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दलित को खदेड़ा, जाटों ने जमाया डेरा
ब्यूरो/अमर उजाला फतेहाबाद
Updated Wed, 06 Apr 2016 12:09 AM IST
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धरने पर बैठा दलित।
- फोटो : bureau
लघु सचिवालय से बाहर निकलते ही बाएं हाथ पर बने पार्क में मंगलवार को लगभग दो सौ से अधिक जाट प्रदर्शनकारियों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया, ये वही जगह है, जहां से बामुश्किल तीन-चार दिन पहले प्रशासन ने धारा-144 का हवाला देते हुए शांतिपूर्वक धरना दे रहे दलित दंपति राजेश और मूर्तिदेवी को खदेड़ दिया था।
दलित दंपति का सामान जबरन उठवाकर राजेश को हिरासत में लेने वाली फतेहाबाद पुलिस के मुंह से मंगलवार को धारा-144 के माइक पर उड़ती धज्जियों के बारे में आवाज तक नहीं निकली। हैरत तो इस बात की है कि धरने पर बैठे राजेश को रातोंरात 'गायब करने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जाट प्रदर्शनकारियों के सामने आवाज तक नहीं निकली। किसी भी कर्मचारी ने नारेबाजी कर रहे जाट प्रदर्शनकारियों से इतना तक कहने की जहमत नहीं उठाई कि वे कानून का उल्लंघन कर रहे हैं।
बीते दिन भी कोर्ट परिसर के बाहर हुए थे इकट्ठे, ड्यूटी मजिस्ट्रेट बुलाने तक आई थी नौबत जाट युवा नेताओं को गिरफ्तार करने के खिलाफ जाट नेताओं ने सोमवार को भी धारा-144 की धज्जियां उड़ाई थी। उस वक्त भी जिला और पुलिस प्रशासन ना केवल खामोश रहे बल्कि जाट नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को उपायुक्त एवं पुलिस कप्तान से मिलवाने ले गए और जब तक जाट प्रतिनिधिमंडल वापस नहीं आया, प्रदर्शन करने आए बाकी जाट प्रदर्शनकारी सचिवालय प्रांगण के अंदर सड़क पर ही बैठे रहे। उस वक्त भी प्रशासन ने मौन ही धारण कर लिया था।
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सचिवालय में लगी हुई है धारा-144, पांच से अधिक नहीं हो सकते एकत्रित
जिला प्रशासन के आदेश पर ही सचिवालय के पास धारा-144 लगाई गई है। इसके तहत सचिवालय में पांच से अधिक लोग एकत्रित नहीं हो सकते। इसके अलावा सचिवालय में हथियार लेकर चलने पर भी पाबंदी है। लेकिन इन बातों को खुद सुरक्षाकर्मी ही गंभीरता से नहीं लेते। हालांकि प्रदर्शन के दौरान जरूर कभी-कभार प्रशासन धारा-144 का हवाला देता है ताकि अधिक भीड़ को डीसी दफ्तर ना ले जाना पड़े। लेकिन प्रशासन की कार्यवाही उस वक्त सवालों के घेरे में आ गई थी जब बीते दिनों प्रशासन ने रातों-रात धरना दे रहे दलित राजेश को गिरफ्तार कर लिया और उसके सामान को फिंकवा कर उसके धरने की जगह को साफ करवा दिया था।
'इस बारे में एसपी महोदय ही बेहतर बता सकते हैं। आप उन्हीं से बात कर लें ।
गंगा राम पूनियां, एएसपी, फतेहाबाद ।
इस बारे में एसपी फतेहाबाद ओपी नरवाल से बात करने की कोशिश की गई तो उनका फोन कवरेज क्षेत्र से बाहर बताता रहा ।
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दलित दंपति का सामान जबरन उठवाकर राजेश को हिरासत में लेने वाली फतेहाबाद पुलिस के मुंह से मंगलवार को धारा-144 के माइक पर उड़ती धज्जियों के बारे में आवाज तक नहीं निकली। हैरत तो इस बात की है कि धरने पर बैठे राजेश को रातोंरात 'गायब करने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जाट प्रदर्शनकारियों के सामने आवाज तक नहीं निकली। किसी भी कर्मचारी ने नारेबाजी कर रहे जाट प्रदर्शनकारियों से इतना तक कहने की जहमत नहीं उठाई कि वे कानून का उल्लंघन कर रहे हैं।
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बीते दिन भी कोर्ट परिसर के बाहर हुए थे इकट्ठे, ड्यूटी मजिस्ट्रेट बुलाने तक आई थी नौबत जाट युवा नेताओं को गिरफ्तार करने के खिलाफ जाट नेताओं ने सोमवार को भी धारा-144 की धज्जियां उड़ाई थी। उस वक्त भी जिला और पुलिस प्रशासन ना केवल खामोश रहे बल्कि जाट नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को उपायुक्त एवं पुलिस कप्तान से मिलवाने ले गए और जब तक जाट प्रतिनिधिमंडल वापस नहीं आया, प्रदर्शन करने आए बाकी जाट प्रदर्शनकारी सचिवालय प्रांगण के अंदर सड़क पर ही बैठे रहे। उस वक्त भी प्रशासन ने मौन ही धारण कर लिया था।
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सचिवालय में लगी हुई है धारा-144, पांच से अधिक नहीं हो सकते एकत्रित
जिला प्रशासन के आदेश पर ही सचिवालय के पास धारा-144 लगाई गई है। इसके तहत सचिवालय में पांच से अधिक लोग एकत्रित नहीं हो सकते। इसके अलावा सचिवालय में हथियार लेकर चलने पर भी पाबंदी है। लेकिन इन बातों को खुद सुरक्षाकर्मी ही गंभीरता से नहीं लेते। हालांकि प्रदर्शन के दौरान जरूर कभी-कभार प्रशासन धारा-144 का हवाला देता है ताकि अधिक भीड़ को डीसी दफ्तर ना ले जाना पड़े। लेकिन प्रशासन की कार्यवाही उस वक्त सवालों के घेरे में आ गई थी जब बीते दिनों प्रशासन ने रातों-रात धरना दे रहे दलित राजेश को गिरफ्तार कर लिया और उसके सामान को फिंकवा कर उसके धरने की जगह को साफ करवा दिया था।
'इस बारे में एसपी महोदय ही बेहतर बता सकते हैं। आप उन्हीं से बात कर लें ।
गंगा राम पूनियां, एएसपी, फतेहाबाद ।
इस बारे में एसपी फतेहाबाद ओपी नरवाल से बात करने की कोशिश की गई तो उनका फोन कवरेज क्षेत्र से बाहर बताता रहा ।