{"_id":"56f04ddf4f1c1bc31bf14d2c","slug":"fatehabad-news-hindi-news-health-medicine-checking-fatehabad","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिशुओं को पिलाया जा रहा था डिब्बा बंद दूध, सीएमओ ने लगाई लताड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिशुओं को पिलाया जा रहा था डिब्बा बंद दूध, सीएमओ ने लगाई लताड़
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहाबाद
Updated Tue, 22 Mar 2016 01:09 AM IST
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नवजात बच्ची
- फोटो : AmarUjala
फतेहाबाद में स्वास्थ्य सेवाओं का ढ़ांचा इस कदर बिगड़ा हुआ है कि अधिकारी लाख प्रयासों के बावजूद भी सुधारने में कामयाब नहीं हो पा रहे। दिन-प्रतिदिन एक के बाद एक घोटाले व अनियमिताओं का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। सिविल सर्जन डा.अशोक चौधरी ने सिविल अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड में औचक निरीक्षण किया तो हैरान रह गए कि यहां हाल ही में प्रसुता अपने बच्चों को अपना दूध न पिलाकर डिब्बा बंद दूध पिला रही थी।
इतना ही इस वार्ड में कई प्रस्तुाओं के पास डिब्बा बंद दूध रखा मिला। सिविल सर्जन ने जब इस बारे महिलाओं से पूछा तो उन्होंने कहा कि स्टाफ ने ही दूध न आने पर उन्हें उपर का डिब्बा बंद दूध पिलाने की सलाह दी है। सिविल सर्जन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत एसएमओ से लिखित में स्पष्टीकरण मांगा है।
केन्द्र व प्रदेश सरकार स्वास्थ्य मिशन व नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को लेकर अनेक संचार माध्यमों से माताओं को स्तनपान के लिए जागरूक करती है। ताकि शिशु विकास दर को बढ़ाया जा सके। इसके विपरीत स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी सरकार की इस योजना को पलीता लगाने में जुटे हैं। फतेहाबाद के सिविल अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड में लापरवाही व तंग करने को लेकर सिविल सर्जन के पास शिकायतें पहुंच रही थी।
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सिविल सर्जन डा.अशोक चौधरी ने टीम के साथ जच्चा-बच्चा वार्ड का निरीक्षण किया। देखा की नवजात शिशुओं को डिब्बा बंद दूध पिलाया जा रहा है। हैरानी तो उस समय आई जब पूछने पर बताया गया कि स्टाफ नर्सों ने ही पिलाने के लिए कहा है। इस पर सिविल सर्जन ने स्टाफ को लताड़ लगाई। वार्ड का रजिस्टर चैक करने पर उसमें काफी खामिया पाई गई।
जच्चा-बच्चा वार्ड में प्रस्सुताओं की समय पर मोनिटरिंग नहीं की जा रही थी। समय पर बी.पी प्लस व दवाईयां नहीं देने की बात सामने आई। दूसरी ओर जच्चा-बच्चा वार्ड में देखभाल के लिए यशोदा वर्कर की ड्यूटी लगाई गई है जो माताओं की देखभाल के साथ शिशुओं की देखभाल के बारे में जानकारी देती है। इन सब के बावजूद जच्चा-बच्चा वार्ड की हालत खराब है। जिस पर सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से एसएमओ को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया है।
जरूरी है मां का दूध पिलाना:
चिकित्सकों की माने तो मां का पहला गाड़ा पीला दूध में रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है जो शिशु को रोगों से लड़ने की ताकत देती है। इसलिए मां शिशु को स्तनपान जरूर करवाए। नार्मल डिलीवरी के आधे घंटे बाद तथा सिजीरियन डिलीवरी केस में एक घंटे बाद स्तनपान शुरू कर देना चाहिए। डाक्टरों की माने तो मां का दूध जरूर उतरता है। आमतौर पर एक बार में दूध न उतरने पर माताएं कोशिश करना छोड़ देती हैं।
अब चतुर्थ श्रेणी नहीं, स्टाफ नर्स करेगी शिशु को हैंडओवर:
डिलीवरी केस होने के बाद आमतौर पर बच्चे की क्लीयरिंग के बाद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैंडओवर करती है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नए आदेश के अनुसार डिलीवरी के बाद स्टाफ नर्स बच्चे की क्लीयरिंग करेगी साथ ही बच्चे को मां के पास हैंडओवर करेगी। साथ उसे जागरूक करेगी कि वह स्तनपान करवाए तथा बच्चे को अपने शरीर के साथ लगाकर रखे।
