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दिवाली पर जमकर हुई आतिशबाजी, रात आठ से साढ़े 11 बजे खतरनाक स्तर पर पहुंचा प्रदूषण का स्तर

Mon, 28 Oct 2019 11:03 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 28 Oct 2019 11:03 PM IST
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फतेहाबाद शहर की एक कालोनी में जलाई जा रही आतिशबाजी। - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। प्रशासन की तमाम पाबंदियों के बाद भी दिवाली की रात फतेहाबाद शहर सहित आसपास के इलाकों में जमकर आतिशबाजी हुई। इससे प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। राहत की बात ये है कि दिवाली से एक रात पहले एवं एक दिन बाद प्रदूषण का स्तर कम होने से आम आदमी को राहत मिलती दिख रही है, अन्यथा दिवाली की रात को प्रदूषण का स्तर फतेहाबाद में 412 तक जा पहुंचा था जो सामान्य से लगभग तीन गुणा ज्यादा खराब हवा की ओर संकेत कर रहा था।
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दिवाली की रात को लगभग साढ़े आठ बजे के आसपास ही पटाखे बजने शुरू हुए जो देर रात साढ़े 11-12 बजे तक चलते रहे। कमोबेश यही वो समय था, जब शहर में प्रदूषण का स्तर भी लगातार बिगड़ना शुरू हुआ। अब पटाखों के धुएं का प्रदूषण पर सीधा असर का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि जैसे ही रात साढ़े 8 बजे लोगों के पटाखे बजाने का सिलसिला शुरू हुआ, प्रदूषण का स्तर एक्यूआई एकाएक 376 पर जा पहुंचा जो महज दो घंटे पहले साढ़े छह बजे महज 138 था। इतना ही नहीं, जैसे जैसे पटाखों का शोर और धुंआ बढ़ता गया, एक्यूआई का आंकड़ा भी बढ़ते रात साढ़े 11 बजे 412 तक जा पहुंचा। जो दीवाली की रात का सर्वाधिक था। हालांकि रात साढ़े 11-12 बजे के बाद प्रदूषण के स्तर पर में उल्लेखनीय कमी आनी शुरू हुई और सोमवार सुबह साढ़े 5 बजे तक ये स्तर 153 पर आ गया। हालांकि प्रदूषण के लिहाज से ये स्तर भी कोई अच्छा नहीं माना जा सकता, लेकिन 412 के मुकाबले ये हालात फिर भी बेहतर हैं।
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पराली के मामले में पिछले साल प्रदेश में नंबर दो पर था फतेहाबाद, अब फिर खतरा मंडराया
अक्तूबर-नवंबर का माह आते ही आसमान में प्रदूषण का स्तर एकाएक बढ़ जाता है और इसके पीछे पंजाब-हरियाणा में किसानों द्वारा धान की पराली जलाने को एक बड़ा कारण माना जाता है। हरियाणा में पिछले साल पराली जलाने के मामले में करनाल और फतेहाबाद अव्वल रहे थे। हरसैक द्वारा सैटेलाइट द्वारा पकड़े गए मामलों में अधिकतर मामले फतेहाबाद जिले से संबंधित थे। ऐसे में इस बार भी पराली जलाने की घटनाओं में अगर कमी नहीं आई तो इस बार भी प्रदूषण का स्तर नवंबर माह में खतरनाक स्तर पर पहुंच सकता है। हालांकि अभी तक प्रशासन ने इस दिशा में किसानों को जागरूक करने के लिए कई प्रयास किए हैं, लेकिन अगले दो-चार दिन में स्थिति साफ हो सकती है।
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