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एसडीएम-डीसी के सीएम विंडो लॉग-इन में घूम रही फाइल, मुख्यमंत्री कार्यालय सवा साल से मांग रहा फाइनल एटीआर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 07 Dec 2021 11:51 PM IST
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Bureaucracy: File of fake registered vehicles is roaming in CM window login for a year and a half
कपिल शर्मा
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फतेहाबाद। आमजन की शिकायतों का समाधान करने के लिए बनाई गई सीएम विंडो को अफसरशाही ने मजाक बना दिया है। फर्जी तरीके से वाहनों के पंजीकरण कराने के मामले की फाइल सवा साल से एसडीएम और डीसी के सीएम विंडो लॉग-इन में घूम रही है। मगर शिकायतकर्ता को फाइनल नतीजा नहीं मिल पाया है। मामला हिसार की सील की गई ऑटोमोबाइल एजेंसी में रखे बीएस-टू व बीएस-थ्री श्रेणी के 30 वाहनों को फर्जी तरीके से फतेहाबाद में पंजीकृत करवाने से जुड़ा है। हालात ऐसे हैं कि खुद मुख्यमंत्री के कार्यालय से फाइनल एटीआर मांगी जा रही है, लेकिन अधिकारी सवा साल से मामले को लटकाए हुए हैं।
दरअसल, 20 जनवरी 2020 को सीएम विंडो पर हिसार की संस्था जवाब दो-हिसाब दो एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सरदाना की ओर से शिकायत लगाई गई थी। शिकायत में आरोप था कि साल 2012 में पारिवारिक विवाद के कारण हिसार की एजेंसी बिमला ऑटोमोबाइल को प्रशासन ने सील कर दिया था। साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किए थे कि 31 मार्च 2017 के बाद बीएस-टू व बीएस-थ्री वाहनों को बेचा नहीं जा सकेगा। आरोप है कि पांच साल पुराने वाहनों को ठिकाने लगाने के इरादे से एजेंसी मालिक व छह अन्य लोगों ने मिलकर इन सभी वाहनों को बीएस-4 बनाकर बेच दिया और इन सभी का पंजीकरण फतेहाबाद एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों से सांठगांठ करके करवा लिया।
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फर्जीवाड़ा सामने आने पर एसडीएम ने की थी आरसी रद्द
शिकायत में आरोप था कि एजेंसी मालिक व कर्मचारियों ने मिलीभगत से 30 वाहनों को पंजीकृत करवाया था। इनमें 21 स्कूटर, छह 20 सीटर क्रूजर गाड़ी और चार बसें शामिल थीं। इन सभी वाहनों का 31 जनवरी 2019 और 23 फरवरी 2019 को पांच आदमियों के नाम पंजीकरण करवाया गया। उसके बाद इन वाहनों को आगे बेच दिया गया है। इनमें से छह क्रूजर भिवानी के राकेश के नाम रजिस्टर्ड है, जो आज भी भिवानी में चल रही हैं। सीएम विंडो पर शिकायत होने के बाद आनन-फानन में तत्कालीन एसडीएम संजय बिश्नोई ने फरवरी 2020 में इन वाहनों की आरसी रद्द कर दी थी।
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ई-दिशा केंद्र के पंजीकरण और बिलों में मिला फर्जीवाड़ा
इस पूरे प्रकरण में एजेंसी द्वारा दर्शाए गए बिलों में भी फर्जीवाड़ा किया गया। क्रूजर गाड़ी का बिल एक लाख रुपये का कटा हुआ दर्शाया गया। जबकि ई-दिशा केंद्र के कंप्यूटर में उसकी कीमत पांच लाख 98 हजार रुपये दर्ज हुई है, जिसका टैक्स 30 हजार 980 भरवाया गया। इसी तरह छोटी गाड़ी का बिल 15 हजार रुपये है जबकि ई-दिशा केंद्र ने 39 हजार 890 रुपये का टैक्स काटा है।
एक्साइज एवं टैक्सेशन विभाग में भी नहीं मिला रिकॉर्ड
शिकायतकर्ता राजीव सरदाना का कहना है कि हिसार के एक्साइज एवं टैक्सेशन विभाग में भी इन गाड़ियों के बिलों का कोई टैक्स रिकॉर्ड नहीं मिला है। इसको लेकर भी वहां जांच चल रही है।
21 सितंबर 2020 को पहली बार मुख्यमंत्री कार्यालय ने मांगी थी फाइनल एटीआर
सीएम विंडो पोर्टल की हिस्ट्री के अनुसार 21 सितंबर 2020 को पहली बार मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा पूरा मामला समझने के बाद फतेहाबाद के अधिकारियों से फाइनल एटीआर मांगी थी। उसके बाद लगातार कोई न कोई कागज की कमी बताकर मामले को लटकाया जाता रहा है। हैरानी की बात यह है कि करीब सवा साल बीतने के बाद भी मुख्यमंत्री कार्यालय तक फाइनल एटीआर नहीं भेजी गई है।
जिन वाहनों को इंपाउंड करना चाहिए, उनका दो बार हो गया बीमा
विशेष बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार बीएस-टू व बीएस-थ्री वाहन किसी भी कीमत पर सड़कों पर नहीं चल सकते। इन वाहनों को इंपाउंड किया जाना चाहिए। मगर साल 2020 व साल 2021 में इन वाहनों का दो बार बीमा भी रिन्यू हो चुका है।
इसी तरह के मामले में हो चुकी है एफआईआर दर्ज
ऐसे ही फर्जी तरीके से वाहनों के पंजीकरण के मामले में सीएम फ्लाइंग के डीएसपी की शिकायत पर फतेहाबाद में सेवाएं दे चुके तीन पूर्व एसडीएम, दो क्लर्क सहित 8 लोगों पर धोखाधड़ी सहित कई धाराओं के तहत इसी साल अप्रैल महीने में केस दर्ज किया गया था। उस एफआईआर में पूर्व एसडीएम सतबीर जांगू, संजय बिश्नोई और सुरजीत नैन के अलावा दो पूर्व क्लर्क ओमप्रकाश सिहाग व राजेश खटक का नाम शामिल है। वहीं, तीन वाहन चालक बिहार के जिला रोहताश के गांव अकबरपुर निवासी आलम खान, फतेहाबाद के गांव कन्हेड़ी निवासी रमेश व डूल्ट निवासी भीम के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
इस मामले में एफआईआर दर्ज होनी चाहिए और सभी वाहनों को इंपाउंड किया जाना चाहिए। पुलिस भी मामले को दबाने के प्रयास में हैं। सवा साल से तो मुख्यमंत्री कार्यालय को फाइनल एटीआर नहीं मिली है। अधिकारियों ने सीएम विंडो को मजाक बना दिया है।

- राजीव सरदाना, शिकायतकर्ता
यह मामला संज्ञान में हैं। इस मामले में हमने डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी से राय लेने के लिए मामला भेजा हुआ है। राय मिलने के बाद रिपोर्ट भेजेंगे।
- राजेश कुमार, एसडीएम
कार्यभार संभालने के बाद से लगातार अंत्योदय मेलों में ही लगे हुए हैं। यह मामला कहां रुका हुआ है, इसकी जानकारी ली जाएगी। सीएम विंडों पर आने वाली शिकायतों के समाधान में भी और गंभीरता लाई जाएगी।
- प्रदीप कुमार, उपायुक्त, फतेहाबाद
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