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Fatehabad News: जर्जर पुल और गायब चेतावनी बोर्ड कोहरे में सफर को बना रहे खतरनाक
Thu, 08 Jan 2026 11:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Thu, 08 Jan 2026 11:06 PM IST
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बिंजा लांबा ढाणी से महल्ड की ओर जाने वाली नहर जिस पर नहीं है सुरक्षा दीवार। स्रोत:ग्रामीण
फतेहाबाद। जिले में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से गुजरने वाली नहरों के पुलों पर सुरक्षा दीवारों की स्थिति बेहद खतरनाक बन गई है। अधिकांश पुलों पर दीवारें टूटी हुई हैं या गायब हो चुकी हैं। इससे इन स्थानों पर गुजरने वाले लोगों की जान जोखिम में रहती है। खासकर सर्दियों में कोहरे और धुंध के कारण यह समस्या और भी गंभीर हो गई है।
जिले के विभिन्न हिस्सों में नहरों के पुलों पर सुरक्षा दीवारों की हालत जर्जर हो चुकी है। कई स्थानों पर तो यह दीवारें पूरी तरह टूट चुकी हैं, इससे सड़क हादसों की आशंका बनी रहती है। एक साल पहले जाखल के पास नहर में क्रूजर गाड़ी गिरने से 12 लोगों की जान चली गई थी। यह पिछले जिले के इतिहास में दर्दनाक दुर्घटना थी। इस हादसे के बाद प्रशासन ने नहरों पर सुरक्षा दीवारों का निर्माण कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक ये जमीन पर नहीं उतरे हैं।
बिंजा लाम्बा ढाणी से मल्हड़ की ओर जाने वाली नहर के पास बाबा पीर भुरू वाला टिब्बा के समीप स्थित तिराहा सड़क पर सुरक्षा दीवारों का निर्माण नहीं किया गया है। यहां से रोजाना सैकड़ों वाहन गुजरते हैं, और कोहरे के कारण यह मार्ग अधिक खतरनाक बन गया है। स्थानीय निवासी हंसराज कम्बोज, महेंद्र पाल और कश्मीर ने चिंता जताते हुए कहा कि प्रशासन को जल्द से जल्द पुलों पर सुरक्षा दीवारों का निर्माण कराना चाहिए ताकि कोई बड़ा हादसा न हो।
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लोगों का कहना है कि नहरों के पुलों पर सुरक्षा दीवारों के टूटने के साथ-साथ रिफ्लेक्टर और चेतावनी बोर्ड भी नहीं लगाए गए हैं। इससे बाहरी वाहन चालकों कोहरे में रास्ता पहचानने में कठिनाई होती है और हादसे की आशंका बढ़ जाती है। लोगों ने कहा कि वे कई बार सिंचाई विभाग और अन्य अधिकारियों से इस समस्या के बारे में संपर्क कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
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इन रास्तों पर की गई पड़ताल
जिले की जीवन रेखा मानी जाने वाली सिरसा मेजर नहर, ढाणी बिंजा लांबा, रंगोई नाला और हिजरावां खुर्द से गुजरने वाली नहरों के पुलों की स्थिति जर्जर है। इन मार्गों पर रोजाना हजारों की संख्या में वाहन चालक गुजरते हैं। कई जगहों पर सुरक्षा दीवारें न होने के कारण पुल के किनारे सीधे नहर की गहराई से मिलते हैं। रात के समय या धुंध के दौरान वाहन चालकों को सड़क और नहर के किनारे का अंतर समझ नहीं आता, जिससे वाहनों के इन नहरों में गिरने की आशंका बनी रहती है।
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ये है विभिन्न ग्रामीण रूटों पर नहरों के पुल या सुरक्षा दीवारों की स्थिति
हिजरावां और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों का कहना है कि पुलों की मरम्मत का काम लंबे समय से नहीं हुआ है। किसी भी भारी वाहन के टकराने पर सुरक्षा देने में सक्षम नहीं है। ग्रामीण हिजरावां खुर्द निवासी दलीप ने बताया कि कोहरे में 10 फीट की दूरी पर भी कुछ दिखाई नहीं देता। ऐसे में अगर पुल की दीवार टूटी हो, तो जरा सी चूक परिवार को भारी पड़ सकती है। विभाग को हादसों का इंतजार करने के बजाय तुरंत मरम्मत करवानी चाहिए। वहीं गांव हरिपुरा के निवासी प्रदीप कुमार ने बताया कि यदि समय रहते इन दीवारों का निर्माण नहीं कराया गया और रिफ्लेक्टर नहीं लगाए गए, तो धुंध के इस मौसम में कोई भी अनहोनी हो सकती है। उनकी प्रशासन से मांग की है इन्हें तुरंत ठीक किया जाए।
