{"_id":"6aca78abc493a7c4910ef584","slug":"blood-crisis-in-blood-banks-people-forced-to-travel-to-other-cities-for-platelets-fatehabad-news-c-127-1-shsr1017-162706-2026-10-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fatehabad News: ब्लड बैंक में रक्त का संकट, प्लेटलेट्स के लिए लगाने पड़ रहे दूसरे शहरों के चक्कर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Fatehabad News: ब्लड बैंक में रक्त का संकट, प्लेटलेट्स के लिए लगाने पड़ रहे दूसरे शहरों के चक्कर
Sat, 10 Oct 2026 11:10 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 10 Oct 2026 11:10 PM IST
विज्ञापन
फतेहाबाद में ब्लड बैंक में स्टॉक नोटिस संवाद
फतेहाबाद। नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त की कमी और ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन सुविधा शुरू नहीं होने से मरीजों की परेशानी बढ़ रही है। जरूरत के समय रक्त नहीं मिलने पर तीमारदारों को हिसार और अग्रोहा जाना पड़ता है। डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स के लिए सिरसा भी जाना पड़ रहा है।
ब्लड कंपोनेंट प्रोजेक्ट शुरू करने की प्रक्रिया करीब पांच साल पहले शुरू हुई थी लेकिन अब तक सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है। अस्पताल प्रशासन लाइसेंस के लिए आवेदन कर चुका है। हालांकि क्रायो मशीन उपलब्ध नहीं होने और लाइसेंस संबंधी अड़चनों के कारण प्रोजेक्ट अटका हुआ है। अधिकारियों के अनुसार मशीन आने के बाद नए सिरे से आवेदन किया जाएगा। मशीन की मांग तीन बार भेजी जा चुकी है।
जिले में अब तक डेंगू के 11 मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में प्लेटलेट्स की जरूरत बढ़ सकती है। कंपोनेंट सेपरेशन सुविधा शुरू होने पर एक यूनिट रक्त से लाल रक्त कोशिकाएं (आरबीसी), प्लेटलेट्स और प्लाज्मा अलग किए जा सकेंगे। इससे जरूरत के अनुसार अलग-अलग मरीजों का उपचार संभव होगा। संवाद
विज्ञापन
-
एक पॉजिटिव ब्लड नहीं, हिसार तक दौड़
नागरिक अस्पताल में पिछले तीन दिन से ए पॉजिटिव ब्लड नहीं है। हालात ये है कि मरीज के तीमारदारों को हिसार तक दौड़ करनी पड़ रही है। जगजीवनपुरा निवासी चिनू का कहना है कि उसकी माता को रक्त की कमी होने पर दो यूनिट की जरूरत थी। जब वे लेने के लिए नागरिक अस्पताल में गए तो वहां रक्त उपलब्ध नहीं था। ऐसे में उन्हें हिसार जाना पड़ा है। नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक में ए निगेटिव, एबी निगेटिव की एक-एक यूनिट है। इसके अलावा एबी पॉजिटिव है ही नहीं।
-- -- -- -- -- -
एक ब्लड से कई घटक हो सकते हैं तैयार
ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन की सुविधा शुरू होने से मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है। इस तकनीक के माध्यम से एक यूनिट रक्त से लाल रक्त कोशिकाएं (आरबीसी), प्लेटलेट्स और प्लाज्मा जैसे अलग-अलग घटक तैयार किए जा सकते हैं। इससे एक ही रक्तदान से जरूरत के अनुसार अलग-अलग मरीजों का उपचार संभव हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, खून की कमी वाले मरीज को आरबीसी, डेंगू के कुछ मरीजों को चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार प्लेटलेट्स और कुछ अन्य मरीजों को प्लाज्मा दिया जा सकता है।
-
डेंगू मरीजों को होती है ज्यादा जरूरत
डेंगू के मामलों में जब मरीज के प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं और चिकित्सक प्लेटलेट्स चढ़ाने की सलाह देते हैं तो स्थानीय स्तर पर सुविधा नहीं होने के कारण तीमारदारों को दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। इससे मरीजों के उपचार में परेशानी बढ़ती है। यदि नागरिक अस्पताल में कंपोनेंट सेपरेशन की सुविधा शुरू हो जाए तो जरूरतमंद मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही प्लेटलेट्स उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
-
पांच साल बाद भी इंतजार
