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Fatehabad News: उदय होते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ महापर्व संपन्न
Fri, 08 Nov 2024 11:12 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Fri, 08 Nov 2024 11:12 PM IST
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टोहाना। शुक्रवार को छठ महापर्व उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न हो गया। फतेहाबाद डिस्ट्रीब्यूटरी पर जैन समाधि के पास अर्घ्य देने के लिए प्रशासन ने घाट बनाया हुआ था। जहां पर पर सुबह चार बजे से ही श्रद्धालु पहुंचना शुरू हो गए थे।शहर में बिहार व पूर्वांचल से जुड़े लोगों और छठ व्रतियों ने भक्तिभाव से भगवान सूर्य व छठ मैया की उपासना की। जैसे ही सूर्य उदय हुए छठ घाट पर श्रद्धालुओं ने पानी में खड़े होकर परिवार के कल्याण के लिए मन्नत मांगी। सूर्य को अर्घ्य देने के बाद एक-दूसरे को प्रसाद देकर बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया और घर पहुंचकर 36 घंटे बाद अपना व्रत खोला।
घाट पर धार्मिक गीतों शुक्रवार सुबह भक्तिमय हो गई। घर से लेकर घाटों तक सब कुछ छठ पर्व के रंग में रंगा नजर आया। पूजा के सामान से भरी टोकरी सिर पर रखकर लोग घाटों पर पहुंचे। कुछ लोगों ने अपने घर में ही अस्थायी कुंड बनाकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया।
डॉ. परशुराम ने बताया कि छठ उत्सव नहाय खाय के साथ शुरू हुआ हुआ था। खरना के दिन, रसिया के प्रसाद के साथ उपवास तोड़ा जाता है। अरवा चावल, गुड़ और दूध से बनी पारंपरिक खीर, जो सबसे पहले भगवान सूर्य को अर्पित की जाती है। 36 घंटे के कठिन उपवास से पहले यह अंतिम भोजन है और छठ पूजा के अंतिम या चौथे दिन तक जारी रहता है
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घाट पर धार्मिक गीतों शुक्रवार सुबह भक्तिमय हो गई। घर से लेकर घाटों तक सब कुछ छठ पर्व के रंग में रंगा नजर आया। पूजा के सामान से भरी टोकरी सिर पर रखकर लोग घाटों पर पहुंचे। कुछ लोगों ने अपने घर में ही अस्थायी कुंड बनाकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया।
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डॉ. परशुराम ने बताया कि छठ उत्सव नहाय खाय के साथ शुरू हुआ हुआ था। खरना के दिन, रसिया के प्रसाद के साथ उपवास तोड़ा जाता है। अरवा चावल, गुड़ और दूध से बनी पारंपरिक खीर, जो सबसे पहले भगवान सूर्य को अर्पित की जाती है। 36 घंटे के कठिन उपवास से पहले यह अंतिम भोजन है और छठ पूजा के अंतिम या चौथे दिन तक जारी रहता है
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