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धुंध शुरू, प्रशासन की तैयारी अधूरी

Tue, 12 Nov 2019 11:48 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 12 Nov 2019 11:48 PM IST
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Fog start, administration preparations incomplete
मिनी बाईपास, जहां पर एक साइड तो छोटी दीवार तो दूसरी ओर सुरक्षा को कुछ भी नहीं । - फोटो : Fatehabad
मंगलवार सुबह से वातावरण में धुंध और स्मॉग का असर फिर दिखना शुरू हो गया है। ठंड का मौसम परवान चढ़ने पर धुंध का प्रकोप लगातार बढ़ता जाएगा। ऐसे में धुंध और ठंड के इस मौसम में वाहन चलाते समय, सड़क पर पैदल चलते समय बेहतर रहेगा कि आप खुद अपनी जान बचाने के लिए सजग रहें। अगर जिला प्रशासन के भरोसे बैठे रहे तो हादसा आपसे बहुत ज्यादा दूर नहीं है। कम से कम धुंध के मौसम में हादसों को टालने में अफसरी लापरवाही देखकर तो यहीं लग रहा है। शहर के अंदर प्रवेश करने वाले किसी भी इंट्री- एग्जिट प्वाइंट पर किसी प्रकार की कोई सुरक्षा या साइन बोर्ड तक नहीं लगाए हैं जबकि धुंध के चलते वाहन चालक अक्सर गलत साइड गाड़ी ले आते हैं। सबसे ज्यादा हादसों का डर तो मिनी बाईपास और एमएम कालेज मोड़ पर है जहां न तो सड़क पर कोई सफेद पट्टी है और न ही हादसों को रोकने के लिए किसी प्रकार का कोई साइन बोर्ड।
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एमएम कालेज मोड़, कोई सुरक्षा साइन बोर्ड नहीं, करीब छह माह में छोटे-बड़े 11 हादसे
नेशनल हाइवे से रतिया मुड़ने के लिए एमएम कालेज मोड़ से नेशनल हाइवे और स्टेट हाइवे आपस में मिलते हैं। इस मोड़ पर किसी प्रकार के कोई साइन बोर्ड या अन्य सुरक्षा यंत्र नहीं लगाए हैं। ट्रैफिक को कंट्रोल करने वाले कर्मचारी भी कभी-कभार ही या दिखते हैं। रतिया रोड से नेशनल हाइवे पर आने के लिए एक ही सड़क पर तीन मोड़ हैं और तीनों मोड़ पर किसी प्रकार का कोई ब्रेकर नहीं दिया गया है। ऐसे में वाहन चालक को स्पीड कम करने का मौका ही नहीं मिलता और नेशनल हाइवे से आते वाहन अक्सर दुर्घटना का सबब बनते हैं। पिछले छह माह में ही इस मोड़ पर तकरीबन 11 छोटे बड़े हादसे हो चुके हैं जिसमें कई लोग घायल हुए हैं जबकि एक व्यक्ति ने अपनी जान गंवाई है।
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हिजरावां बाईपास मोड़ सर्वाधिक दुर्घटना संभावित चौराहा
हिजरावां बाईपास मोड़ इस समय शहर के अंदर और बाहर सर्वाधिक दुर्घटना संभावित क्षेत्र के रूप में कुख्यात हो चुका है। इस अकेले चौराहे पर पिछले एक साल में तकरीबन दो दर्जन के करीब हादसे हो चुके हैं जिसमें तीन लोग अपनी जान गवां चुके हैं और तकरीबन 20-22 लोग अलग-अलग हादसों में घायल हो चुके हैं। दरअसल हांसपुर-नागपुर और रतिया साइड पर पडने वाले तकरीबन दो दर्जन गांवों को फतेहाबाद से जोड़ने का यही इकलौता रास्ता है लेकिन सुरक्षा मानक यहां भी खरे नहीं उतरते। कहने को तो यहां अक्सर पुलिस नाका लगा होता है, लेकिन नाके पर पुलिसकर्मी हर वक्त हों, ये जरूरी नहीं।
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मिनी बाईपास के साथ-साथ पांच फीट की गहराई, सफेद पट्टी और रोशनी का भी नहीं प्रबंध
हिसार रोड से बिना शहर में आए भट्टू-बीघड़ आदि के लिए जाने वाला मिनी बाईपास भी इस धुंध के मौसम में कम खतरनाक नहीं है। हिसार चुंगी से शुरू होकर बीघड़ रोड, भट्टू रोड, खैरातीखेड़ा रोड़ होते हुए ये रास्ता सिरसा रोड़ पर नई अनाज मंडी के पास से निकलता है। ऐसे में तकरीबन 5-6 किलोमीटर लंबे इस मिनी बाईपास के एक तरफ तो खाले की दीवार है जो सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है लेकिन दूसरी ओर खाली छोड़ दी गई है। मिनी बाईपास के दूसरी ओर लगभग पांच से छह फीट तक गहराई है। साथ ही इस सड़क पर न तो रोशनी का पर्याप्त प्रबंध है और न ही सड़क के बीच घूमने वाले आवारा पशुओं से सुरक्षा का कोई प्रबंध। ऐसे में मिनी बाईपास पर वाहन चलाते समय भी आपको खुद ही सावधानी रखनी होगी।

कमियों को करेंगे दूर, लोगों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता: एसपी
एसपी विजय प्रताप सिंह ने कहा कि अगर कहीं कोई कमी है तो उसे दूर किया जाएगा। लोगों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है और इसके लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। दरअसल सड़क सुरक्षा किसी एक विभाग की नहीं बल्कि कई विभागों की संयुक्त जिम्मेदारी है। इसके लिए सभी विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों से भी बातचीत की जाएगी।
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