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Fatehabad News: कपास पर संकट, धान की फसल ने किसानों की उम्मीदों को दिया सहारा
Thu, 18 Jun 2026 10:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Thu, 18 Jun 2026 10:36 PM IST
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फतेहाबाद क्षेत्र में धान की रोपाई करते मजदूर। स्रोत किसान
फतेहाबाद। जिले में कपास की फसल लगातार नुकसान झेल रही है। अधिक बारिश और बीमारियों के प्रकोप से पैदावार घटने के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी कारण अब किसानों का रुझान कपास छोड़कर धान की खेती की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
धान की ओर बढ़ते रुझान के चलते इन दिनों जिले में धान रोपाई का कार्य जोर पकड़ चुका है। हालांकि मजदूरों की कमी के कारण किसानों को रोपाई कार्य में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार पांच वर्ष पहले जिले में कपास का रकबा लगभग 1.50 लाख हेक्टेयर था, जो घटकर अब करीब 90 हजार हेक्टेयर रह गया है।
इसके विपरीत धान का रकबा वर्ष 2018 में 1,23,600 हेक्टेयर था, जो बढ़कर लगभग दो लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। नरमे की फसल का क्षेत्रफल भी पिछले पांच वर्षों में करीब 60 हजार एकड़ कम हुआ है। पिछले वर्ष जिले में 64 हजार हेक्टेयर में नरमे की बुवाई हुई थी लेकिन उत्पादन केवल तीन से चार क्विंटल प्रति एकड़ तक सीमित रहा। प्रति एकड़ करीब 20 हजार रुपये खर्च के मुकाबले किसानों को लगभग 15 हजार रुपये का ही लाभ मिल सका। ऐसे में किसानों ने धान की खेती की ओर रुझान बढ़ा दिया है।
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बारिश से बढ़ रहा है धान का रकबा
जिले में पिछले दो सालों से मानसून की बारिश के जलभराव की स्थिति बन रही है इससे नरमा की फसल खराब हो हो जाती है। ऐसे में किसानों को नरमा की फसल बर्बाद हो गई। कई गांवों में किसानों ने नरमा को उखाड़कर वहां पर धान लगाना उचित समझा। जिससे धान के रकबे में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि प्रदेश सरकार की ओर से धान की फसल के स्थान पर अन्य फसल लगाने पर 8000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। वर्ष 2005 में जिले में मात्र 60 हजार एकड़ में ही धान की खेती होती थी। जो कि अब बढ़कर 1 लाख 60 हजार हेक्टेयर हो गई है।
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भूना शुगर मिल बंद होने का भी पड़ा प्रभाव
प्रगतिशील किसान हरविंद्र सिंह का कहना है कि भूना की शुगर मिल वर्ष 2009 में बंद हुई। वर्ष 2010 तक जिले में मात्र 72 हजार हेक्टेयर में ही धान की खेती होती थी। उसके बाद प्रति वर्ष धान का रकबा बढ़ता ही गया है। किसान गन्ने की फसल के स्थान पर धान की रोपाई कर रहे हैं।
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धान रोपाई के आंकड़े
वर्ष रोपाई
2018-- -- -- 123600
2019-- -- -- 128744
2020-- -- -- 125963
2021-- -- -- 129196
2022-- -- -- 131700
2023-- -- -- 140000
2024-- -- -- 141000
2025-- -- -- 160003
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जिले में पिछले पांच साल में कपास का रकबा
साल-2021-22-- -- -- 1,50,000
साल-2022-23-- -- -- 1,09,414
साल- 2023-24-- -- -- 79,590
साल- 2024-25-- -- -- 90,630
साल- 2025-26-- -- -- 90,000
:: पिछले कई सालों से नरमा की फसल में बीमारी आ रही है। इस कारण किसानों का नरमा फसल की ओर कम रुझान रहा है। ऐसे में किसान धान की रोपाई ज्यादा कर रहे हैं।
-राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि विभाग, फतेहाबाद
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धान की ओर बढ़ते रुझान के चलते इन दिनों जिले में धान रोपाई का कार्य जोर पकड़ चुका है। हालांकि मजदूरों की कमी के कारण किसानों को रोपाई कार्य में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार पांच वर्ष पहले जिले में कपास का रकबा लगभग 1.50 लाख हेक्टेयर था, जो घटकर अब करीब 90 हजार हेक्टेयर रह गया है।
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इसके विपरीत धान का रकबा वर्ष 2018 में 1,23,600 हेक्टेयर था, जो बढ़कर लगभग दो लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। नरमे की फसल का क्षेत्रफल भी पिछले पांच वर्षों में करीब 60 हजार एकड़ कम हुआ है। पिछले वर्ष जिले में 64 हजार हेक्टेयर में नरमे की बुवाई हुई थी लेकिन उत्पादन केवल तीन से चार क्विंटल प्रति एकड़ तक सीमित रहा। प्रति एकड़ करीब 20 हजार रुपये खर्च के मुकाबले किसानों को लगभग 15 हजार रुपये का ही लाभ मिल सका। ऐसे में किसानों ने धान की खेती की ओर रुझान बढ़ा दिया है।
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बारिश से बढ़ रहा है धान का रकबा
जिले में पिछले दो सालों से मानसून की बारिश के जलभराव की स्थिति बन रही है इससे नरमा की फसल खराब हो हो जाती है। ऐसे में किसानों को नरमा की फसल बर्बाद हो गई। कई गांवों में किसानों ने नरमा को उखाड़कर वहां पर धान लगाना उचित समझा। जिससे धान के रकबे में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि प्रदेश सरकार की ओर से धान की फसल के स्थान पर अन्य फसल लगाने पर 8000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। वर्ष 2005 में जिले में मात्र 60 हजार एकड़ में ही धान की खेती होती थी। जो कि अब बढ़कर 1 लाख 60 हजार हेक्टेयर हो गई है।
भूना शुगर मिल बंद होने का भी पड़ा प्रभाव
प्रगतिशील किसान हरविंद्र सिंह का कहना है कि भूना की शुगर मिल वर्ष 2009 में बंद हुई। वर्ष 2010 तक जिले में मात्र 72 हजार हेक्टेयर में ही धान की खेती होती थी। उसके बाद प्रति वर्ष धान का रकबा बढ़ता ही गया है। किसान गन्ने की फसल के स्थान पर धान की रोपाई कर रहे हैं।
धान रोपाई के आंकड़े
वर्ष रोपाई
2018
2019
2020
2021
2022
2023
2024
2025
जिले में पिछले पांच साल में कपास का रकबा
साल-2021-22
साल-2022-23
साल- 2023-24
साल- 2024-25
साल- 2025-26
:: पिछले कई सालों से नरमा की फसल में बीमारी आ रही है। इस कारण किसानों का नरमा फसल की ओर कम रुझान रहा है। ऐसे में किसान धान की रोपाई ज्यादा कर रहे हैं।
-राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि विभाग, फतेहाबाद