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Fatehabad News: पराली प्रबंधन के लिए किसानों को किया जागरूक
Wed, 08 Oct 2025 11:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Wed, 08 Oct 2025 11:04 PM IST
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नहला गांव के बस स्टैंड पर किसानों को पराली प्रबंधन के लिए जागरुक करते कृषि वैज्ञानिक दीपक कुमा
भूना। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड(एचएसपीसीबी) की टीम ने बुधवार को गांव गोरखपुर, नहला और दहमान में किसानों को पराली प्रबंधन के प्रति जागरूक किया। टीम का नेतृत्व वैज्ञानिक दीपक कुमार ने किया। इस दौरान किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई और सरकार की ओर से पराली न जलाने के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि पराली जलाने से न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान होता है, बल्कि इससे खेतों की उर्वरक क्षमता भी कम हो जाती है। पराली जलने से निकलने वाला धुआं हवा को प्रदूषित करता है, जिससे सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और अस्थमा के मरीजों पर इसका सीधा असर पड़ता है।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को पराली प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों के बारे में भी बताया गया, जैसे मल्चर, हैपी सीडर, सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम आदि का उपयोग। टीम ने किसानों को यह भी जानकारी दी कि सरकार की ओर से इन मशीनों पर अनुदान दिया जा रहा है। इससे वे आसानी से इनका लाभ उठा सकते हैं।
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वैज्ञानिक दीपक कुमार ने कहा कि खेतों में पराली जलाने के बजाय यदि उसे सड़ाने या मशीनों से खेत में ही प्रबंधित किया जाए तो मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है और अगली फसल की पैदावार भी बेहतर होती है। गांवों के सरपंचों और ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत किया और भविष्य में पराली न जलाने का संकल्प लिया।
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अधिकारियों ने बताया कि पराली जलाने से न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान होता है, बल्कि इससे खेतों की उर्वरक क्षमता भी कम हो जाती है। पराली जलने से निकलने वाला धुआं हवा को प्रदूषित करता है, जिससे सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और अस्थमा के मरीजों पर इसका सीधा असर पड़ता है।
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कार्यक्रम के दौरान किसानों को पराली प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों के बारे में भी बताया गया, जैसे मल्चर, हैपी सीडर, सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम आदि का उपयोग। टीम ने किसानों को यह भी जानकारी दी कि सरकार की ओर से इन मशीनों पर अनुदान दिया जा रहा है। इससे वे आसानी से इनका लाभ उठा सकते हैं।
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वैज्ञानिक दीपक कुमार ने कहा कि खेतों में पराली जलाने के बजाय यदि उसे सड़ाने या मशीनों से खेत में ही प्रबंधित किया जाए तो मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है और अगली फसल की पैदावार भी बेहतर होती है। गांवों के सरपंचों और ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत किया और भविष्य में पराली न जलाने का संकल्प लिया।