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कई शर्तों के साथ 11 महीने बाद भेजी ग्रांट
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
Updated Wed, 07 Dec 2016 11:47 PM IST
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असल कहावत है, देर आए, दुरुस्त आए, लेकिन प्रदेश की भाजपा सरकार पूरे 11 माह बाद अपने वादे पर दुरुस्त आती नजर आई है। इसी साल जनवरी में पंचायत चुनावों के बाद से सर्वसम्मति से चुने गए जनप्रतिनिधियों को अपनी विशेष ग्रांट का इंतजार था जो अब जाकर खत्म हुआ है। जी हां, सरकार ने पंचायत चुनावों में सर्वसम्मति से चुने गए जिप पार्षदों, पंचायत समिति सदस्यों, सरपंचों, पंचों और पंचायतों के लिए घोषित की गई ग्रांट संबंधित पंचायतों के खाते में जमा करा दी है, लेकिन 11 माह बाद भेजी गई ग्रांट के साथ-साथ प्रदेश सरकार ने कई तरह की शर्तेें भी जोड़ दी हैं। फतेहाबाद में इस योजना के तहत लगभग 12 करोड़ की ग्रांट पहुंची है।
पंचायत चुनावों में खून-खराबा रोकने को उठाया था कदम
प्रदेश सरकार द्वारा पंचायत चुनावों में आपसी भाईचारा बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार ने ऐलान किया था कि इन पंचायत चुनावों में सर्वसम्मति से जो पंचायत, सरपंच, पंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य निर्विरोध चुनी जाएगी, उसे सरकार की ओर से विशेष ग्रांट दी जाएगी।
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इसके तहत निर्विरोध पंचायत पर 11 लाख, सरपंच पर 5 लाख, पंचायत समिति सदस्य को 1 लाख, जिप पार्षद को 2 लाख व पंच को 50 हजार रुपये की ग्रांट मिलनी थी। इसके पीछे सरकार की मंशा इन चुनावों में आमतौर पर होने वाले खून-खराबे को रोकने की थी और इसमें सरकार कामयाब भी हुई थी। फतेहाबाद जिले में इक्का-दुक्का छोटी मोटी घटनाओं को छोड़कर पंचायत चुनाव शांतिपूर्ण ही हुए थे। ऐसे में सरकार का ये दांव काम कर गया था।
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फतेहाबाद में ही सबसे ज्यादा 30 सरपंच चुने गए थे निर्विरोध
सरकार के इस फैसले का फतेहाबाद जिले में ही सबसे ज्यादा असर हुआ। फतेहाबाद जिले में 30 सरपंच निर्विरोध चुने गए जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक थे। इसके अलावा 19 ग्राम पंचायतें, 1834 पंच एवं 10 पंचायत समिति सीटों पर भी चुनावों की नौबत नहीं आई थी। हालांकि जिले में एक भी जिला परिषद सीट पर सर्वसम्मति नहीं हो सकी थी। लेकिन प्रदेश में सबसे ज्यादा सरपंच सर्वसम्मति से चुने जाने से प्रदेश भर में फतेहाबाद का नाम जरूर रोशन हुआ था।
सरपंच और जनप्रतिनिधि लगाते रहते थे दफ्तरों के चक्कर, मानदेय भी मिला था देरी से
जनवरी में चुनाव सम्पन्न होने के बाद सर्वसम्मति से चुने गए जनप्रतिनिधि पहले तो काफी दिनों तक विशेष ग्रांट का इंतजार करते रहे लेकिन धीरे-धीरे इंतजार दिनों की बजाए महीनों का हो गया। खुद अधिकारियों को भी इन जनप्रतिनिधियों के सवालों का जवाब देना दुभर होने लगा। इसी तरह जनप्रतिनिधियों को पहले अपने मानदेय के लिए भी काफी इंतजार करना पड़ा था।
ग्रांट को अपनी मर्जी से खर्च नहीं कर सकेंगे सरपंच और पंच
जिला विकास एवं पंचायत विभाग के अधिकारियों की मानें तो सर्वसम्मति से चुने गए जनप्रतिनिधि ग्रांट का इस्तेमाल अपने निजी फायदे के लिए बिल्कुल नहीं कर सकेंगे। इसके लिए बकायदा प्रावधान किया गया है। उन्हें इस ग्रांट का इस्तेमाल करने के लिए ग्राम सभा की बैठक में प्रस्ताव पास करवाकर ही ग्रांट इस्तेमाल करनी होगी। इसमें ग्राम सचिव की उपस्थिति अनिवार्य होगी।
प्रस्ताव पास कराकर ही खर्च की जा सकेगी ग्रांट
जिले भर के उन सभी जनप्रतिनिधियों की विशेष ग्रांट आ गई है जो पंचायत चुनाव में सर्वसम्मति से चुने गए थे। इस ग्रांट को ग्राम सभा की बैठक में प्रस्ताव पास करवाकर ही खर्च किया जा सकेगा।
राजेश खोथ, डीडीपीओ, फतेहाबाद।