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कैशलेस व्यवस्था : ऑनलाइन सिस्टम अपनाया, बिजनेस को और बेहतर बनाया
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
Updated Thu, 01 Dec 2016 11:59 PM IST
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किराने की दुकान पर कार्ड स्वैप करते ग्राहक ।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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आठ नवंबर की रात फतेहाबाद के बाजार के लिए एक यादगार तारीख साबित होगी क्योंकि इस तारीख पर किए गए नोट बंदी के फैसले ने यहां के बाजार को एकदम से डिजिटलाइजेशन की ओर मोड़ दिया है। नोट बंदी के बाद जब एक ओर बाजारों में दुकानों का काम मंदा पड़ता जा रहा था तो इसी बीच कुछ दुकानदारों ने व्यवस्था के साथ खुद को बदलने का रिस्क लिया और अब उसका फायदा उनका बिजनेस उठा रहा है।
फतेहाबाद के जिन दुकानदारों ने नोट बंदी के बाद ऑनलाइन पेमेंट के विकल्प को अपनाया है, उन्हें ना केवल काफी फायदा हुआ, बल्कि उनकी दुकान में बिक्री भी पहले के मुकाबले काफी बढ़ गई है। ‘अमर उजाला’ ने ऐसे ही दुकानदारों से बात कर जानी नोट बंदी के बाद उनके धंधे की कामयाबी की कहानी।
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धंधा मंदा होने से थे परेशान, मोबाइल वॉलेट से मिली राहत
हमारा कपड़ों का शोरूम है। नोट बंदी के बाद हमने भी पुराने नोट लेने बंद कर दिए। ऐसे में जो उपभोक्ता पुराने नोट लेकर आते थे, उन्हें हमें मजबूरन वापस भेजना पड़ता था। इसका असर हमारे पुराने ग्राहकों के साथ संबंधों पर भी पड़ने लगा।
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किसी खास ग्राहक से मजबूरी में पांच सौ-हजार के नोट ले भी लें तो हमारे लिए दिक्कत कि कैसे उन्हें जमा कराएं क्योंकि बैंकों के बाहर लंबी-लंबी लाइनें होती हैं और दुकानदार के लिए इतना समय नहीं कि वो बैंकों में घंटों कतारों में खड़ा रह सके। ऐसे में मजबूरी में ई-वालेट और ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम को अपनाया। ये कदम बहुत बेहतर साबित हुआ और इससे हमारे ग्राहक भी संतुष्ट और पुराने नोटों को जमा कराने की हमारी टेंशन भी खत्म। फिलहाल मोबाइल वॉलेट और इंटरनेट बैंकिंग से पेमेंट ले रहे हैं, लेकिन अब बहुत जल्द कार्ड स्वैप मशीन भी मंगवाने के बारे सोच रहे हैं।
-विकास बाघला, संचालक नाज इंपोरियम, फतेहाबाद ।
ऑनलाइन पेमेंट का ग्राहकों को दिया विकल्प तो पहले से ज्यादा बिका राशन
पुराने नोटों पर प्रतिबंध के बाद हमने होलसेल विक्रेताओं को पुराने नोट देने चाहे तो उन्होंने लेने से मना कर दिया। चेक से देने का विकल्प भी नहीं था क्योंकि चेक दो दिन के बाद जाकर क्लियर होता। ऐसे में किसी साथी ने मोबाइल वॉलेट का आइडिया दिया। मैने तुरंत एप्लीकेशन डाउनलोड की और होलसेल विक्रेता के बेटे के वॉलेट में पेमेंट ट्रांसफर कर दी। अगले ही दिन दुकान का माल आ गया। इसके बाद कार्ड स्वैप मशीन भी तुरंत दुकान पर चालू कराई।
अब गर्व से कह सकते हैं कि हम शहर की उन चुनिंदा दुकानों में शामिल हैं जो पूरी तरह डिजिटल हैं। इसका फायदा भी काफी हुआ, पहले जो ग्राहक हमारी दुकान की बजाए दूसरी दुकानों से सामान खरीदते थे, नोट बंदी के बाद वो भी हमसे सामान लेने लगे। अंदाजा लगाया जाए तो आम दिनों के मुकाबले इन दिनों हमारी सेल में लगभग 60 फीसदी का इजाफा हुआ है। अब तो ये सिस्टम कर दिया गया कि अगर उपभोक्ता ऑनलाइन पेमेंट करता है तो उसे 2 प्रतिशत का कैशबैक भी देते हैं।
-नीरज चौधरी, संचालक, चौधरी किरयाणा स्टोर।
छुट्टे पैसे का झंझट खत्म, ग्राहक को भी सहूलियत
मोबाइल रिचार्ज का काम है। रिचार्ज के विकल्प ही ऐसे होते हैं कि उनके बिना हमारा काम नहीं चल सकता। खासतौर पर ग्राहक बड़े नोट लेकर आते और छोटा रिचार्ज कराकर पैसे खुल्ले कराकर ले जाते। दो दिन में ही हमारे पास खुल्ले पैसों की किल्लत होने लग गई।
अब ग्राहक को बार-बार मना कर सकते नहीं थे और बिना सेल के काम भी प्रभावित हो रहा था। ऐसे में मोबाइल वॉलेट का विकल्प शुरू कर दिया। इससे ना केवल सेल में काफी इजाफा हुआ, बल्कि छुट्टे पैसे वापिस देने का झंझट ही खत्म हो गया। हालातों से लग रहा है कि नोटों की तंगी मार्च तक रहने वाली है, ऐसे में कार्ड स्वैप मशीन के विकल्प के बारे में भी गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
-हैप्पी लूना, संचालक लूना मोबाइल, फतेहाबाद ।