदेश जारी किए हैं, उसमें सरपंचों को 19 काम करने की अनुमति दी गई है। इनमें 12 काम तो ऐसे हैं, जो पांच साल में भी करवाने मुनासिब नहीं हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि गांवों में स्वागत द्वार लगाए गए हैं। अब सरकार कह रही है कि नए स्वागत द्वारा लगाए जाएं, लेकिन जब पहले से ही स्वागत द्वार बने हुए हैं, तो वह दोबारा कैसे बनाए जा सकते हैं। सरपंच फिरनियां नहीं बनवा सकते और ना ही अन्य काम करवा सकते हैं। उन्होंने कहा कि गांवों में खेतोंं तक पानी पहुंचाने का काम सरपंच का होता है, उसे पता है कि कहां खाल बनवाना है और कहां पानी की व्यवस्था करनी है, लेकिन यह शक्ति भी सरकार ने सरपंचों से छीन ली है।
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विधायकों को गांवों में विकास की शक्ति देकर सरकार एक तरह से ग्रामीण भाईचारे को समाप्त करना चाहती है। विधायक गांव में अपने निजी लोगों के काम करवाएंगे, जबकि गांव का सरपंच निस्वार्थ भाव से गांव का विकास करते है। प्रदेश में ग्राम पंचायतों के सात हजार करोड़ रुपये बिजली व रजिस्ट्री सरचार्ज के सरकार के पास पड़े हैं, जो ग्राम पंचायतों को अभी तक नहीं दिए। ग्रामीणों से यह सरचार्ज तो वसूल लिया जाता है, लेकिन अभी तक ग्राम पंचायतों को यह राशि नहीं दी गई। इसी प्रकार रजिस्ट्री का सरचार्ज भी ग्राम पंचायतों के पास नहीं पहुंचा है।
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सरकार की मंशा सीधे तौर पर इन रुपयों को डकारने की है। यही कारण है कि सरकार प्रतिदिन नए-नए कानून पंचायती राज में थोप रही है। सरपंच ना तो गांव में पशु अस्पताल की देखरेख कर सकते हैं और न ही सरकारी स्कूलों में होने वाली शिक्षा संबंधी कामों की। इस हिसाब से तो सरकार को पंचायती राज महकमा की बंद कर देना चाहिए।
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