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Fatehabad News: खेलों के साथ खेतीबाड़ी में भी समैन आगे
Thu, 11 Jun 2026 11:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Thu, 11 Jun 2026 11:11 PM IST
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समैन। गांव समैन के खेतों में लहराती धान की फसल। फाइल फोटो
समैन। कबड्डी खेल में नाम कमाने वाले गांव समैन खेतीबाड़ी में भी पीछे नहीं है। गांव में करीब 7400 एकड़ कृषि योग्य भूमि है। इसमें 500 एकड़ में केवल बागवानी होती है। इनमें आड़ू, सफेदा अमरूद, चीकू, मौसमी प्रमुख फल हैं। इसके अलावा गेहूं, धान, नरमा, गन्ना, सरसों, जौ, मूंग यहां की अन्य प्रमुख फसल हैं।
गांव में खेती होने का प्रमुख कारण नहरी पानी की उपलब्धता है। गांव में पहले मौसम आधारित खेती होती थी। जैसे-जैसे तकनीक बढ़ी युवाओं का रुझान भी खेती की तरफ बढ़ा। उन्होंने परंपरागत खेती के साथ नकदी फसल और बागवानी की तरफ भी अपने कदम बढ़ाए। गांव में 50 से अधिक युवा किसान पॉली हाउस में सब्जियां उगाकर काफी अच्छी कमाई कर रहे हैं। फसल की बिजाई से लेकर कटाई तक आधुनिक कृषि यंत्रों का पूरा उपयोग होने लगा है, जिससे गांव का किसान लगातार मजबूत होकर देश के निर्माण में योगदान दे रहा है।
गांव समैन के किसान राजबीर गिल बताते हैं कि वर्ष 1953-54 में जमीनों की चकबंदी के बाद गांव की खेती की जमीन में नहरी पानी लगना शुरू हुआ। उसके बाद गांव की तस्वीर पूरी तरह से बदल गई और आर्थिक रूप से काफी मजबूत हुआ। इस कारण गांव जिले में एक अलग ही पहचान बनी है।
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गांव समैन के लोगों ने खेतीबाड़ी में नए आयाम स्थापित किए हैं। वर्ष 1990 तक गांव की जमींन में बहुत ही सीमित फसलें होती थी, लेकिन किसानों ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर बंजर जमीन को उपजाऊ करके खेतीबाड़ी के योग्य बनाया। मौजूदा समय की जमीन लगभग हर तरह की खेती होती है जिससे गांव के किसान मजबूत हुए है।
- जगमिंदर गिल, एसडीओ पशुपालन विभाग।
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गांव के किसानों ने धीरे-धीरे खेती करने के तरीकों में बड़ा बदलाव किया है। वर्ष 2000 तक गांव में गन्ने व नरमे की खूब फसल होती थी। इसके अलावा किसान कोल्हू से गुड़ भी तैयार करते थे लेकिन अब खेती करने का तरीका पूरी तरह से बदल गया है। किसानों का रुझान अब परंपरागत खेती के साथ बागवानी व सब्जियों की तरफ भी हुआ है। गांव के कुल रकबे में से लगभग 500 एकड़ में बागवानी व सब्जियों की फसलें होती हैं। बागवानी में सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम का बड़े स्तर पर उपयोग करना शुरू किया है। उन्हें से प्रेरणा लेकर आसपास के गांव के किसान भी खेतीबाड़ी के इस बदलाव को अपना रहे हैं।
- सत्ता उर्फ सत्यवान, किसान
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गांव के युवा किसानों की सोच में खेती करने के तरीकों में बड़ा बदलाव हुआ है। वे नए-नए तरीके सीखकर आधुनिक खेती की तरफ बढ़ रहे हैं। गांव में 50 से अधिक युवा किसान पॉली हाउस में सब्जियां उगाकर काफी अच्छी कमाई कर रहे हैं। फसल की बिजाई से लेकर कटाई तक आधुनिक कृषि यंत्रों का पूरा उपयोग होने लगा है जिससे गांव का किसान लगातार मजबूत होकर देश के निर्माण में सबसे अधिक योगदान दे रहा है।
- श्यामबीर गिल, युवा किसान
