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Haryana: छह हजार साल पहले भी लोग कचरा प्रबंधन के प्रति थे सजग, अहम साक्ष्य मिले

Wed, 10 Jan 2024 12:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो अशोक दधीच, संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद (हरियाणा)
अशोक दधीच, संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद (हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 10 Jan 2024 12:24 AM IST
सार

गांव कुनाल में खोदाई के दौरान गंदगी व अन्य अवशेष फेंकने के लिए बनाए गए अलग से गड्ढे मिले हैं। घरों के आसपास सफाई रखते थे। एक स्थान पर आवास, दूसरे पर काम करने व तीसरे स्थान पर गड्ढे बनाकर डाला कचरा जाता था।

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Even six thousand years ago, people were conscious about waste management.
फतेहाबाद के गांव कुनाल में खोदाई करते राष्ट्रीय संग्रहालय दिल्ली के विद्यार्थी।

विस्तार

फतेहाबाद के गांव कुनाल में खोदाई के दौरान पुरातत्वविदों को कचरा प्रबंधन के अहम साक्ष्य मिले हैं। यहां कुछ ऐसे गड्ढे मिले हैं, जहां पर उस समय हड़प्पा कालीन सभ्यता के लोग साफ-सफाई के बाद कचरा फेंका करते थे।

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आवासीय क्षेत्र से हटकर मिले गड्ढ़ों के बारे में पुरातत्ववेताओं का मानना है कि छह हजार साल पहले विकसित हुई हड़प्पा सभ्यता के लोग सफाई को लेकर वे काफी सजग थे और गंदगी व कूड़े को फेंकने के लिए अलग से गड्ढे बनाए हुए थे। पुरातत्वविदों के अनुसार, 6 हजार साल पहले की इस सभ्यता के लोग भी स्वच्छता के प्रति काफी जागरूक थे।
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फतेहाबाद के गांव कुनाल में प्री-हड़प्पा व हड़प्पा काल के अनेक अवशेष मिल चुके हैं। कुनाल में हड़प्पा सभ्यता के जो अवशेष मिले हैं, वह उस समय की बेहतर कारीगरी का प्रतीक है। कुनाल में जो बस्ती बसाई गई थी, वहां पर एक ओर बस्ती में गड्ढा खोदकर उसे घर का रूप देकर लोग रहते थे।
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पुरातत्वविदों के अनुसार, यहां पर जो सभ्यता थी, वह भिरडाना से मिली सभ्यता से जुड़ी थी। गांव भिरडाना में 8 हजार पुराने अवशेष मिले हैं, जो हाकड़ा सभ्यता के हैं। भिरडाना व कुनाल की सभ्यता का आपस में सामंजस्य रहा है। कुनाल में 5 दिसंबर से खोदाई का कार्य दोबारा से शुरू किया गया है। यहां पर वर्ष 1986 में पहली बार खोदाई का कार्य शुरू किया गया था और अब आठवीं बार यहां पर खोदाई का कार्य चल रहा है। संवाद

खोदाई में मिले अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित गड्ढे
कुनाल के साइट इंचार्ज ने रविकांत ने बताया कि इस बार की खोदाई में नई बात सामने आई है कि यहां के लोग उस समय भी स्वच्छता की ओर ध्यान देते थे। यहां पर बस्ती अलग होती थी और लोग गड्ढे बनाकर घरों में रहते थे। वह फर्श बनाकर रहते थे, अगर फर्श टूट जाता था तो उस पर नई परत बिछाई जाती थी। ऐसे प्रमाण अब तक 3 मीटर की खोदाई में मिले हैं। यह लोग खेती के साथ-साथ व्यापार का काम भी करते थे। इन्होंने बस्ती के बाहर बड़ी-बड़ी भट्ठियां लगा रखी थी, जहां पर मनके व मिट्टी के बर्तनों को बनाया जाता था। इस खोदाई में अब यह सामने आया है कि यह लोग अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति काफी सचेत थे। बस्ती से दूर इन लोगों द्वारा बनाए गए गड्ढे मिले हैं, जहां पर यह गंदगी व अन्य कचरा डालते थे। आज के समय में जिस प्रकार हम कूड़ा-कर्कट फेंकने के लिए कूड़ेदान का प्रयोग करते हैं, उस समय लोग गड्ढों के रूप में कूड़ेदान बनाते थे। ऐसे प्रमाण यहां पर हाल ही में मिले हैं।


कुनाल में इस बार खोदाई में इस बात का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि यहां के लोगों का रहन-सहन कैसा था। भिरडाना सभ्यता से इनका कोई ताल्लुकात था या नहीं, यह सब जानने का प्रयास किया जा रहा है। इस साइट पर इस बार 20 मीटर तक की खोदाई करके इतिहास के अन्य पन्नों को खंगाला जाएगा। -ललित आदित्य, असिस्टेंट प्रोफेसर, राष्ट्रीय संग्रहालय दिल्ली।

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