{"_id":"99512ab63ef0d45452e066c11c8d1f65","slug":"asp-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"घर चलाने को की नौकरी, सेल्फ स्टडी से बने आईपीएस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घर चलाने को की नौकरी, सेल्फ स्टडी से बने आईपीएस
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहाबाद
Updated Wed, 23 Dec 2015 11:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हौसलों में उड़ान हो तो सपने भी साकार हो जाते हैं। फिर चाहे जीवन में जितनी रुकावटें क्यों ना आएं। इस बात को सिद्ध कर दिखाया है फतेहाबाद के नवनियुक्त एएसपी गंगाराम पूनिया ने। यंग स्टार पुनिया की कहानी संघर्षों से भरी है। जिन्होंने मुश्किलों को मात देते हुए अपनी मंजिल हासिल की। नवनियुक्त एएसपी ने दूसरे प्रयास में आईपीएस की परीक्षा क्लीयर कर अपने मां-बाप का सपना साकार कर दिया।
अमर उजाला से विशेष बातचीत में आईपीएस गंगाराम पूनिया ने कहा कि वह किसान परिवार में जन्मे। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। इसी बीच राजस्थान नागौर जिले के परवतसर तहसील के गांव लिखियास में बारहवीं तक की परीक्षा पास की। फिर किस्मत ने साथ दिया और जनवरी 2009 में अजमेर के पोस्ट ऑफिस में क्लर्क की नौकरी मिल गई। नौकरी के साथ ग्रेजुएशन पूरी की। इसी दौरान खंगारो सर ने सिविल सर्विस की तैयारी करने के लिए गाइड किया। एएसपी पूनिया बताते हैं कि घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए क्लर्क की नौकरी करना भी जरूरी था क्योंकि घर चलाने के लिए पैसे चाहिए थे। उन्होंने बिना कोचिंग सेल्फ स्टडी करके सिविल सर्विस की तैयारी की। पूनिया बताते हैं कि सिविल सर्विस की पहली परीक्षा में वह इंटरव्यू तक पहुंचे लेकिन कामयाब नहीं हुए। एएसपी पूनिया ने कहा कि फतेहाबाद ज्वाइनिंग से पहले वह भिवानी हरियाणा में अंडर ट्रेनिंग पर रहे।
मंा-बाप के साथ देखा था सपना और कर दिखाया साकार
पूनिया बताते हैं कि उनके माता-पिता के साथ उन्होंने आईपीएस अधिकारी बनने का सपना देखा था। इस सपने को साकार करने के लिए आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करना था। जिसके लिए उन्होंने पोस्ट कार्यालय में क्लर्क की नौकरी की और इसे सीढ़ी बनाया। पूनिया बताते हैं कि उनके बड़े भाई महेंद्र जो कि 2013 में ही टीचर की नौकरी पर कार्यरत हुए।
विज्ञापन
कानून व्यवस्था को बनाए रखना पहला काम रहेगा। एसपी नरवाल जी ने नशे को रोकने के लिए अभियान चलाया हुआ है। मेरी भी यह प्राथमिकता रहेगी कि मैं भी इसे आगे गति दूं।
गंगाराम पूनियां, एएसपी फतेहाबाद
विज्ञापन
अमर उजाला से विशेष बातचीत में आईपीएस गंगाराम पूनिया ने कहा कि वह किसान परिवार में जन्मे। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। इसी बीच राजस्थान नागौर जिले के परवतसर तहसील के गांव लिखियास में बारहवीं तक की परीक्षा पास की। फिर किस्मत ने साथ दिया और जनवरी 2009 में अजमेर के पोस्ट ऑफिस में क्लर्क की नौकरी मिल गई। नौकरी के साथ ग्रेजुएशन पूरी की। इसी दौरान खंगारो सर ने सिविल सर्विस की तैयारी करने के लिए गाइड किया। एएसपी पूनिया बताते हैं कि घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए क्लर्क की नौकरी करना भी जरूरी था क्योंकि घर चलाने के लिए पैसे चाहिए थे। उन्होंने बिना कोचिंग सेल्फ स्टडी करके सिविल सर्विस की तैयारी की। पूनिया बताते हैं कि सिविल सर्विस की पहली परीक्षा में वह इंटरव्यू तक पहुंचे लेकिन कामयाब नहीं हुए। एएसपी पूनिया ने कहा कि फतेहाबाद ज्वाइनिंग से पहले वह भिवानी हरियाणा में अंडर ट्रेनिंग पर रहे।
विज्ञापन
मंा-बाप के साथ देखा था सपना और कर दिखाया साकार
पूनिया बताते हैं कि उनके माता-पिता के साथ उन्होंने आईपीएस अधिकारी बनने का सपना देखा था। इस सपने को साकार करने के लिए आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करना था। जिसके लिए उन्होंने पोस्ट कार्यालय में क्लर्क की नौकरी की और इसे सीढ़ी बनाया। पूनिया बताते हैं कि उनके बड़े भाई महेंद्र जो कि 2013 में ही टीचर की नौकरी पर कार्यरत हुए।
विज्ञापन
कानून व्यवस्था को बनाए रखना पहला काम रहेगा। एसपी नरवाल जी ने नशे को रोकने के लिए अभियान चलाया हुआ है। मेरी भी यह प्राथमिकता रहेगी कि मैं भी इसे आगे गति दूं।
गंगाराम पूनियां, एएसपी फतेहाबाद