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कैशलेस पर रुझान, ऑनलाइन सुरक्षा का कौन करेगा ध्यान
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
Updated Sat, 17 Dec 2016 12:32 AM IST
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एएसपी गंगाराम पूनियां
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नोटबंदी के बाद से प्रदेश सरकार का पूरा जोर लोगों को कैशलेस व्यवस्था की ओर मोडने को लेकर है। सूबे के मु यमंत्री जगह-जगह लोगों को कैशलेस व्यवस्था अपनाने का आह्वान करते दिख रहे हैं लेकिन यकीन मानिए, आपका पैसा बैंकों में भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। नोटबंदी के बाद से ही इस तरह की लगभग 3 ऐसी वारदातें हो चुकी हैं जिसमें चोरों ने शातिराना तरीके से ऑनलाइन ही उपभोक्ता के बैंक खाते को खाली कर दिया।
हैरत की बात तो ये है कि तीनों वारदातों में अभी तक पुलिस एक भी मामले को सुलझा नहीं सकी है। हालांकि पुलिस कप्तान ने लोगों से ये आह्वान जरूर किया है कि अपनी बैंक डिटेल किसी को ना दें लेकिन चोर ही इतना शातिर निकले कि फोन पर चिकनी-चुपड़ी बातें करके बुजुर्गों से बैंक डिटेल निकलवा ले तो उसका पता चलाना पुलिस के लिए भी टेढ़ी खीर ही साबित हो तरहा है।
कैशलेस बनाने पर जोर, ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर पुख्ता नहीं प्रबंध
जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार लोगों को कैशलेस व्यवस्था अपनाने पर लगातार जागरुकता अभियान चला रहे हैं, लेकिन कैशलेस ट्रांजेक्शन को सुरक्षित कैसे रखा जा सकता है, इस बारे अभी तक कोई जागरूकता अभियान ना तो प्रदेश सरकार की ओर से और ना ही जिला प्रशासन की ओर से चलाया गया है। जमीनी धरातल की बात की जाए तो प्रशासन का अभी इस ओर ध्यान ही नहीं गया है। दो दिन पूर्व एसपी ओपी नरवाल की ओर से इस बाबत एक बयान जारी किया गया था कि लोग अपना एटीएम पिन किसी को ना दें, इसके अलावा ना तो साइबर सैल की ओर से और ना जिला प्रशासन की ओर से इस तरह की कोई तकनीकी जानकारी लोगों को उपलब्ध करवाई गई है। अगर साइबर सेल की बात की जाए तो पिछले महीनों में हुई बहुत ज्यादा वारदातों को ये सेल सुलझा नहीं सका है।
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विशेष सॉफ्टवेयर से करते हैं फोन, कई बार फोन हैक करके करते हैं इस्तेमाल
पुलिस विभाग के सूत्रों की मानें तो बैंक कर्मी बनकर ऑनलाइन ठगी करने वाले ठग इस तरह की वारदातों में अक्सर एक विशेष सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं। इसके जरिए ये लोग किसी साधारण व्यक्ति के मोबाइल नंबर को हैक कर लेते हैं और फोन नंबर के मालिक को पता भी नहीं चलता कि उसका फोन हैक कर लिया गया है। व्यक्ति को तो तब पता चलता है जब उसके पास पुलिस या अन्य व्यक्ति का पूछताछ के लिए फोन जाता है।
ये तरीके अपना लोगों को लूट रहे हैं ऑनलाइन चोर
1. बैंककर्मी बन झूठे कॉल्स के जरिए : इस व्यवस्था में अक्सर ये सुनने में आता है कि किसी बैंक उपभोक्ता के पास फोन आता है और दूसरी ओर से बोलने वाला व्यक्ति खुद को बैंककर्मी बताकर उपभोक्ता को उसका कार्ड ब्लॉक होने का डर दिखाकर एटीएम पिन और डिटेल ले लेता है और इसके बाद आनलाइन शॉपिंग या ट्रांसफर के जरिए उपभोक्ता का खाता खाली कर दिया जाता है। ऑनलाइन फ्रॉड का यही सबसे प्रचलित तरीका है।
