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चिलचिलाती धूप में पांच किलोमीटर पैदल सफर और सिर्फ चुनरी का सहारा
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गांव पारता स्थित स्कूल से छुट्टी के बाद शिखर दोपहरी में पैदल घर की तरफ लौटती गांव पिरथला, ठरवा व ठर
- फोटो : Fatehabad
टोहाना। दोपहर का शिखर पहर और चिलचिलाती धूप में पांच किलोमीटर तक का पैदल सफर। सूरज की तपिश से बचने के लिए सिर पर सिर्फ चुनरी का सहारा। यह दिनचर्या है, गांव पिरथला, ठरवा, ठरवी से पारता के लिए पढ़ने जाने वाली छात्राओं की। छात्राओं और छात्रों को यह सफर रोजाना तय करना पड़ता है। दरअसल, गांव पिरथला में केवल 10वीं कक्षा तक ही सरकारी स्कूल है। इस गांव की छात्राओं को आगे की पढ़ाई के लिए गांव पारता के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में जाना पड़ता है।
बता दें कि गांव पिरथला, ठरवा, ठरवी से गांव पारता के लिए बस की कोई सुविधा नहीं है। यहां न रोडवेज बस चलती है और न ही प्राइवेट बस। ग्रामीणों के अनुसार इन गांवों से करीब 80 से अधिक छात्र-छात्राएं प्रतिदिन पांच किलोमीटर पैदल चलकर घर से स्कूल और स्कूल से घर पहुंचते हैं। ऐसे में विद्यार्थी पढ़ने के लिए किस कदर परेशानियां झेल रहे हैं, इसका सहज अंदाजा लग सकता है। संवाद
समय से स्कूल पहुंचने के सुबह एक घंटा पहले घर से निकलते हैं विद्यार्थी
गांव पिरथला से पारता के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 12वीं कक्षा में पढ़ने के लिए जाने वाली छात्रा कुशल, सीमा, कुमकुम, आरजू, पूनम, साक्षी व नीतू बताती हैं कि सुबह 8 बजे स्कूल लगता है। मगर उन्हें एक घंटे पहले घर से निकलना पड़ता है क्योंकि पांच किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल में पहुंचना होता है। इसी तरह स्कूल से शिखर दोपहरी में ढाई बजे छुट्टी होते ही घर वापसी के लिए भी इतना ही पैदल चलना पड़ता है। छात्राओं ने बताया कि इतने लंबे रास्ते सुनसान रास्ते पर बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उनकी सुरक्षा का भी किसी को कोई ख्याल नहीं है। बेटी बचाओ व बेटी पढ़ाओ का नारा भी सिर्फ कागजों में ही दिखता है।
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कैबिनेट मंत्री तक पहुंची आवाज, फिर भी समाधान नहीं हुआ
छात्र-छात्राओं ने बताया कि उन्होंने अपनी समस्या कैबिनेट मंत्री देवेंद्र सिंह बबली के पास भी रखी थी, लेकिन अभी तक उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ है।
कोट
सरपंच बोले- हर नेता को बताई समस्या, समाधान कुछ नहीं
हमारे गांव के विद्यार्थी हर रोज पांच किलोमीटर पैदल सफर करके पढ़ाई करते हैं। बच्चों के हालात चिंतनीय हैं। इस समस्या को कई बार टोहाना के नेताओं के सामने रखा, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।
-डॉ. दलबीर सिंह, निवर्तमान सरपंच प्रतिनिधि, गांव पिरथला
कोट
दो किलोमीटर से ज्यादा दूरी से आने वाली छात्राओं को सरकार साइकिल उपलब्ध करवाती है। शिक्षा विभाग किलोमीटर के हिसाब से बस या अन्य वाहन के लिए पैसे भी देता है। छात्राओं को साइकिल चाहिए तो वे ले सकती हैं।
-रघुबीर सिंह नैन, खंड शिक्षा अधिकारी, टोहाना
गांव का कोई व्यक्ति या छात्राएं हमारे पास प्रार्थना पत्र दे सकते हैं। इसके बाद रोडवेज बस सेवा शुरू करवाने का प्रयास किया जाएगा।
-शेर सिंह, महाप्रबंधक, हरियाणा रोडवेज, फतेहाबाद
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बता दें कि गांव पिरथला, ठरवा, ठरवी से गांव पारता के लिए बस की कोई सुविधा नहीं है। यहां न रोडवेज बस चलती है और न ही प्राइवेट बस। ग्रामीणों के अनुसार इन गांवों से करीब 80 से अधिक छात्र-छात्राएं प्रतिदिन पांच किलोमीटर पैदल चलकर घर से स्कूल और स्कूल से घर पहुंचते हैं। ऐसे में विद्यार्थी पढ़ने के लिए किस कदर परेशानियां झेल रहे हैं, इसका सहज अंदाजा लग सकता है। संवाद
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समय से स्कूल पहुंचने के सुबह एक घंटा पहले घर से निकलते हैं विद्यार्थी
गांव पिरथला से पारता के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 12वीं कक्षा में पढ़ने के लिए जाने वाली छात्रा कुशल, सीमा, कुमकुम, आरजू, पूनम, साक्षी व नीतू बताती हैं कि सुबह 8 बजे स्कूल लगता है। मगर उन्हें एक घंटे पहले घर से निकलना पड़ता है क्योंकि पांच किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल में पहुंचना होता है। इसी तरह स्कूल से शिखर दोपहरी में ढाई बजे छुट्टी होते ही घर वापसी के लिए भी इतना ही पैदल चलना पड़ता है। छात्राओं ने बताया कि इतने लंबे रास्ते सुनसान रास्ते पर बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उनकी सुरक्षा का भी किसी को कोई ख्याल नहीं है। बेटी बचाओ व बेटी पढ़ाओ का नारा भी सिर्फ कागजों में ही दिखता है।
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कैबिनेट मंत्री तक पहुंची आवाज, फिर भी समाधान नहीं हुआ
छात्र-छात्राओं ने बताया कि उन्होंने अपनी समस्या कैबिनेट मंत्री देवेंद्र सिंह बबली के पास भी रखी थी, लेकिन अभी तक उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ है।
कोट
सरपंच बोले- हर नेता को बताई समस्या, समाधान कुछ नहीं
हमारे गांव के विद्यार्थी हर रोज पांच किलोमीटर पैदल सफर करके पढ़ाई करते हैं। बच्चों के हालात चिंतनीय हैं। इस समस्या को कई बार टोहाना के नेताओं के सामने रखा, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।
-डॉ. दलबीर सिंह, निवर्तमान सरपंच प्रतिनिधि, गांव पिरथला
कोट
दो किलोमीटर से ज्यादा दूरी से आने वाली छात्राओं को सरकार साइकिल उपलब्ध करवाती है। शिक्षा विभाग किलोमीटर के हिसाब से बस या अन्य वाहन के लिए पैसे भी देता है। छात्राओं को साइकिल चाहिए तो वे ले सकती हैं।
-रघुबीर सिंह नैन, खंड शिक्षा अधिकारी, टोहाना
गांव का कोई व्यक्ति या छात्राएं हमारे पास प्रार्थना पत्र दे सकते हैं। इसके बाद रोडवेज बस सेवा शुरू करवाने का प्रयास किया जाएगा।
-शेर सिंह, महाप्रबंधक, हरियाणा रोडवेज, फतेहाबाद

गांव पारता स्थित स्कूल से छुट्टी के बाद शिखर दोपहरी में किसी वाहन की बाट देखते छात्र-छात्राएं।- फोटो : Fatehabad