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दो माह से बंद है सेंटर, अल्ट्रासाउंड के लिए भटक रहीं गर्भवती
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नागरिक अस्पताल में बंद पड़ा अल्ट्रासाउंड सेंटर।
- फोटो : Fatehabad
नागरिक अस्पताल में प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप के तहत चल रहा अल्ट्रासाउंड सेंटर बंद हो गया है। करीब दो माह पहले बंद हुआ सेंटर 10 जून को भी शुरू नहीं हुआ है। संचालक ने 10 जून को सेंटर शुरू करने का नोटिस लगाया था लेकिन अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। इसके पीछे कारण विशेषज्ञ के बाहर जाना बताया जा रहा है। पीपीपी के तहत अल्ट्रासाउंड सेंटर बंद होने का खमियाजा गर्भवती को भुगतना पड़ रहा है। अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए गर्भवती को भटकना पड़ रहा है।
बता दें कि गर्भवती को अस्पताल की तरह से कार्ड देकर अल्ट्रासाउंड के लिए दूसरे अस्पताल के सेंटर पर भेजा जा रहा है। यहां तक की कई गर्भवती अपने स्तर पर भी महंगे अल्ट्रासाउंड करवा रही है। अस्पताल में स्थायी विशेषज्ञ न होने के कारण स्वास्थ्य विभाग ने प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप के तहत अल्ट्रासाउंड यहां पर शुरू किया था। जननी सुरक्षा योजना के तहत अस्पताल संचालक को भुगतान करती है। करीब दो माह पहले संचालक ने 10 जून के बाद शुरू होने का नोटिस लगाकर बंद कर दिया था लेकिन अभी तक सुविधा दोबारा शुरू नहीं हो पाई है।
डिलिवरी से पहले प्राइवेट सेंटरों पर अल्ट्रासाउंड करवा रहीं गर्भवती
ओपीडी समय में अस्पताल प्रशासन पैनल में लिए गए अल्ट्रासाउंड सेंटर पर भेजने के लिए गर्भवती को कार्ड जारी कर देता है। ओपीडी समय के बाद डिलिवरी के लिए आई गर्भवती को अपने स्तर पर निजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ रहा है। अल्ट्रासाउंड के लिए 600 से 1200 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
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24 घंटे अल्ट्रासाउंड सुविधा देने की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों की माने तो 24 घंटे अल्ट्रासाउंड सुविधा देने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों को पैनल में शामिल करने की तैयारी है। यानी ओपीडी समय के बाद जो सेंटर पैनल में लिए जाएंगे वहां पर गर्भवती को भेजा जाएगा। इसका भुगतान खुद स्वास्थ्य विभाग करेगा। ये योजना अभी फाइलों में अटकी है।
स्थायी विशेषज्ञ मिला लेकिन पंजीकरण नहीं हुआ
नागरिक अस्पताल को स्थायी विशेषज्ञ मिल गया है लेकिन अल्ट्रासाउंड सुविधा शुरू नहीं हो पाई है। इसके पीछे कारण ये है कि अभी तक विशेषज्ञ का पंजीकरण नहीं हुआ है। इसके अलावा अस्पताल के पास मशीन है। बताया जा रहा है टोहाना नागरिक अस्पताल की मशीन को यहां लाया जा सकता है।
कोट
अल्ट्रासाउंड के लिए रेगुलर विशेषज्ञ आ गया है लेकिन उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। पीपीपी के तहत जो सेंटर चला रहे थे उनके संचालक बाहर गए हुए हैं जो कि नहीं आए हैं। हम पैनल में अल्ट्रासाउंड सेंटर शामिल करने जा रहे है ताकि गर्भवती को 24 घंटे सुविधा दी जा सके।
- डॉ. वीरेश भूषण, सिविल सर्जन।
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बता दें कि गर्भवती को अस्पताल की तरह से कार्ड देकर अल्ट्रासाउंड के लिए दूसरे अस्पताल के सेंटर पर भेजा जा रहा है। यहां तक की कई गर्भवती अपने स्तर पर भी महंगे अल्ट्रासाउंड करवा रही है। अस्पताल में स्थायी विशेषज्ञ न होने के कारण स्वास्थ्य विभाग ने प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप के तहत अल्ट्रासाउंड यहां पर शुरू किया था। जननी सुरक्षा योजना के तहत अस्पताल संचालक को भुगतान करती है। करीब दो माह पहले संचालक ने 10 जून के बाद शुरू होने का नोटिस लगाकर बंद कर दिया था लेकिन अभी तक सुविधा दोबारा शुरू नहीं हो पाई है।
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डिलिवरी से पहले प्राइवेट सेंटरों पर अल्ट्रासाउंड करवा रहीं गर्भवती
ओपीडी समय में अस्पताल प्रशासन पैनल में लिए गए अल्ट्रासाउंड सेंटर पर भेजने के लिए गर्भवती को कार्ड जारी कर देता है। ओपीडी समय के बाद डिलिवरी के लिए आई गर्भवती को अपने स्तर पर निजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ रहा है। अल्ट्रासाउंड के लिए 600 से 1200 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
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24 घंटे अल्ट्रासाउंड सुविधा देने की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों की माने तो 24 घंटे अल्ट्रासाउंड सुविधा देने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों को पैनल में शामिल करने की तैयारी है। यानी ओपीडी समय के बाद जो सेंटर पैनल में लिए जाएंगे वहां पर गर्भवती को भेजा जाएगा। इसका भुगतान खुद स्वास्थ्य विभाग करेगा। ये योजना अभी फाइलों में अटकी है।
स्थायी विशेषज्ञ मिला लेकिन पंजीकरण नहीं हुआ
नागरिक अस्पताल को स्थायी विशेषज्ञ मिल गया है लेकिन अल्ट्रासाउंड सुविधा शुरू नहीं हो पाई है। इसके पीछे कारण ये है कि अभी तक विशेषज्ञ का पंजीकरण नहीं हुआ है। इसके अलावा अस्पताल के पास मशीन है। बताया जा रहा है टोहाना नागरिक अस्पताल की मशीन को यहां लाया जा सकता है।
कोट
अल्ट्रासाउंड के लिए रेगुलर विशेषज्ञ आ गया है लेकिन उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। पीपीपी के तहत जो सेंटर चला रहे थे उनके संचालक बाहर गए हुए हैं जो कि नहीं आए हैं। हम पैनल में अल्ट्रासाउंड सेंटर शामिल करने जा रहे है ताकि गर्भवती को 24 घंटे सुविधा दी जा सके।
- डॉ. वीरेश भूषण, सिविल सर्जन।