2. डुप्लीकेट सिम अप्लाई कर ओटीपी हासिल करना : ऑनलाइन फ्रॉड का ये तरीका सबसे आसान है। दरअसल इस तरह के फ्रॉड में ठग किसी तरह से आपका आईडी-प्रूफ हथियाता है और उस आई-डी प्रूफ के जरिए नंबर का नया सिम कार्ड अप्लाई कर देता है। इससे उपभोक्ता का असली सिम कार्ड ब्लॉक हो जाता है और ओटीपी ठग के पास मौजूद सिम पर आ जाता है। ओटीपी मिलने के बाद खाते से कैश निकलना महज एक औपचारिकता ही बचता है। इसलिए अपना आईडी-प्रूफ को संभाल कर रखें।
3. अनसेफ वेबसाइट से शॉपिंग करना होता है खतरनाक : आजकल ऑनलाइन शॉपिंग का जमाना है। अक्सर लापरवाही के चलते उपभोक्ता किसी ऐसी शॉपिंग वेबसाइट पर जाकर शॉपिंग कर लेता है, जिसपर कार्ड या इंटरनेट बैकिंग से पेमेंट करना सुरक्षित नहीं होता। ऐसी वेबसाइट अक्सर ऑनलाइन सुरक्षा के लिहाज से सुरक्षित पेमेंट सिस्टम नहीं अपनाती, जिसके चलते आपके एटीएम या क्रेडिट कार्ड के नंबर और पिन उस शॉपिंग वेबसाइट पर सेव रह जाते हैं। ऑनलाइन ठग अक्सर हैकिंग के जरिए भी आपका एटीएम नंबर हासिल कर सकते हैं।
4. एटीएम में मददगार बन बदलते हैं एटीएम : ये समस्या ज्यादातर बुजुर्ग या ग्रामीण उपभोक्ताओं को आती है। एटीएम का इस्तेमाल करने में उनकी जानकारी थोड़ी कम होती है तो उन्हें एटीएम पर परेशानी आती है। ऐसी स्थिति में अक्सर ठग किस्म के लोग एटीएम के बाहर ऐसे ही तरह के शिकार की ताक में होते हैं और शिकार दिखने पर उसकी मदद करने के नाम पर चुपके से एटीएम बदल लेते हैं।
इस तरह उपभोक्ता कर सकते हैं बचाव
1. कोई भी बैंक आपको फोन कर आपसे आपके बैंक खाते का नंबर और एटीएम का पिन कभी नहीं पूछता। ऐसे में इस प्रकार के फोन कॉल्स को ऐसी कोई भी जानकारी सांझा करने से साफ तौर पर बचें।
2. अक्सर घर बदलने की सूरत में बैंक को अपडेट नहीं करते, जिसके चलते बैंक स्टेटमेंट और अन्य जानकारियां पुराने पते पर आते रहते हैं, वहां से भी आवश्यक जानकारियां लीक हो सकती हैं। बैंक को तुरंत जगह बदलने की अपडेट दें।
3. एटीएम या कार्ड से पेमेंट करते समय सीवीवी (आपके एटीएम कार्ड के पिछली तरफ स्थित आखिरी तीन नंबर) डालते समय ध्यान दें, कि वेबसाइट के पेमेंट आप्शन पर अगर स्टार की जगह नंबर दिखाई दे रहे हैं तो तुरंत उस वेबसाइट को बंद कर दें। किसी अज्ञात व्यक्ति को या फोन पर किसी को भी ये नंबर ना दें।
4. स्वाइप मशीन पर पेमेंट करते समय पेमेंट की राशि का ध्यान रखें और लापरवाही में किसी के सामने पिन नंबर नहीं डालें। साथ ही स्वाइप मशीन से निकली पेमेंट स्लिप की एक कॉपी अवश्य लें, ये आपका हक है।
5. एटीएम में कैश अटक जाए तो तुरंत बैंक को कॉल करें। संभव हो तो गार्ड को तुरंत सारी घटना बताएं ।
6. एटीएम कार्ड गुम या चोरी हो जाए तो सबसे पहले बैंक के कस्टमर केयर पर फोन कर अपना कार्ड ब्लॉक करवाएं। इसके बाद नजदीकी पुलिस स्टेशन और बैंक की शाखा में लिखित रूप से सूचना दें। ताकि आपके कार्ड से कोई और पेमेंट नहीं की जा सके।
7. एटीएम के अंदर अपने किसी रिश्तेदार या विश्वासपात्र को ही एटीएम कार्ड इस्तेमाल करने को दें। अंजान व्यक्ति को किसी भी कीमत पर अपना एटीएम कार्ड या पिन ना बताएं।
