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Fatehabad News: चार माह में 778 लोग कुत्ते के काटने पर अस्पताल पहुंचे

Sun, 27 Sep 2026 11:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Sun, 27 Sep 2026 11:17 PM IST
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778 people were admitted to the hospital for dog bites in four months
फतेहाबाद में गांव मेहूवाला घूमते हुए कुत्तेस्त्रोत लाइब्रेरी
फतेहाबाद। शहर में कुत्तों के हमले की समस्या सिर्फ गलियों में घूम रहे आवारा कुत्तों तक सीमित नहीं है। पालतू कुत्तों की निगरानी और पंजीकरण की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। नगर परिषद के रिकॉर्ड में फिलहाल एक भी पालतू कुत्ते का पंजीकरण नहीं है।
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मई से अगस्त तक के आंकड़े देखे तो शहर में 778 लोग कुत्ते के काटने के बाद नागरिक अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन की पहली डोज लगवाने पहुंचे। इनमें मई में 208, जून में 195, जुलाई में 210 और अगस्त में 165 लोग शामिल हैं। यानी हर माह औसतन 195 लोग कुत्ते के काटने के बाद अस्पताल पहुंचे। इसके अलावा बंदर, बिल्ली और अन्य जानवरों के काटने के मामले भी सामने आ रहे हैं।
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दूसरी ओर आवारा कुत्तों को पकड़कर उनका टीकाकरण और बधियाकरण कराने का ठेका भी पिछले चार माह से रेट को लेकर मंजूरी के इंतजार में अटका हुआ है। इसका असर शहर में कुत्तों की बढ़ती संख्या और लोगों के सामने बढ़ते खतरे के रूप में दिखाई दे रहा है।
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रोजाना 25 से 30 लोग पहुंच रहे अस्पताल
नागरिक अस्पताल में इन दिनों रोजाना करीब 25 से 30 लोग एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। अस्पताल के आंकड़ों में मई से अगस्त तक बंदर के काटने के 25 और बिल्ली के काटने के 9 मामले भी दर्ज हैं। चिकित्सकों के अनुसार जानवर के काटने के बाद समय पर उपचार और वैक्सीनेशन बेहद जरूरी है।
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चार माह से ठेका प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार
शहर में आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नगर परिषद की ओर से कुत्तों को पकड़कर उनका टीकाकरण और बधियाकरण कराने की प्रक्रिया शुरू की गई थी लेकिन ठेका रेट पर सहमति और मंजूरी के स्तर पर मामला करीब चार माह से अटका हुआ है।
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पालतू कुत्तों का रिकॉर्ड नहीं, जिम्मेदारी तय करना मुश्किल
शहर में पालतू कुत्तों के पंजीकरण की व्यवस्था होने के बावजूद नगर परिषद के रिकॉर्ड में कोई पंजीकृत पालतू कुत्ता नहीं है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि शहर में कितने पालतू कुत्ते हैं। उनके टीकाकरण की स्थिति क्या है और नियमों का पालन कौन कर रहा है। पालतू कुत्तों के काटने की घटनाओं की स्थिति में भी उनके मालिकों तक पहुंचना चुनौती बन सकता है।
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समय पर वैक्सीनेशन नहीं हुआ तो जान पर बन सकती है
चिकित्सकों के अनुसार रेबीज बेहद गंभीर बीमारी है। जानवर के काटने के बाद घाव को तत्काल साफ करने और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एंटी रेबीज वैक्सीनेशन कराने की जरूरत होती है। बीमारी के लक्षण सामने आने के बाद स्थिति गंभीर हो सकती है। रेबीज के संभावित लक्षणों में थकान, मांसपेशियों में दर्द, बेचैनी, असामान्य व्यवहार और पानी या हवा से डर जैसे लक्षण शामिल हैं।

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कुत्ते या किसी अन्य जानवर के काटने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए। काटने के बाद तुरंत अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार टीकाकरण करवाना चाहिए। नागरिक अस्पताल में फिलहाल एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध है।
-डॉ. मनीष टुटेजा, नागरिक अस्पताल।
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