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युद्धभूमि से निकलकर जन्मभूमि पहुंचे भूना के चार विद्यार्थी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 05 Mar 2022 11:14 PM IST
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Four students of Bhuna reached the birthplace after leaving the battlefield
भूना निवासी राघव मेहता के साथ पिता अशोक मेहता व अन्य परिजन। - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद/भूना। यूक्रेन से निकलकर अब तक जिले के 71 नागरिकों में से 54 नागरिक सकुशल घरों को लौट आए हैं। कोई पोलैंड के रास्ते तो कोई रोमानिया होते हुए दिल्ली तक पहुंचा। यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे भूना के चार विद्यार्थी भी युद्ध भूमि से निकल कर जन्मभूमि में पहुंच गए हैं। अपने बच्चों को देखकर परिजनों के उन्हें देखा तो चेहरे खुशी से खिल गए। कोई खुशी के आंसू बहाने लगा तो किसी ने तिलक लगाकर स्वागत किया।
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भूना की हिसार रोड स्थित गणेश कॉलोनी निवासी अशोक मेहता का 21 वर्षीय बेटा राघव मेहता भी यूक्रेन से घर आ गया है। मगर भारत तक आने में जो मुसीबतें सामने आई, उनका जिक्र कर राघव विचलित हो जाता है। हालांकि, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मददगार नीति और फाइव स्टार जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर उनका आभार भी जताया। साथ ही सांसद सुनीता दुग्गल द्वारा भी मदद के लिए व्यापक स्तर पर पैरवी करने पर आभार जताया।
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64 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचा पोलैंड बॉर्डर तक
राघव ने बताया कि वह यूक्रेन की लवीव यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की लगातार पांच वर्षों से पढ़ाई कर रहा था। मगर रूस के हमले के बाद वहां का माहौल निराशाजनक एवं चिंताजनक बन चुका है। यूक्रेन में कई शहर बमबारी के कारण तहस-नहस हो गए हैं। 25 फरवरी को यूनिवर्सिटी ने भारत लौटने की इजाजत दी थी। पहले हर विद्यार्थी को डरा धमका कर रखा हुआ था। यूनिवर्सिटी की अनुमति मिलते ही वह अपनी दोस्त की गाड़ी से 794 किलोमीटर लवीव से कीव पहुंचे। मगर कीव में बमबारी होने के कारण वह पोलैंड के सैयनी बॉर्डर पर पहुंच गए। सैयनी बॉर्डर से वह टैक्सी द्वारा पोलैंड बॉर्डर पर जाने लगे तो उनसे 10 गुना किराया टैक्सी चालक ने वसूला। मगर उन्हें 10 किलोमीटर चलते ही बम ब्लास्ट का हवाला दे दिया और टैक्सी से नीचे उतार कर चला गया। छात्र ने बताया कि उन्हें 64 किलोमीटर पैदल चलकर पोलैंड बॉर्डर तक पहुंचना पड़ा। लगातार 72 घंटों तक भूखे-प्यासे माइनस जीरो डिग्री मौसम में भयंकर संकट से गुजरना पड़ा। उस मंजर को याद कर अब भी दिल कांप उठता है। छात्र ने बताया कि एक मार्च को पोलैंड एयरपोर्ट पर एंट्री हो गई थी। मगर फ्लाइट नहीं मिलने के कारण देरी हुई है। परंतु पोलैंड बॉर्डर से लेकर घर तक भारत सरकार ने खाने पीने की सुविधाएं उपलब्ध करवाया है।
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घर लौटी दृष्टि नारंग ने यूक्रेन में भारतीय दूतावास पर जताई नाराजगी
वहीं, यूक्रेन की लवीव यूनिवर्सिटी में द्वितीय वर्ष की छात्रा दृष्टि नारंग भी शनिवार सुबह अपने घर लौट आई है। घर पहुंचने पर दादा रामलाल नारंग व दादी निलावंती नारंग ने अपनी पोती का स्वागत किया। छात्रा के पिता अनिल नारंग व माता रिया नारंग ने दृष्टि नारंग को पगड़ी पहनाई। दृष्टि नारंग ने बातचीत में अपनी संकट भरी आपबीती बयान करते हुए बताया कि यूक्रेन में फंसे भारतीय लोगों की मदद के लिए किसी भी सरकार ने कोई ठोस मदद नहीं की। छात्र-छात्राएं अपने स्तर पर यातनाएं झेल कर विभिन्न बॉर्डर पर पहुंचे हैं। यूक्रेन में हो रही बमबारी से हर कोई भयभीत और सहमा हुआ था। लवीव यूनिवर्सिटी ने पहले तो किसी भी विद्यार्थी को यूनिवर्सिटी छोड़ने की गाइडलाइन जारी नहीं की। जब हालात बिगड़े तो राम भरोसे छोड़ दिया। 24 फरवरी को उन्होंने भारत आने के लिए टिकट बना ली थी। जब वह ट्रेन के माध्यम से कीव जा रही थी तो रास्ते में बम ब्लास्ट हो गया। इसलिए उन्हें वापस यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में जाना पड़ा। दो दिनों तक इधर-उधर भटकना पड़ा। 26 फरवरी को पोलैंड टैक्सी के माध्यम से जा रही थी तो उनकी सहपाठी छात्राओं ने फोन करके बताया कि बॉर्डर पर भारतीय लोगों की पिटाई कर रहे हैं। इस सूचना के बाद वह 10 किलोमीटर पीछे ही टैक्सी से उतर कर खुले आसमान में सड़क पर बैठी रही। जहां पर भारी मात्रा में भारतीय एमबीबीएस की पढ़ाई करने गए छात्र-छात्राएं फंसे हुए थे। विषम परिस्थितियों से गुजर कर एक मार्च को वह रोमानिया बॉर्डर पार करके एयरपोर्ट पर एंट्री कर गई। जहां रोमानिया से दुबई और फिर दिल्ली पहुंचे। वहीं, गणेश कॉलोनी निवासी तनु बेनीवाल व गांव ढाणी सांचला निवासी सुरेश कुमार भी अपने घर सुरक्षित पहुंच गए हैं।
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