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ढाणी सांचला में दस कोरोना रोगी फिर भी स्वास्थ्य केंद्र पर लटका है ताला
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कोरोना महामारी में स्वास्थ्य केंद्रों की जरुरत सबसे ज्यादा है। मगर गांवों में हालात बेहद खराब हैं। इसका उदाहरण ढाणी सांचला-भोजराज में देखा जा सकता है। गांव में दस कोरोना संक्रमित रोगी एक्टिव हैं तथा तीन संक्रमितों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद उप-स्वास्थ्य केंद्र पर ताला लटका हुआ है और अंदर आवारा कुत्ते कब्जा जमाए हुए हैं।
केंद्र में एएनएम व एमपीडब्ल्यू की ड्यूटी तो है, लेकिन उनसे सीएचसी भूना में वैक्सीनेशन करने का काम लिया जा रहा है। इसलिए गांव के लोग उप स्वास्थ्य केंद्र पर ताला लगने से नाराज हैं। उप स्वास्थ्य केंद्र का जायजा लिया गया तो हालात चौंकाने वाले थे। केंद्र के प्रांगण में आधा दर्जन से अधिक आवारा कुत्तों का जमावड़ा था। मुख्य गेट पर ताला लटका पड़ा था। ग्रामीण राजबीर सिंह, बलवीर सिंह, नरेश कुमार, दलजीत सिंह बंसीलाल सिंह आदि ने बताया कि देखरेख के अभाव और चिकित्सा विभाग की लापरवाही के चलते लाखों की लागत से बनाए गए नए भवन जर्जर हो रहे हैं। कुछ दिनों से यहां पर स्टाफ ही नहीं है।
छह हजार आबादी एक नर्स के भरोसे
गांव ढाणी सांचला- ढाणी भोजराज की अलग-अलग पंचायत हैं, मगर आपस में जुड़े हुए हैं। इन दोनों गांव में करीब छह हजार की आबादी है। लोगों के इलाज के लिए सरकार ने उप स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा दी हुई है। मगर केंद्र में लोगों के लिए उपचार नाम की कोई चीज नहीं है। बल्कि यह सिर्फ विभिन्न प्रकार के सर्वे व मृत्यु-जन्म का रिकॉर्ड दर्ज करने तक सीमित है। केंद्र पर एएनएम व एमपीडब्ल्यू की ड्यूटी लगी हुई है। अधिकतर मौकों पर केंद्र पर ताला ही लटका रहता है। स्टाफ की कमी के चलते उप स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत एएनएम तथा अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को इधर से उधर डेपुटेशन पर भेज दिया जाता है।
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उप स्वास्थ्य केंद्र ढाणी सांचला-भोजराज की एएनएम व एमपीडब्ल्यू की ड्यूटी वैक्सीनेशन को लेकर सरकारी स्कूल भूना में लगी हुई थी। इसलिए सोमवार को उप स्वास्थ्य केंद्र पर कोई स्वास्थ्य कर्मी नहीं था। परंतु पांच आशा वर्कर हैं, वे गांव में सर्वे कार्य में लगी हुई है। भविष्य में उप स्वास्थ्य केंद्र पर ड्यूटी के समय ताला नहीं मिलेगा। -विकास चहल, एसएमओ, सीएचसी भूना।
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केंद्र में एएनएम व एमपीडब्ल्यू की ड्यूटी तो है, लेकिन उनसे सीएचसी भूना में वैक्सीनेशन करने का काम लिया जा रहा है। इसलिए गांव के लोग उप स्वास्थ्य केंद्र पर ताला लगने से नाराज हैं। उप स्वास्थ्य केंद्र का जायजा लिया गया तो हालात चौंकाने वाले थे। केंद्र के प्रांगण में आधा दर्जन से अधिक आवारा कुत्तों का जमावड़ा था। मुख्य गेट पर ताला लटका पड़ा था। ग्रामीण राजबीर सिंह, बलवीर सिंह, नरेश कुमार, दलजीत सिंह बंसीलाल सिंह आदि ने बताया कि देखरेख के अभाव और चिकित्सा विभाग की लापरवाही के चलते लाखों की लागत से बनाए गए नए भवन जर्जर हो रहे हैं। कुछ दिनों से यहां पर स्टाफ ही नहीं है।
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छह हजार आबादी एक नर्स के भरोसे
गांव ढाणी सांचला- ढाणी भोजराज की अलग-अलग पंचायत हैं, मगर आपस में जुड़े हुए हैं। इन दोनों गांव में करीब छह हजार की आबादी है। लोगों के इलाज के लिए सरकार ने उप स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा दी हुई है। मगर केंद्र में लोगों के लिए उपचार नाम की कोई चीज नहीं है। बल्कि यह सिर्फ विभिन्न प्रकार के सर्वे व मृत्यु-जन्म का रिकॉर्ड दर्ज करने तक सीमित है। केंद्र पर एएनएम व एमपीडब्ल्यू की ड्यूटी लगी हुई है। अधिकतर मौकों पर केंद्र पर ताला ही लटका रहता है। स्टाफ की कमी के चलते उप स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत एएनएम तथा अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को इधर से उधर डेपुटेशन पर भेज दिया जाता है।
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उप स्वास्थ्य केंद्र ढाणी सांचला-भोजराज की एएनएम व एमपीडब्ल्यू की ड्यूटी वैक्सीनेशन को लेकर सरकारी स्कूल भूना में लगी हुई थी। इसलिए सोमवार को उप स्वास्थ्य केंद्र पर कोई स्वास्थ्य कर्मी नहीं था। परंतु पांच आशा वर्कर हैं, वे गांव में सर्वे कार्य में लगी हुई है। भविष्य में उप स्वास्थ्य केंद्र पर ड्यूटी के समय ताला नहीं मिलेगा। -विकास चहल, एसएमओ, सीएचसी भूना।