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नहरों पर बने पुल की चहारदीवारी ओवरलोड वाहनों के कारण टूट जाते है। सिंचाई विभाग की टीम सर्वे करके जानकारी जुटाती रहती है और जहां भी टूटी मिलती है उसे बनवाया जाता है। अगर कहीं दिक्कत है तो बनवा दी जाएगी।
-एनके भोला, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग
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जिले के विभिन्न हिस्सों में नहरों के पुलों पर सुरक्षा दीवारों की हालत जर्जर हो चुकी है। कई स्थानों पर तो यह दीवारें पूरी तरह टूट चुकी हैं, इससे सड़क हादसों की आशंका बनी रहती है। एक साल पहले जाखल के पास नहर में क्रूजर गाड़ी गिरने से 12 लोगों की जान चली गई थी। यह पिछले जिले के इतिहास में दर्दनाक दुर्घटना थी। इस हादसे के बाद प्रशासन ने नहरों पर सुरक्षा दीवारों का निर्माण कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक ये जमीन पर नहीं उतरे हैं।
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बिंजा लाम्बा ढाणी से मल्हड़ की ओर जाने वाली नहर के पास बाबा पीर भुरू वाला टिब्बा के समीप स्थित तिराहा सड़क पर सुरक्षा दीवारों का निर्माण नहीं किया गया है। यहां से रोजाना सैकड़ों वाहन गुजरते हैं, और कोहरे के कारण यह मार्ग अधिक खतरनाक बन गया है। स्थानीय निवासी हंसराज कम्बोज, महेंद्र पाल और कश्मीर ने चिंता जताते हुए कहा कि प्रशासन को जल्द से जल्द पुलों पर सुरक्षा दीवारों का निर्माण कराना चाहिए ताकि कोई बड़ा हादसा न हो।
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लोगों का कहना है कि नहरों के पुलों पर सुरक्षा दीवारों के टूटने के साथ-साथ रिफ्लेक्टर और चेतावनी बोर्ड भी नहीं लगाए गए हैं। इससे बाहरी वाहन चालकों कोहरे में रास्ता पहचानने में कठिनाई होती है और हादसे की आशंका बढ़ जाती है। लोगों ने कहा कि वे कई बार सिंचाई विभाग और अन्य अधिकारियों से इस समस्या के बारे में संपर्क कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
इन रास्तों पर की गई पड़ताल
जिले की जीवन रेखा मानी जाने वाली सिरसा मेजर नहर, ढाणी बिंजा लांबा, रंगोई नाला और हिजरावां खुर्द से गुजरने वाली नहरों के पुलों की स्थिति जर्जर है। इन मार्गों पर रोजाना हजारों की संख्या में वाहन चालक गुजरते हैं। कई जगहों पर सुरक्षा दीवारें न होने के कारण पुल के किनारे सीधे नहर की गहराई से मिलते हैं। रात के समय या धुंध के दौरान वाहन चालकों को सड़क और नहर के किनारे का अंतर समझ नहीं आता, जिससे वाहनों के इन नहरों में गिरने की आशंका बनी रहती है।
ये है विभिन्न ग्रामीण रूटों पर नहरों के पुल या सुरक्षा दीवारों की स्थिति
हिजरावां और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों का कहना है कि पुलों की मरम्मत का काम लंबे समय से नहीं हुआ है। किसी भी भारी वाहन के टकराने पर सुरक्षा देने में सक्षम नहीं है। ग्रामीण हिजरावां खुर्द निवासी दलीप ने बताया कि कोहरे में 10 फीट की दूरी पर भी कुछ दिखाई नहीं देता। ऐसे में अगर पुल की दीवार टूटी हो, तो जरा सी चूक परिवार को भारी पड़ सकती है। विभाग को हादसों का इंतजार करने के बजाय तुरंत मरम्मत करवानी चाहिए। वहीं गांव हरिपुरा के निवासी प्रदीप कुमार ने बताया कि यदि समय रहते इन दीवारों का निर्माण नहीं कराया गया और रिफ्लेक्टर नहीं लगाए गए, तो धुंध के इस मौसम में कोई भी अनहोनी हो सकती है। उनकी प्रशासन से मांग की है इन्हें तुरंत ठीक किया जाए।
नहरों पर बने पुल की चहारदीवारी ओवरलोड वाहनों के कारण टूट जाते है। सिंचाई विभाग की टीम सर्वे करके जानकारी जुटाती रहती है और जहां भी टूटी मिलती है उसे बनवाया जाता है। अगर कहीं दिक्कत है तो बनवा दी जाएगी।
-एनके भोला, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग