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अफगानी प्याज आने से 40 रुपये प्रति किलो गिरी दर
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रेहड़ी पर रखे अफगानिस्तानी प्याज।
- फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। फतेहाबाद की सब्जी मंडी में अफगानिस्तानी प्याज आने के बाद प्याज की दरों में थोड़ी गिरावट आई है। हालांकि अब भी प्याज 90 रुपये प्रति किलो से कम नहीं हो पाया, लेकिन अफगानी प्याज आने के बाद प्याज की दरों में 40 रुपये प्रति किलो की गिरावट आ गई है। पहले यह दरें 130 रुपये प्रति किलो थी। खास बात यह है कि अफगानिस्तानी प्याज के भाव 50 से 60 रुपये किलो ही है, लेकिन प्याज में गुणवत्ता न होने से यह लोगों को पसंद नहीं आ रहा।
पिछले दिनों फतेहाबाद की सब्जी मंडी में प्याज के दाम 130 रुपये प्रति किलो चल रहे थे। सरकार ने अफगानिस्तान से प्याज का आयात किया। इसके यहां आने पर लोकल प्याज की दरें 130 से गिरकर 90 रुपये प्रति किलो रह गई। जबकि अफगानी प्याज की कीमत अभी भी 50 रुपये के करीब है। साइज में बड़ा होने तथा बेस्वाद होने के कारण यह लोगों को पसंद नहीं आ रहा।
सब्जी विक्रेता यूनियन के प्रधान सुभाष शर्मा स्वयं बताते है कि अफगानिस्तानी प्याज जहां देखने में सुंदर है और उसका साइज भी बड़ा है, लेकिन यह इंडियन प्याज की तरह स्वाद नहीं है। गृहणियों का कहना है कि इस प्याज से सब्जी में तड़का बढ़िया नहीं लगता और यह खाने में भी स्वाद नहीं है। रेहड़ियों पर भी अफगानिस्तानी प्याज की मांग न के बराबर है, लेकिन यह हर किसी को आकर्षित जरूर करता है। रेहड़ी चालकों का कहना है कि जितना प्याज उन्होंने खरीदा है, तीन चार दिन होने के बाद भी यह 40 फीसदी ही बिका है। कुल मिलाकर अफगानिस्तानी प्याज हमारे लोगों को रास नहीं आया है, लेकिन इसने प्याज की कीमत जरूर कम कर दी है।
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पिछले दिनों फतेहाबाद की सब्जी मंडी में प्याज के दाम 130 रुपये प्रति किलो चल रहे थे। सरकार ने अफगानिस्तान से प्याज का आयात किया। इसके यहां आने पर लोकल प्याज की दरें 130 से गिरकर 90 रुपये प्रति किलो रह गई। जबकि अफगानी प्याज की कीमत अभी भी 50 रुपये के करीब है। साइज में बड़ा होने तथा बेस्वाद होने के कारण यह लोगों को पसंद नहीं आ रहा।
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सब्जी विक्रेता यूनियन के प्रधान सुभाष शर्मा स्वयं बताते है कि अफगानिस्तानी प्याज जहां देखने में सुंदर है और उसका साइज भी बड़ा है, लेकिन यह इंडियन प्याज की तरह स्वाद नहीं है। गृहणियों का कहना है कि इस प्याज से सब्जी में तड़का बढ़िया नहीं लगता और यह खाने में भी स्वाद नहीं है। रेहड़ियों पर भी अफगानिस्तानी प्याज की मांग न के बराबर है, लेकिन यह हर किसी को आकर्षित जरूर करता है। रेहड़ी चालकों का कहना है कि जितना प्याज उन्होंने खरीदा है, तीन चार दिन होने के बाद भी यह 40 फीसदी ही बिका है। कुल मिलाकर अफगानिस्तानी प्याज हमारे लोगों को रास नहीं आया है, लेकिन इसने प्याज की कीमत जरूर कम कर दी है।
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