सीएमओ के निरीक्षण के दौरान डिब्बा बंद दूध मिला है। दूध न उतरने पर तीमारदार दूसरे लोगों के बहकावे में आकर ले आते हैं। इस बारे में यशोदा वर्कर को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं। बच्चे को अब सिर्फ स्टाफ नर्स ही हैंडओवर करेगी। जो माताओं को जागरूक भी करेगी। इसके साथ बधाई पर रोक के साथ शिशु की देखभाल भी अच्छी होगी। -डा.गिरीश, डिप्टी सिविल सर्जन
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इतना ही इस वार्ड में कई प्रस्तुाओं के पास डिब्बा बंद दूध रखा मिला। सिविल सर्जन ने जब इस बारे महिलाओं से पूछा तो उन्होंने कहा कि स्टाफ ने ही दूध न आने पर उन्हें उपर का डिब्बा बंद दूध पिलाने की सलाह दी है। सिविल सर्जन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत एसएमओ से लिखित में स्पष्टीकरण मांगा है।
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केन्द्र व प्रदेश सरकार स्वास्थ्य मिशन व नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को लेकर अनेक संचार माध्यमों से माताओं को स्तनपान के लिए जागरूक करती है। ताकि शिशु विकास दर को बढ़ाया जा सके। इसके विपरीत स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी सरकार की इस योजना को पलीता लगाने में जुटे हैं। फतेहाबाद के सिविल अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड में लापरवाही व तंग करने को लेकर सिविल सर्जन के पास शिकायतें पहुंच रही थी।
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सिविल सर्जन डा.अशोक चौधरी ने टीम के साथ जच्चा-बच्चा वार्ड का निरीक्षण किया। देखा की नवजात शिशुओं को डिब्बा बंद दूध पिलाया जा रहा है। हैरानी तो उस समय आई जब पूछने पर बताया गया कि स्टाफ नर्सों ने ही पिलाने के लिए कहा है। इस पर सिविल सर्जन ने स्टाफ को लताड़ लगाई। वार्ड का रजिस्टर चैक करने पर उसमें काफी खामिया पाई गई।
जच्चा-बच्चा वार्ड में प्रस्सुताओं की समय पर मोनिटरिंग नहीं की जा रही थी। समय पर बी.पी प्लस व दवाईयां नहीं देने की बात सामने आई। दूसरी ओर जच्चा-बच्चा वार्ड में देखभाल के लिए यशोदा वर्कर की ड्यूटी लगाई गई है जो माताओं की देखभाल के साथ शिशुओं की देखभाल के बारे में जानकारी देती है। इन सब के बावजूद जच्चा-बच्चा वार्ड की हालत खराब है। जिस पर सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से एसएमओ को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया है।
जरूरी है मां का दूध पिलाना:
चिकित्सकों की माने तो मां का पहला गाड़ा पीला दूध में रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है जो शिशु को रोगों से लड़ने की ताकत देती है। इसलिए मां शिशु को स्तनपान जरूर करवाए। नार्मल डिलीवरी के आधे घंटे बाद तथा सिजीरियन डिलीवरी केस में एक घंटे बाद स्तनपान शुरू कर देना चाहिए। डाक्टरों की माने तो मां का दूध जरूर उतरता है। आमतौर पर एक बार में दूध न उतरने पर माताएं कोशिश करना छोड़ देती हैं।
अब चतुर्थ श्रेणी नहीं, स्टाफ नर्स करेगी शिशु को हैंडओवर:
डिलीवरी केस होने के बाद आमतौर पर बच्चे की क्लीयरिंग के बाद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैंडओवर करती है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नए आदेश के अनुसार डिलीवरी के बाद स्टाफ नर्स बच्चे की क्लीयरिंग करेगी साथ ही बच्चे को मां के पास हैंडओवर करेगी। साथ उसे जागरूक करेगी कि वह स्तनपान करवाए तथा बच्चे को अपने शरीर के साथ लगाकर रखे।
सीएमओ के निरीक्षण के दौरान डिब्बा बंद दूध मिला है। दूध न उतरने पर तीमारदार दूसरे लोगों के बहकावे में आकर ले आते हैं। इस बारे में यशोदा वर्कर को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं। बच्चे को अब सिर्फ स्टाफ नर्स ही हैंडओवर करेगी। जो माताओं को जागरूक भी करेगी। इसके साथ बधाई पर रोक के साथ शिशु की देखभाल भी अच्छी होगी। -डा.गिरीश, डिप्टी सिविल सर्जन