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Fatehabad News: 1972 के बाद साल 2019 के चुनाव में ही सभी उम्मीदवार एक हजार से अधिक वोट ले पाए

Mon, 09 Sep 2024 02:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Mon, 09 Sep 2024 02:52 AM IST
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After 1972, only in the year 2019 elections all the candidates were able to get more than one thousand votes.
फतेहाबाद। फतेहाबाद विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ने वालों को मिले वोटों का आंकड़ा भी बेहद रोचक है। एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि साल 1972 के बाद सिर्फ 2019 का चुनाव ही ऐसा रहा, जिसमें सभी उम्मीदवार एक हजार से अधिक वोट ले पाए।
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अब तक फतेहाबाद विधानसभा सीट पर 13 आम चुनाव हो चुके हैं। इनमें से साल 2014 में एक, साल 2009 में दो, साल 2005 में दो, साल 2000 में दो, साल 1996 व साल 1987 में तीन प्रत्याशी ऐसे रहे, जिनको एक हजार वोट भी नहीं मिल पाए। हालांकि, इतने कम वोट पाने वाले अधिकांश निर्दलीय उम्मीदवार ही रहे हैं।
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साल 2019 में छह पार्टियों के ही उम्मीदवार मैदान में थे, सभी को एक हजार से अधिक वोट मिले। इनमें से भाजपा के दुड़ाराम को 77,369 तथा जजपा के डॉ. वीरेंद्र सिवाच को 74,069, कांग्रेस के प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा को 20,898, बीएसपी के जिले सिंह वर्मा को 3137, आम आदमी पार्टी के लक्ष्य गर्ग को 2,493 और इनेलो की सुमनलता सिवाच को 2,111 वोट मिले थे।
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दरअसल, साल 1967 के विधानसभा चुनाव में छह प्रत्याशी मैदान में उतरे थे, जिनमें से दो निर्दलीय थे। इस चुनाव में जीतने वाले कांग्रेस के गोबिंद राय बतरा के अलावा अखिल भारतीय जनसंघ, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के तीनों उम्मीदवारों को निर्दलीय उम्मीदवारों से कम वोट मिले। इस चुनाव में आरपीआई के मनोहर मात्र 362 वोट ले पाए थे।
साल 1968 के विधानसभा चुनाव में तो इस सीट से दो ही उम्मीदवार कांग्रेस से पोखरराम और निर्दलीय लीलाकृष्ण रहे। पोखरराम 6,066 वोटों से जीते थे। वहीं, साल 1972 के चुनाव में भी कांग्रेस के पोखरराम ही जीते थे। उस चुनाव में पोखरराम सहित तीन उम्मीदवार थे, बाकी दो गोबिंद राय व रतन सिंह निर्दलीय उतरे। गोबिंद राय को 23,366 और रतन सिंह को 1,049 वोट मिले थे। संवाद
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साल 1982 में छह उम्मीदवार रह गए थे एक हजार से नीचे
फतेहाबाद हलके से साल 1982 में कुल दस उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। इनमें से आठ निर्दलीय थे जबकि कांग्रेस से गोबिंद राय बतरा और लोकदल से हरमिंदर सिंह प्रत्याशी थे। आठ निर्दलीयों में से सिर्फ हरफूल सिंह 5,990 और मनीराम छापोला 1,471 वोट ले पाए थे। बाकी छह निर्दलीयों में से टेकचंद को 891, नरोत्तम कुमार को 543, मनरूप को 504, राम रिछपाल को 350, हंसराज को 337 व राम सिंह को 324 वोट मिले थे।
इसके बाद हुए साल 1987 के चुनाव में आठ उम्मीदवार मैदान में आए। इनमें से बीजेपी के बलबीर सिंह चौधरी, सीपीआईएम के पृथ्वी सिंह गोरखपुरिया, कांग्रेस के लीलाकृष्ण चौधरी के अलावा बाकी पांच निर्दलीय रहे। पांचों में से तीन निर्दलीय अमर सिंह को 744, मदनलाल को 478, प्रताप सिंह को 386 वोट ही मिले थे। साल 1991 के चुनाव में नौ उम्मीदवारों में से चार निर्दलीय थे, जिनमें से शामलाल राठी को 612 व मोहिंद्र कुमार को 477 वोट मिले थे।

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साल 2009 में समस्त भारतीय पार्टी के बिल्लू को मिले सबसे कम वोट
साल 1996 में 10 उम्मीदवार रहे। इनमें से तीन उम्मीदवार निर्दलीय राजकुमार को 878, बीएसपी की हरबंस कौर को 774, निर्दलीय पूर्णचंद को 711 वोट ही मिल पाए। साल 2000 में नौ उम्मीदवारों में से दो निर्दलीय मुरारी लाल को 784 व निर्दलीय भगवान दास को 469 वोट मिले। साल 2005 में सात उम्मीदवारों में से निर्दलीय विष्णु दत्त को 941 और बीआरपी के सौदागर सिंह को 846 वोट ही मिले। साल 2009 में नौ उम्मीदवारों में से निर्दलीय महाराणा प्रताप को 948 और समस्त भारतीय पार्टी के नरेंद्र कुमार बिल्लू को 853 वोट हासिल हुए। साल 2014 में दस उम्मीदवार लड़े थे। इनमें से सिर्फ बहुजन समाज पार्टी के डॉ. सुशील इंदौरा को ही सबसे कम वोट मिले थे, उन्हें मात्र 996 वोट मिले।
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