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साधु-संतों पर हो रही थी पुष्पवर्षा: फतेहाबाद से अयोध्या पहुंचे संत विज्ञान प्रेमानंद ने बताई आखों देखी, कहा...

Wed, 24 Jan 2024 10:25 AM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Wed, 24 Jan 2024 10:25 AM IST
सार

अयोध्या से फतेहाबाद लौट रहे संत ने फोन पर बातचीत में बताया कि वह 21 जनवरी अयोध्या के लिए रवाना हुए थे। उनको राम मंदिर से एक किलोमीटर दूर टेंट सिटी में ठहराया गया था। यहां पर सभी संतों के लिए अलग-अलग कमरे व हर प्रकार की व्यवस्था की गई थी।

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Flowers showering on sages and saints, Saint Vigyan Premanand reached Ayodhya from Fatehabad, told story
संत विज्ञान प्रेमानंद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अयोध्या में श्रीराम मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा का समय नजदीक था। साधु-संतों पर पुष्प वर्षा हो रही थी। पहली बार इस परिसर में संतों के सम्मान में इस तरह की व्यवस्था की गई थी। 1997 में जब अयोध्या गया था तो प्रभु राम टेंट में विराजमान थे। दिल पर क्या गुजरा था, मत पूछिए। अब लालसा थी श्रीराम लला का भव्य, दिव्य और नव्य स्वरूप जन्मभूमि पर बने मंदिर में देखने का। ईश्वर ने हमारी प्रार्थना मंजूर भी कर ली थी। मेरा नाम देशभर से आए उन संतों में शुमार था, जिनको प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर अयोध्या आने का निमंत्रण मिला था। प्राण प्रतिष्ठा के बाद प्रभु का दर्शन किया तो लगा जीवन सफल हो गया। यह कहना है अयोध्या से फतेहाबाद लौट रहे श्री अद्वैत विचार आश्रम मंदिर के संत विज्ञान प्रेमानंद का।

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अयोध्या से फतेहाबाद लौट रहे संत ने फोन पर बातचीत में बताया कि वह 21 जनवरी अयोध्या के लिए रवाना हुए थे। उनको राम मंदिर से एक किलोमीटर दूर टेंट सिटी में ठहराया गया था। यहां पर सभी संतों के लिए अलग-अलग कमरे व हर प्रकार की व्यवस्था की गई थी। देश के सभी संप्रदायों, अखाड़ों व संतों से मिलकर मन आनंदित हो गया। हम सबके लिए यह अद्भुत व अकल्पनीय नजारा था। 22 जनवरी को अयोध्या में बादलों की घोर घटा छाई हुई थी।
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एक किलोमीटर पैदल चलकर हम मुख्य पंडाल में पहुंचे थे। यहां पर सभी साधु संतों के लिए अलग से गैलरी बनाई गई थी। करीब 4 हजार संत, 2 हजार विशिष्ट लोग व फिल्मी सितारे, 2 हजार के करीब वीवीआईपी तथा 150 संप्रदायों के संत भी शामिल थे। स्वयंसेवकों ने संभावित बारिश को देखते हुए करीब सात हजार रेन कोट भी बांट दिए थे। तभी करीब 12 बजे हवा का रुख बदला और आसमान से बादल छंट गए। धूप निकल आई।
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लोग भगवान सूर्य और रामलला के जयकारे लगाने लगे। संत विज्ञान प्रेमानंद के अनुसार, भगवान श्रीराम सूर्यवंशी थे। अपने रामलला के अपने जन्मभूमि पर विराजमान होने का मौका भगवान सूर्यदेव भला कैसे छोड़ते। 4 बजे तक सूर्यदेव आसमान पर विराजमान रहे और लोगों ने भगवान राम की प्रतिमा के दर्शन किए। पहले मुख्य यजमानों ने भगवान राम के दर्शन किए, इसके बाद जितने भी आमंत्रित साधु संत व विशिष्ट लोग थे, उनको भगवान श्रीराम के प्रथम दर्शन करवाए गए।

मुख्य यजमानों के बाद अन्य लोगों ने भगवान राम की मूर्ति के दर्शन किए। हेलीकॉप्टर से हुई पुष्पवर्षा का दृश्य काफी मनोरम था। इससे पहले प्रेमानंद वर्ष 1986 में भी वहां गए थे लेकिन तब ढांचा विवादित होने के कारण रामलला के दर्शन नहीं हुए। इसके बाद हुई कारसेवा के कारण कई बार टकराव की नौबत आई। वर्ष 1992 में ढांचा ढहाया गया। तब पुलिस के पहरे के कारण कई बार कारसेवकों को रोका गया। तब अयोध्या में अशांति के बीच सूनी सड़कों पर तैनात सुरक्षा बलों के चित्र दिखे। वर्ष 1997 में रामलला टेंट में विराजमान थे।


लोग हाथों में झंडे लेकर खड़े थे
22 जनवरी को अयोध्या नगरी का नजारा देखने लायक था। हर मुंह पर जय श्री राम के नारे लग रहे थे। लोग हाथों में झंडे लेकर खड़े थे। साधु-संतों पर फूलों की वर्षा की जा रही थी। व्यवस्था ऐसी थी कि किसी को कोई परेशानी नहीं हुई। दीयों से पूरा शहर जगमगा गया था। भगवान राम के पावन दर्शन करने का भी सौभाग्य मिला है। -संत विज्ञान प्रेमानंद, फतेहाबाद।

 

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