शहर में सेक्टर विकसित होने की आस में बर्बाद हो गए करोड़ों रुपये

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 01 Aug 2021 10:39 PM IST
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शहर में नए सेक्टर विकसित करने के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने करोड़ों रुपये खर्च कर दिए। मगर पांच साल के इंतजार के बावजूद सेक्टर विकसित हो नहीं पाए। करोड़ों की लागत से तैयार सड़कें, सीवरेज व बिजली लाइन बेकार हो चुकी हैं, जबकि लाभ किसी को नहीं हुआ। फतेहाबाद में सेक्टर 9,10,11 व 11ए के लिए हुडा ने वर्ष 2006 में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की थी। कुल 225 किसानों से 750 एकड़ जमीन लगभग 45 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन अधिग्रहित की गई। जमीन का एक हिस्सा भीमा बस्ती, मताना व दूसरा हिस्सा फतेहाबाद के किसानों की जमीन का रहा था।
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बता दें कि सबसे पहले मताना की जमीन का अधिग्रहण हुआ। इसके बाद भीमा बस्ती व फतेहाबाद की जमीन ली गई। जमीन के मुआवजे को लेकर कुछ साल केस भी चला। लगभग 2014 के बाद केसों का निपटारा हो गया। वर्ष 2014 में एचएसवीपी ने अधिग्रहित जमीन में सेक्टरों का नक्शा तैयार कर सड़कें बिछा दीं। सीवरेज लाइन बिछाकर चैंबर आदि बना दिए। बिजली निगम ने पोल लगाकर तारें भी बिछा दीं। यानी मूलभूत ढांचा खड़ा कर दिया गया, लेकिन सेक्टर आज तक विकसित नहीं हो पाए। दूर तक खाली सेक्टर नजर आते हैं। संवाद

मंदी में सरेंडर कर दिए प्लॉट
दरअसल, वर्ष 2009 से 2013 तक प्रॉपर्टी में तेजी थी। उन दिनों सेक्टरों में प्लॉट लेने की होड़ लगी थी। हर कोई यही सोच रहा था कि अब प्लॉट लेकर बाद में महंगे दाम पर बेच देंगे। मगर वर्ष 2014 के बाद प्रॉपर्टी में मंदी आ गई। इसके चलते प्लॉट आधी कीमत पर भी बिकने मुश्किल हो गए। हालात ऐसे रहे कि प्लॉट धारकों ने अलॉट हो चुके प्लॉट भी सरेंडर कर दिए।
नियम में बदलाव ने ला दी मंदी
वर्ष 2014 से पहले नियम था कि एचएसवीपी प्लॉट की कीमत तय करेगा। कीमत के भुगतान के बाद वह प्लॉट मालिक का हो जाएगा। बाद में नियम में संशोधन किया गया कि यदि किसानों की याचिका पर कोर्ट ज्यादा कीमत देने के आदेश देती है तो वह रकम प्लॉट धारक से वसूली जाएगी। प्लॉट धारकों को यह जोखिम उठाना ठीक नहीं लगा।
इंतजार में बह गए करोड़ों रुपये
एचएसवीपी को तेजी के दौर में लग रहा था कि यहां पर सेक्टर जल्द विकसित हो जाएंगे। इसलिए सड़कें, बिजली लाइन व सीवरेज लाइन बिछाने में जरा भी देर नहीं की। मगर आज तक इन सेक्टरों में एक भी मकान नहीं बना। अब सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। बिजली तारें चोरी हो चुके हैं। बिजली के पोल टूट चुके हैं और बारिश के पानी से सीवरेज लाइन को भी क्षति पहुंची है। दूर तक खाली जमीन नजर आती है।
कोट
सेक्टरों में मूलभूत व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च किए थे। लोगों ने प्लॉट खरीदने में रुचि नहीं दिखाई। ज्यादातर धारकों ने प्लॉट सरेंडर कर दिए थे। यहां पर अस्पताल बनाया जा रहा है। इससे सेक्टरों में रिहायश होने की संभावना है। इसके बाद ही प्राधिकरण की तरफ से तमाम व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएंगी।
- पवन कुमार वर्मा, एक्सईएन, एचएसवीपी।

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