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पीएम 2.5 का स्तर पहुंचा 411 पर, लोगों को सांस लेने में हो रही दिक्कत
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शहर में फैला पराली का धुआं।
- फोटो : Fatehabad
धान की फसल काटने के बाद किसानों द्वारा जलाई जा रही पराली से आम जनमानस का जीना असहज सा हो गया है। फसल अवशेषों को आग लगाने के चलते जिले में जहरीला धुआं लगातार तेजी से फैल रहा है। प्रदूषण का स्तर लगातार स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होता जा रहा है। सोमवार देर रात्रि को एक्यूआई 178 से बढ़कर 411 पीएम 2.5 लेवल तक पहुंच गया। जो इस सीजन का रिकार्ड स्तर है। एक्यूआई बढ़ने से मंगलवार को लोगों को आंखों में जलन महसूस होनी शुरू हो गई। वहीं मंगलवार रात्रि को एक्यूआई 311 तक पहुंच गया था जो लगातार बढ़ रहा था
मंगलवार को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के पास हरसैक ने 23 स्थानों की लोकेशन भेजी जहां पर आग लगी थी। वहीं बीते दिन दी हुई 5 शिकायतों पर पुलिस ने किसानों के खिलाफ पर्यावरण एक्ट के तहत केस दर्ज किए थे।
यहां बता दें कि हरसैक से अब तक जिला प्रशासन के पास 385 स्थानों पर आग लगने की लोकेशन आ चुकी है। इनमें से जिला पुलिस ने अब तक 116 किसानों के खिलाफ केस दर्ज कर लिए हैं जबकि 153 लोकेशन झूठी पाई गई हैं। बता दें कि यहां जिला स्तर के अधिकारी भी पराली जलाने के मामलों को गंभीरता से नहीं ले रहे। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल व देश की सुप्रीम कोर्ट कितनी ही चुस्ती दिखा ले धरातल पर काम तो अधिकारियों ने ही करना होता है। नाममात्र की कानूनी औपचारिकता से पराली के मामले नहीं रुक रहे। प्रति वर्ष धान कटाई से पूर्व और गेहूं की बिजाई तक यह मामला सुर्खियों में रहता है। इसके बाद सब कुछ शांत हो जाता है।
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क्यों नहीं रुक पा रही पराली जलाने की घटनाएं
धान की कटाई से पूर्व प्रदेश सरकार व कृषि विभाग ने पराली को जलने से बचाने के लिए कई तरह की कमेटियां गठित की थी, जिनमें ग्रामीण लेवल कमेटियां से लेकर जिला लेवल की कमेटियां शामिल थी। इसके अलावा सरकार ने अनुदान पर कृषि यंत्रों को ड्रा निकालकर किसानों को दिया गया। सरकार ने पराली न जलाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 1 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि देने की भी घोषणा कर रखी है। इसके अलावा सरपंचों ग्राम सचिवों, कृषि विभाग के अधिकारियों को सहयोग ना करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा नोटिस दिया जा चुका है, लेकिन उसके बावजूद भी पराली जलाने के मामले कम होने की बजाय लगातार बढ़ रहे हैं।
पराली के मामले में अधिकारी फील्ड में उतरे हुए हैं। पहले से मामले में सुधार आया है। पिछले वर्ष पराली जलाने के मामले इस वर्ष से काफी ज्यादा थे। धीरे धीरे इसमें कमी आ जाएगी। -राजेश सिहाग, डीडीए, फतेहाबाद।
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मंगलवार को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के पास हरसैक ने 23 स्थानों की लोकेशन भेजी जहां पर आग लगी थी। वहीं बीते दिन दी हुई 5 शिकायतों पर पुलिस ने किसानों के खिलाफ पर्यावरण एक्ट के तहत केस दर्ज किए थे।
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यहां बता दें कि हरसैक से अब तक जिला प्रशासन के पास 385 स्थानों पर आग लगने की लोकेशन आ चुकी है। इनमें से जिला पुलिस ने अब तक 116 किसानों के खिलाफ केस दर्ज कर लिए हैं जबकि 153 लोकेशन झूठी पाई गई हैं। बता दें कि यहां जिला स्तर के अधिकारी भी पराली जलाने के मामलों को गंभीरता से नहीं ले रहे। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल व देश की सुप्रीम कोर्ट कितनी ही चुस्ती दिखा ले धरातल पर काम तो अधिकारियों ने ही करना होता है। नाममात्र की कानूनी औपचारिकता से पराली के मामले नहीं रुक रहे। प्रति वर्ष धान कटाई से पूर्व और गेहूं की बिजाई तक यह मामला सुर्खियों में रहता है। इसके बाद सब कुछ शांत हो जाता है।
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क्यों नहीं रुक पा रही पराली जलाने की घटनाएं
धान की कटाई से पूर्व प्रदेश सरकार व कृषि विभाग ने पराली को जलने से बचाने के लिए कई तरह की कमेटियां गठित की थी, जिनमें ग्रामीण लेवल कमेटियां से लेकर जिला लेवल की कमेटियां शामिल थी। इसके अलावा सरकार ने अनुदान पर कृषि यंत्रों को ड्रा निकालकर किसानों को दिया गया। सरकार ने पराली न जलाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 1 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि देने की भी घोषणा कर रखी है। इसके अलावा सरपंचों ग्राम सचिवों, कृषि विभाग के अधिकारियों को सहयोग ना करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा नोटिस दिया जा चुका है, लेकिन उसके बावजूद भी पराली जलाने के मामले कम होने की बजाय लगातार बढ़ रहे हैं।
पराली के मामले में अधिकारी फील्ड में उतरे हुए हैं। पहले से मामले में सुधार आया है। पिछले वर्ष पराली जलाने के मामले इस वर्ष से काफी ज्यादा थे। धीरे धीरे इसमें कमी आ जाएगी। -राजेश सिहाग, डीडीए, फतेहाबाद।