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फतेहाबाद में एक्यूआई 338 : प्रदूषण से घुटने लगीं सांसें, प्रशासन ने कराया पानी का छिड़काव
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लघु सचिवालय में प्रदूषण बढ़ने पर पानी का छिड़काव करते दमकल कर्मी।
फतेहाबाद। जिले में धान की फसल के अवशेष जलाने की घटनाओं के चलते प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार को जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 338 तक पहुंच गया, जिससे लोगों को सांस लेने में कठिनाई हो रही है और आंखों में जलन की समस्या है। प्रशासन ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया है और लघु सचिवालय के एक्यूआई मापक यंत्र के पास दमकल गाड़ी से पानी छिड़काव किया गया।
जिले में पराली जलाने की 76 लोकेशन की रिपोर्ट प्राप्त हुई है, जिनमें से 42 लोकेशन झूठी पाई गईं। शुक्रवार को एक और लोकेशन पर पराली जलाने की घटना सामने आई, जिसके बाद कृषि विभाग ने 13 किसानों के खिलाफ मामला दर्ज किया। अब तक कुल 32 किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है।
इसके अलावा, पराली जलाने की घटनाओं पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए 41 कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें 23 पुलिसकर्मी शामिल हैं। चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया जा चुका है। प्रशासन ने कहा कि पराली जलाना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि इससे भूमि की उर्वरता भी घटती है।
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कृषि विभाग की ओर से लगातार किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक कर रहा है। इससे पर्यावरण प्रदूषित होता है और भूमि की उर्वरता भी कम होती है। किसानों से अपील है कि पराली प्रबंधन में सरकार का सहयोग करें। - डॉ. राजपाल, तकनीकी सहायक कृषि एवं कल्याण विभाग, फतेहाबाद।
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जिले में पराली जलाने की 76 लोकेशन की रिपोर्ट प्राप्त हुई है, जिनमें से 42 लोकेशन झूठी पाई गईं। शुक्रवार को एक और लोकेशन पर पराली जलाने की घटना सामने आई, जिसके बाद कृषि विभाग ने 13 किसानों के खिलाफ मामला दर्ज किया। अब तक कुल 32 किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है।
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इसके अलावा, पराली जलाने की घटनाओं पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए 41 कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें 23 पुलिसकर्मी शामिल हैं। चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया जा चुका है। प्रशासन ने कहा कि पराली जलाना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि इससे भूमि की उर्वरता भी घटती है।
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कृषि विभाग की ओर से लगातार किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक कर रहा है। इससे पर्यावरण प्रदूषित होता है और भूमि की उर्वरता भी कम होती है। किसानों से अपील है कि पराली प्रबंधन में सरकार का सहयोग करें। - डॉ. राजपाल, तकनीकी सहायक कृषि एवं कल्याण विभाग, फतेहाबाद।