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वर्ष 2000 के बाद गांव समैन के किसान नरमा, ज्वार व बाजरे की फसलों के बजाय अब गेहूं, धान, गन्ना व बागवानी पर ज्यादा ध्यान देने लगा हैं जिससे उनकी आर्थिक स्थिति काफी मजबूत हुई है। गांव के किसान शुरू से ही मेहनती रहे है। इसी का नतीजा है कि गांव खेल, शिक्षा के साथ खेतीबाड़ी में भी प्रगति कर रहे हैं।
- बेदी गिल, किसान समैन।
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गांव में खेती होने का प्रमुख कारण नहरी पानी की उपलब्धता है। गांव में पहले मौसम आधारित खेती होती थी। जैसे-जैसे तकनीक बढ़ी युवाओं का रुझान भी खेती की तरफ बढ़ा। उन्होंने परंपरागत खेती के साथ नकदी फसल और बागवानी की तरफ भी अपने कदम बढ़ाए। गांव में 50 से अधिक युवा किसान पॉली हाउस में सब्जियां उगाकर काफी अच्छी कमाई कर रहे हैं। फसल की बिजाई से लेकर कटाई तक आधुनिक कृषि यंत्रों का पूरा उपयोग होने लगा है, जिससे गांव का किसान लगातार मजबूत होकर देश के निर्माण में योगदान दे रहा है।
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गांव समैन के किसान राजबीर गिल बताते हैं कि वर्ष 1953-54 में जमीनों की चकबंदी के बाद गांव की खेती की जमीन में नहरी पानी लगना शुरू हुआ। उसके बाद गांव की तस्वीर पूरी तरह से बदल गई और आर्थिक रूप से काफी मजबूत हुआ। इस कारण गांव जिले में एक अलग ही पहचान बनी है।
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गांव समैन के लोगों ने खेतीबाड़ी में नए आयाम स्थापित किए हैं। वर्ष 1990 तक गांव की जमींन में बहुत ही सीमित फसलें होती थी, लेकिन किसानों ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर बंजर जमीन को उपजाऊ करके खेतीबाड़ी के योग्य बनाया। मौजूदा समय की जमीन लगभग हर तरह की खेती होती है जिससे गांव के किसान मजबूत हुए है।
- जगमिंदर गिल, एसडीओ पशुपालन विभाग।
गांव के किसानों ने धीरे-धीरे खेती करने के तरीकों में बड़ा बदलाव किया है। वर्ष 2000 तक गांव में गन्ने व नरमे की खूब फसल होती थी। इसके अलावा किसान कोल्हू से गुड़ भी तैयार करते थे लेकिन अब खेती करने का तरीका पूरी तरह से बदल गया है। किसानों का रुझान अब परंपरागत खेती के साथ बागवानी व सब्जियों की तरफ भी हुआ है। गांव के कुल रकबे में से लगभग 500 एकड़ में बागवानी व सब्जियों की फसलें होती हैं। बागवानी में सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम का बड़े स्तर पर उपयोग करना शुरू किया है। उन्हें से प्रेरणा लेकर आसपास के गांव के किसान भी खेतीबाड़ी के इस बदलाव को अपना रहे हैं।
- सत्ता उर्फ सत्यवान, किसान
गांव के युवा किसानों की सोच में खेती करने के तरीकों में बड़ा बदलाव हुआ है। वे नए-नए तरीके सीखकर आधुनिक खेती की तरफ बढ़ रहे हैं। गांव में 50 से अधिक युवा किसान पॉली हाउस में सब्जियां उगाकर काफी अच्छी कमाई कर रहे हैं। फसल की बिजाई से लेकर कटाई तक आधुनिक कृषि यंत्रों का पूरा उपयोग होने लगा है जिससे गांव का किसान लगातार मजबूत होकर देश के निर्माण में सबसे अधिक योगदान दे रहा है।
- श्यामबीर गिल, युवा किसान
वर्ष 2000 के बाद गांव समैन के किसान नरमा, ज्वार व बाजरे की फसलों के बजाय अब गेहूं, धान, गन्ना व बागवानी पर ज्यादा ध्यान देने लगा हैं जिससे उनकी आर्थिक स्थिति काफी मजबूत हुई है। गांव के किसान शुरू से ही मेहनती रहे है। इसी का नतीजा है कि गांव खेल, शिक्षा के साथ खेतीबाड़ी में भी प्रगति कर रहे हैं।
- बेदी गिल, किसान समैन।