नोटबंदी के बाद हो चुकी हैं तीन वारदातें
नोटबंदी 8 नवंबर को लागू की गई थी और इसके बाद से जिले में अब तक ऑनलाइन ठगी की तीन वारदातें हो चुकी हैं। इसमें एटीएम बदलकर शॉपिंग करना, फर्जी बैंककर्मी बनकर एटीएम का पिन जानना शामिल हैं। अभी दो दिन पहले इस बाबत सिटी पुलिस ने एक मामला दर्ज किया है। इस मामले में दौलतपुर निवासी देवीलाल ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि वो रतिया चुंगी स्थित एटीएम से पैसे निकालने गया तो पैसे ना निकलने पर एक युवक ने उससे एटीएम लेकर मदद की थी, लेकिन जब वो घर पहुंचा तो खाते से 21 हजार रुपये की शॉपिंग का मैसेज आ गया। इसके अलावा भी एटीएम का पिन पूछकर ऑनलाइन ठगी करने के मामले भी सामने आ चुके हैं।
सीधी बात : एएसपी गंगाराम पूनियां
प्रश्र: पुलिस और जिला प्रशासन कैशलेस व्यवस्था की बात तो कर रहे हैं, ऑनलाइन सुरक्षा के नाम जागरूकता जीरो है ।
उत्तर: ये सही है कि पुलिस तो फिर भी ऑनलाइन फ्रॉड के लिए जागरूक है, लेकिन ये सही है कि आम जनता इससे अभी वाफिक नहीं है।
प्रश्र : पुलिस प्रशासन जनता को ऑनलाइन फ्रॉड से बचाने के लिए क्या करेगा
उत्तर : मधुबन से फतेहाबाद पुलिस के कई आईओ को इस बारे में विशेष रूप से ट्रेनिंग दी गई है। ये आईओ अन्य पुलिसकर्मियों को ट्रेंड करेंगे। हम कोशिश करेंगे कि पुलिस स्टेशनों में भी लोगों के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
प्रश्र : ऑनलाइन ठगी के केसों को सुलझाने में ज्यादा सफल नहीं हो पा रही पुलिस
उत्तर : ऐसा नहीं है, पुलिस लगातार इन केसों की जांच कर रही है। कोई भी केस हाथोंहाथ नहीं सुलझता । कुछेक लीड के आधार पर केस साल्व होता है। साइबर केसों के लिए भी पुलिस गंभीरता से प्रयास कर रही है।
प्रश्र : कैशलेस व्यवस्था बढ़ने से पुलिस पर भी बोझ बढ़ेगा
उत्तर : जब बहुत अधिक संख्या में लोग ऑनलाइन पेमेंट मोड अपनाएंगे तो संभव है कि साइबर क्राइम भी बढ़े। लेकिन लोग अगर इस मामले केा लेकर जागरूक हो जाएंगे तो पुलिस पर बोझ नहीं पड़ेगा, वैसे फतेहाबाद पुलिस हर प्रकार के मामलों के लिए पूरी तरह सक्षम है।
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हैरत की बात तो ये है कि तीनों वारदातों में अभी तक पुलिस एक भी मामले को सुलझा नहीं सकी है। हालांकि पुलिस कप्तान ने लोगों से ये आह्वान जरूर किया है कि अपनी बैंक डिटेल किसी को ना दें लेकिन चोर ही इतना शातिर निकले कि फोन पर चिकनी-चुपड़ी बातें करके बुजुर्गों से बैंक डिटेल निकलवा ले तो उसका पता चलाना पुलिस के लिए भी टेढ़ी खीर ही साबित हो तरहा है।
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जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार लोगों को कैशलेस व्यवस्था अपनाने पर लगातार जागरुकता अभियान चला रहे हैं, लेकिन कैशलेस ट्रांजेक्शन को सुरक्षित कैसे रखा जा सकता है, इस बारे अभी तक कोई जागरूकता अभियान ना तो प्रदेश सरकार की ओर से और ना ही जिला प्रशासन की ओर से चलाया गया है। जमीनी धरातल की बात की जाए तो प्रशासन का अभी इस ओर ध्यान ही नहीं गया है। दो दिन पूर्व एसपी ओपी नरवाल की ओर से इस बाबत एक बयान जारी किया गया था कि लोग अपना एटीएम पिन किसी को ना दें, इसके अलावा ना तो साइबर सैल की ओर से और ना जिला प्रशासन की ओर से इस तरह की कोई तकनीकी जानकारी लोगों को उपलब्ध करवाई गई है। अगर साइबर सेल की बात की जाए तो पिछले महीनों में हुई बहुत ज्यादा वारदातों को ये सेल सुलझा नहीं सका है।
