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Fatehabad News: पहले नौकरी लगाने के लिए गांव में होती थी घोषणा, मंत्रियों की कोठियों पर बनती थी सूची

Mon, 06 May 2024 02:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Mon, 06 May 2024 02:57 AM IST
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Announcement was made in the village for job placement
फतेहाबाद। प्रदेश की राजनीति के बीते पांच दशकों में मतदाताओं ने अलग-अलग दौर देखे हैं। एक दौर ऐसा भी रहा है, जब सरकारी नौकरी लगाने के लिए गांवों में अनाउसमेंट होती थी। बकायदा लाउडस्पीकर पर आवाज लगाई जाती थी कि किसी को सरकारी नौकरी लगना हो तो सूचना दें। इसके बाद आवेदक जितना पढ़ा-लिखा होता था, उसको उसी अनुरूप नौकरी दे दी जाती थी। विशेष बात यह है कि मंत्रियों, विधायकों व मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों के घर नौकरियां पाने वालों की सूची तैयार होती थी। मगर अब धीरे-धीरे दौर बदला है। अब काफी हद तक नौकरियां मेरिट व टेस्ट के आधार पर मिलने लगी हैं। प्रतिद्वंद्विता बढ़ने से कोचिंग सेंटरों में भी प्रशिक्षुओं की भीड़ दिनोंदिन बढ़ रही है।
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दो से तीन नौकरियां तक भी बदल लेते थे
गांव मोहम्मदपुर रोही निवासी फार्मासिस्ट उग्रसेन बताते हैं कि चौधरी भजनलाल जब मुख्यमंत्री होते थे, तो गांव के काफी लोगों को सरकारी नौकरियां दी गई। उस समय लोग ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं होते थे, इसलिए गांव में अनाउसमेंट करवा कर आवेदक बुलाए जाते थे। जो जितनी पढ़ाई किए हुए होता था, उसको उसी आधार पर नौकरी दे दी जाती थी। काफी लोग तो ऐसे होते थे, जो एक नौकरी छोड़कर दूसरी पा लेते थे। कोई दो तो कोई तीन-तीन नौकरियां बदलता था। कई ऐसे भी होते थे, जो सरकारी नौकरी छोड़कर आने के बाद दोबारा नौकरी लेने ही नहीं जाते थे।
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जिसको भी दी, घर बैठे नौकरी दी
इसी तरह पूर्व गृहमंत्री स्व. मनीराम गोदारा के पौत्र सुधीर गोदारा बताते हैं कि उनके दादा जब मंत्री होते थे, तो रिश्तेदार व गांव और आसपास के लोग नौकरी लगने के लिए आते थे। मगर दादाजी ने कभी जातपात या भाई-भतीजावाद नहीं किया। जिसको भी नौकरी दी, उसे घर बैठे ही नौकरी लगवा दिया। मगर किसी से एक रुपया भी नौकरी लगवाने के नाम पर नहीं लिया गया। उनके दादाजी का लंबा राजनीतिक जीवन रहा, लेकिन कभी उनके दामन पर भ्रष्टाचार के दाग नहीं लगे।
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बिना खर्ची-बिना पर्ची का चल रहा नारा
अब भाजपा की ओर से बिना खर्ची-बिना पर्ची का नारा बड़े जोर-शोर से बुलंद किया जाता है। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष वेद फुलां कहते हैं कि साल 2014 में भाजपा सरकार बनने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने नौकरियों के मामले में नई प्रणाली को शुरू किया। उन्होंने बिना खर्ची-बिना पर्ची नौकरी लगाने के आदेश जारी किए। यही कारण है कि अब गरीब घर के बेटा-बेटी भी बिना किसी सिफारिश के नौकरी लग रहे हैं।
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