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आशियाने ढहाने से गहरे सदमे में लोग
fatehabad
Updated Sat, 23 Jul 2016 12:40 AM IST
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खुले में बैठे लोग
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नगरपालिका प्रशासन के भूना में जोहड़ की जमीन पर कब्जा हटाने को लेकर 16 घरों पर की गई कार्रवाई के बाद उपरोक्त लोग गहरे सदमे में हैं। भले ही प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई टल गई हो, मगर कोई भी गाड़ी गली से गुजरती है, तो पीड़ित लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। वे ताकते रहते हैं कि कहीं कुछ बचा हुआ मकान का हिस्सा भी कोई तोड़ न दें। कई परिवार कब्जा कार्रवाई हटाने के बाद खुले आसमान में पेड़ों के नीचे बैठे हैं। घरों का समान शुक्रवार को भी ज्यों का त्यों बिखरा था। महिलाएं और बच्चे अब भी डरे में हुए हैं। बात करने से पहले ही टूटे आशियाने की तरफ देखकर उनकी आंखों से आंसू निकलने शुरू हो जाते हैं।
पेड़ और सूखा चारा भी कर दिया नष्ट
कब्जा कार्रवाई के दौरान नगरपालिका प्रशासन ने जेबीसी की मदद से घरों में खड़े पेड़ भी उखाड़ दिए तथा सूखा चारा मिट्टी के मलवे के नीचे दाब दिया। इससे पशुओं के लिए खरीदी गई हजारों रुपये की तूड़ी नष्ट कर दी। विधवा बलविंद्र कौर ने रोते हुए बताया कि उसने पशुओं के पालन-पोषण करके घर का गुजारा चला रही है। घर में दो मंदबुद्धि जवान बेटियां है। पति का देहांत होने के बाद से वह पशुओं पर ही उसके घर का गुजारा निर्भर था। विधवा ने गेहूं कटाई के दौरान 15 हजार रुपये की तूड़ी खरीदी थी।
जो अब पशुओं के खाने लायक नहीं है। पीड़ित सुखदेव सिंह के घर में तोड़फोड़ के दौरान हरे पेड़ भी जेसीबी मशीन से नष्ट कर दिए गए। अब एरिया में जैसे ही कोई भी गाड़ी की आवाज गली में होती है, तो सभी लोग एक दम चौंकन्ने हो जाते हैं।
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गरीबों पर ही मार क्यों :-
पीड़ित सुखदेव सिंह, चंपा देवी, आशा आहूजा, बिमला देवी, सत्यवान, देवा सिंह आदि ने बताया कि कब्जा कार्रवाई की मार गरीबों पर ही क्यों पड़ती है। उन्होंने बताया कि 1994 में उन्होंने कस्तूरी नामक महिला से 30 हजार रुपये में बना हुआ मकान खरीदा था। लेकिन यह मकान करीब 50 साल पहले से बना हुआ था। अब दबंग लोगों के दबाव में नगरपालिका प्रशासक ने गरीबों के आशियाने उजाड़े हैं। जबकि भूना में उक्त जगह पर करीब 300 से अधिक परिवार अवैध कब्जे की जगह पर बैठे हैं।
उन्होंने बताया कि हिसार रोड पर, मेन बाजार, वार्ड नंबर सात के जोहड़ पर प्रभावशाली व्यक्तियों ने करोड़ों रुपये की कोठियां एवं शोरूम बना रखे हैं। उन पर जेबीसी क्यों नहीं चलाई गई। क्योंकि उनकी पहुंच सत्ता के गलियारों तक है।
पेड़ और सूखा चारा भी कर दिया नष्ट
कब्जा कार्रवाई के दौरान नगरपालिका प्रशासन ने जेबीसी की मदद से घरों में खड़े पेड़ भी उखाड़ दिए तथा सूखा चारा मिट्टी के मलवे के नीचे दाब दिया। इससे पशुओं के लिए खरीदी गई हजारों रुपये की तूड़ी नष्ट कर दी। विधवा बलविंद्र कौर ने रोते हुए बताया कि उसने पशुओं के पालन-पोषण करके घर का गुजारा चला रही है। घर में दो मंदबुद्धि जवान बेटियां है। पति का देहांत होने के बाद से वह पशुओं पर ही उसके घर का गुजारा निर्भर था। विधवा ने गेहूं कटाई के दौरान 15 हजार रुपये की तूड़ी खरीदी थी।
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जो अब पशुओं के खाने लायक नहीं है। पीड़ित सुखदेव सिंह के घर में तोड़फोड़ के दौरान हरे पेड़ भी जेसीबी मशीन से नष्ट कर दिए गए। अब एरिया में जैसे ही कोई भी गाड़ी की आवाज गली में होती है, तो सभी लोग एक दम चौंकन्ने हो जाते हैं।
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गरीबों पर ही मार क्यों :-
पीड़ित सुखदेव सिंह, चंपा देवी, आशा आहूजा, बिमला देवी, सत्यवान, देवा सिंह आदि ने बताया कि कब्जा कार्रवाई की मार गरीबों पर ही क्यों पड़ती है। उन्होंने बताया कि 1994 में उन्होंने कस्तूरी नामक महिला से 30 हजार रुपये में बना हुआ मकान खरीदा था। लेकिन यह मकान करीब 50 साल पहले से बना हुआ था। अब दबंग लोगों के दबाव में नगरपालिका प्रशासक ने गरीबों के आशियाने उजाड़े हैं। जबकि भूना में उक्त जगह पर करीब 300 से अधिक परिवार अवैध कब्जे की जगह पर बैठे हैं।
उन्होंने बताया कि हिसार रोड पर, मेन बाजार, वार्ड नंबर सात के जोहड़ पर प्रभावशाली व्यक्तियों ने करोड़ों रुपये की कोठियां एवं शोरूम बना रखे हैं। उन पर जेबीसी क्यों नहीं चलाई गई। क्योंकि उनकी पहुंच सत्ता के गलियारों तक है।