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पुलिस विभाग के सूत्रों की मानें तो बैंक कर्मी बनकर ऑनलाइन ठगी करने वाले ठग इस तरह की वारदातों में अक्सर एक विशेष सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं। इसके जरिए ये लोग किसी साधारण व्यक्ति के मोबाइल नंबर को हैक कर लेते हैं और फोन नंबर के मालिक को पता भी नहीं चलता कि उसका फोन हैक कर लिया गया है। व्यक्ति को तो तब पता चलता है जब उसके पास पुलिस या अन्य व्यक्ति का पूछताछ के लिए फोन जाता है।
ये तरीके अपना लोगों को लूट रहे हैं ऑनलाइन चोर
1. बैंककर्मी बन झूठे कॉल्स के जरिए : इस व्यवस्था में अक्सर ये सुनने में आता है कि किसी बैंक उपभोक्ता के पास फोन आता है और दूसरी ओर से बोलने वाला व्यक्ति खुद को बैंककर्मी बताकर उपभोक्ता को उसका कार्ड ब्लॉक होने का डर दिखाकर एटीएम पिन और डिटेल ले लेता है और इसके बाद आनलाइन शॉपिंग या ट्रांसफर के जरिए उपभोक्ता का खाता खाली कर दिया जाता है। ऑनलाइन फ्रॉड का यही सबसे प्रचलित तरीका है।
2. डुप्लीकेट सिम अप्लाई कर ओटीपी हासिल करना : ऑनलाइन फ्रॉड का ये तरीका सबसे आसान है। दरअसल इस तरह के फ्रॉड में ठग किसी तरह से आपका आईडी-प्रूफ हथियाता है और उस आई-डी प्रूफ के जरिए नंबर का नया सिम कार्ड अप्लाई कर देता है। इससे उपभोक्ता का असली सिम कार्ड ब्लॉक हो जाता है और ओटीपी ठग के पास मौजूद सिम पर आ जाता है। ओटीपी मिलने के बाद खाते से कैश निकलना महज एक औपचारिकता ही बचता है। इसलिए अपना आईडी-प्रूफ को संभाल कर रखें।
3. अनसेफ वेबसाइट से शॉपिंग करना होता है खतरनाक : आजकल ऑनलाइन शॉपिंग का जमाना है। अक्सर लापरवाही के चलते उपभोक्ता किसी ऐसी शॉपिंग वेबसाइट पर जाकर शॉपिंग कर लेता है, जिसपर कार्ड या इंटरनेट बैकिंग से पेमेंट करना सुरक्षित नहीं होता। ऐसी वेबसाइट अक्सर ऑनलाइन सुरक्षा के लिहाज से सुरक्षित पेमेंट सिस्टम नहीं अपनाती, जिसके चलते आपके एटीएम या क्रेडिट कार्ड के नंबर और पिन उस शॉपिंग वेबसाइट पर सेव रह जाते हैं। ऑनलाइन ठग अक्सर हैकिंग के जरिए भी आपका एटीएम नंबर हासिल कर सकते हैं।
4. एटीएम में मददगार बन बदलते हैं एटीएम : ये समस्या ज्यादातर बुजुर्ग या ग्रामीण उपभोक्ताओं को आती है। एटीएम का इस्तेमाल करने में उनकी जानकारी थोड़ी कम होती है तो उन्हें एटीएम पर परेशानी आती है। ऐसी स्थिति में अक्सर ठग किस्म के लोग एटीएम के बाहर ऐसे ही तरह के शिकार की ताक में होते हैं और शिकार दिखने पर उसकी मदद करने के नाम पर चुपके से एटीएम बदल लेते हैं।
इस तरह उपभोक्ता कर सकते हैं बचाव
1. कोई भी बैंक आपको फोन कर आपसे आपके बैंक खाते का नंबर और एटीएम का पिन कभी नहीं पूछता। ऐसे में इस प्रकार के फोन कॉल्स को ऐसी कोई भी जानकारी सांझा करने से साफ तौर पर बचें।
2. अक्सर घर बदलने की सूरत में बैंक को अपडेट नहीं करते, जिसके चलते बैंक स्टेटमेंट और अन्य जानकारियां पुराने पते पर आते रहते हैं, वहां से भी आवश्यक जानकारियां लीक हो सकती हैं। बैंक को तुरंत जगह बदलने की अपडेट दें।