ब्लड कंपोनेंट प्रोजेक्ट के लिए करीब पांच साल पहले प्रक्रिया शुरू की गई थी। दो साल पहले मुख्यालय से आई टीम ने निरीक्षण किया तो प्रोजेक्ट शुरू न होने के पीछे जगह की कमी बताई गई। 10 लाख में हॉल भी तैयार हुआ लेकिन इसके बाद लाइसेंस के लिए औपचारिकताएं पूरी नहीं हुई है। क्रायो मशीन की उपलब्धता और लाइसेंस से जुड़ी अड़चन परियोजना की राह में बाधा बनी हुई हैं।
-
ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर प्रोजेक्ट के लिए एक मशीन की कमी है। इसकी डिमांड भेजी गई है। मशीन आने के बाद ही लाइसेंस के लिए आवेदन होगा।
- डॉ. बुधराम, सिविल सर्जन
विज्ञापन
ब्लड कंपोनेंट प्रोजेक्ट शुरू करने की प्रक्रिया करीब पांच साल पहले शुरू हुई थी लेकिन अब तक सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है। अस्पताल प्रशासन लाइसेंस के लिए आवेदन कर चुका है। हालांकि क्रायो मशीन उपलब्ध नहीं होने और लाइसेंस संबंधी अड़चनों के कारण प्रोजेक्ट अटका हुआ है। अधिकारियों के अनुसार मशीन आने के बाद नए सिरे से आवेदन किया जाएगा। मशीन की मांग तीन बार भेजी जा चुकी है।
विज्ञापन
जिले में अब तक डेंगू के 11 मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में प्लेटलेट्स की जरूरत बढ़ सकती है। कंपोनेंट सेपरेशन सुविधा शुरू होने पर एक यूनिट रक्त से लाल रक्त कोशिकाएं (आरबीसी), प्लेटलेट्स और प्लाज्मा अलग किए जा सकेंगे। इससे जरूरत के अनुसार अलग-अलग मरीजों का उपचार संभव होगा। संवाद
विज्ञापन
-
एक पॉजिटिव ब्लड नहीं, हिसार तक दौड़
नागरिक अस्पताल में पिछले तीन दिन से ए पॉजिटिव ब्लड नहीं है। हालात ये है कि मरीज के तीमारदारों को हिसार तक दौड़ करनी पड़ रही है। जगजीवनपुरा निवासी चिनू का कहना है कि उसकी माता को रक्त की कमी होने पर दो यूनिट की जरूरत थी। जब वे लेने के लिए नागरिक अस्पताल में गए तो वहां रक्त उपलब्ध नहीं था। ऐसे में उन्हें हिसार जाना पड़ा है। नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक में ए निगेटिव, एबी निगेटिव की एक-एक यूनिट है। इसके अलावा एबी पॉजिटिव है ही नहीं।
एक ब्लड से कई घटक हो सकते हैं तैयार
ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन की सुविधा शुरू होने से मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है। इस तकनीक के माध्यम से एक यूनिट रक्त से लाल रक्त कोशिकाएं (आरबीसी), प्लेटलेट्स और प्लाज्मा जैसे अलग-अलग घटक तैयार किए जा सकते हैं। इससे एक ही रक्तदान से जरूरत के अनुसार अलग-अलग मरीजों का उपचार संभव हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, खून की कमी वाले मरीज को आरबीसी, डेंगू के कुछ मरीजों को चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार प्लेटलेट्स और कुछ अन्य मरीजों को प्लाज्मा दिया जा सकता है।
-
डेंगू मरीजों को होती है ज्यादा जरूरत
डेंगू के मामलों में जब मरीज के प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं और चिकित्सक प्लेटलेट्स चढ़ाने की सलाह देते हैं तो स्थानीय स्तर पर सुविधा नहीं होने के कारण तीमारदारों को दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। इससे मरीजों के उपचार में परेशानी बढ़ती है। यदि नागरिक अस्पताल में कंपोनेंट सेपरेशन की सुविधा शुरू हो जाए तो जरूरतमंद मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही प्लेटलेट्स उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
-
पांच साल बाद भी इंतजार
ब्लड कंपोनेंट प्रोजेक्ट के लिए करीब पांच साल पहले प्रक्रिया शुरू की गई थी। दो साल पहले मुख्यालय से आई टीम ने निरीक्षण किया तो प्रोजेक्ट शुरू न होने के पीछे जगह की कमी बताई गई। 10 लाख में हॉल भी तैयार हुआ लेकिन इसके बाद लाइसेंस के लिए औपचारिकताएं पूरी नहीं हुई है। क्रायो मशीन की उपलब्धता और लाइसेंस से जुड़ी अड़चन परियोजना की राह में बाधा बनी हुई हैं।
-
ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर प्रोजेक्ट के लिए एक मशीन की कमी है। इसकी डिमांड भेजी गई है। मशीन आने के बाद ही लाइसेंस के लिए आवेदन होगा।
- डॉ. बुधराम, सिविल सर्जन