3. एटीएम या कार्ड से पेमेंट करते समय सीवीवी (आपके एटीएम कार्ड के पिछली तरफ स्थित आखिरी तीन नंबर) डालते समय ध्यान दें, कि वेबसाइट के पेमेंट आप्शन पर अगर स्टार की जगह नंबर दिखाई दे रहे हैं तो तुरंत उस वेबसाइट को बंद कर दें। किसी अज्ञात व्यक्ति को या फोन पर किसी को भी ये नंबर ना दें।
4. स्वाइप मशीन पर पेमेंट करते समय पेमेंट की राशि का ध्यान रखें और लापरवाही में किसी के सामने पिन नंबर नहीं डालें। साथ ही स्वाइप मशीन से निकली पेमेंट स्लिप की एक कॉपी अवश्य लें, ये आपका हक है।
5. एटीएम में कैश अटक जाए तो तुरंत बैंक को कॉल करें। संभव हो तो गार्ड को तुरंत सारी घटना बताएं ।
6. एटीएम कार्ड गुम या चोरी हो जाए तो सबसे पहले बैंक के कस्टमर केयर पर फोन कर अपना कार्ड ब्लॉक करवाएं। इसके बाद नजदीकी पुलिस स्टेशन और बैंक की शाखा में लिखित रूप से सूचना दें। ताकि आपके कार्ड से कोई और पेमेंट नहीं की जा सके।
7. एटीएम के अंदर अपने किसी रिश्तेदार या विश्वासपात्र को ही एटीएम कार्ड इस्तेमाल करने को दें। अंजान व्यक्ति को किसी भी कीमत पर अपना एटीएम कार्ड या पिन ना बताएं।
नोटबंदी के बाद हो चुकी हैं तीन वारदातें
नोटबंदी 8 नवंबर को लागू की गई थी और इसके बाद से जिले में अब तक ऑनलाइन ठगी की तीन वारदातें हो चुकी हैं। इसमें एटीएम बदलकर शॉपिंग करना, फर्जी बैंककर्मी बनकर एटीएम का पिन जानना शामिल हैं। अभी दो दिन पहले इस बाबत सिटी पुलिस ने एक मामला दर्ज किया है। इस मामले में दौलतपुर निवासी देवीलाल ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि वो रतिया चुंगी स्थित एटीएम से पैसे निकालने गया तो पैसे ना निकलने पर एक युवक ने उससे एटीएम लेकर मदद की थी, लेकिन जब वो घर पहुंचा तो खाते से 21 हजार रुपये की शॉपिंग का मैसेज आ गया। इसके अलावा भी एटीएम का पिन पूछकर ऑनलाइन ठगी करने के मामले भी सामने आ चुके हैं।
सीधी बात : एएसपी गंगाराम पूनियां
प्रश्र: पुलिस और जिला प्रशासन कैशलेस व्यवस्था की बात तो कर रहे हैं, ऑनलाइन सुरक्षा के नाम जागरूकता जीरो है ।
उत्तर: ये सही है कि पुलिस तो फिर भी ऑनलाइन फ्रॉड के लिए जागरूक है, लेकिन ये सही है कि आम जनता इससे अभी वाफिक नहीं है।
प्रश्र : पुलिस प्रशासन जनता को ऑनलाइन फ्रॉड से बचाने के लिए क्या करेगा
उत्तर : मधुबन से फतेहाबाद पुलिस के कई आईओ को इस बारे में विशेष रूप से ट्रेनिंग दी गई है। ये आईओ अन्य पुलिसकर्मियों को ट्रेंड करेंगे। हम कोशिश करेंगे कि पुलिस स्टेशनों में भी लोगों के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
प्रश्र : ऑनलाइन ठगी के केसों को सुलझाने में ज्यादा सफल नहीं हो पा रही पुलिस
उत्तर : ऐसा नहीं है, पुलिस लगातार इन केसों की जांच कर रही है। कोई भी केस हाथोंहाथ नहीं सुलझता । कुछेक लीड के आधार पर केस साल्व होता है। साइबर केसों के लिए भी पुलिस गंभीरता से प्रयास कर रही है।
प्रश्र : कैशलेस व्यवस्था बढ़ने से पुलिस पर भी बोझ बढ़ेगा
उत्तर : जब बहुत अधिक संख्या में लोग ऑनलाइन पेमेंट मोड अपनाएंगे तो संभव है कि साइबर क्राइम भी बढ़े। लेकिन लोग अगर इस मामले केा लेकर जागरूक हो जाएंगे तो पुलिस पर बोझ नहीं पड़ेगा, वैसे फतेहाबाद पुलिस हर प्रकार के मामलों के लिए पूरी तरह सक्षम है।