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Fatehabad News: बच्चे की हालत बिगड़ने पर नहीं दिया एडरनालाइन इंजेक्शन, न पॉलीक्लीनिक में एंबुलेंस मिली

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 03 May 2023 11:24 PM IST
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Adrenaline injection was not given when the child's condition worsened, neither an ambulance was found in the polyclinic
फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में बच्चे की मौत के बाद विलाप करते हुए परिजन।
फतेहाबाद। दंपती के जीवन में 17 साल बाद जो खुशियां आई थी वह छोटी सी लापरवाही से मिनटों में खत्म हो गई। टीकाकरण के बाद बच्चे की मौत को लेकर पॉलीक्लीनिक स्टाफ की लापरवाही भी सामने आई है। टीकाकरण के बाद बच्चे की हालत बिगड़ने पर उसे एडरनालाइन इंजेक्शन नहीं दिया गया और न ही पॉलीक्लीनिक में एंबुलेंस सुविधा ही मिली। हालांकि जांच कमेटी ने डॉक्टर और स्टाफ की लापरवाही मानी है।
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बता दें कि जबकि टीकाकरण के बाद बच्चे को होने वाले दुष्प्रभाव से बचाने के लिए एडरनालाइन इंजेक्शन दिया जाता है। लेकिन बावजूद इसके टीकाकरण करने वाले स्टाफ ने इंजेक्शन नहीं दिया। हालत बिगड़ने पर बच्चे को रेफर कर दिया गया लेकिन एंबुलेंस सुविधा नहीं दी गई। जबकि बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। एंबुलेंस न मिलने पर परिजन अपनी गाड़ी में नागरिक अस्पताल की नर्सरी में लेकर पहुंचे। लेकिन यहां पर उपचार के दौरान ही मौत हो गई। अगर बच्चे को समय पर इमरजेंसी इंजेक्शन और एंबुलेंस सुविधा मिल जाती तो जान बच सकती थी।
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टीकाकरण के लिए सिरसा से बच्चे को लाए थे परिजन
ढाई साल का कबीर सिरसा जिले में अपनी नानी के घर गया हुआ था। टीकाकरण के लिए ही परिजन मंगलवार को लेकर आए थे और बुधवार सुबह हुडा सेक्टर के पॉलीक्लीनिक में पहुंचे।
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जांच कमेटी ने मानी डॉक्टर और स्टाफ की लापरवाही

बच्चे की मौत के बाद सिविल सर्जन ने दो डॉक्टरों की कमेटी गठित की थी। कमेटी ने बुधवार देर शाम को जांच रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट में कमेटी ने भी माना है कि टीकाकरण के बाद डयूटी पर मौजूद डॉक्टर और स्टाफ की लापरवाही रही है। बच्चे को एडरनालाइन इंजेक्शन नहीं दिया गया और न ही अन्य उपचार दिया गया। बच्चे को एंबुलेंस में रेफर नहीं किया गया। परिवार के लोग खुद की गाड़ी में अस्पताल लेकर गए। इसके अलावा टीकाकरण के बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर एसएमओ को भी सूचित नहीं किया गया।

बच्चे का जन्म के बाद ये होता है टीकाकरण शुरू
जन्म के समय : बीसीजी, ओपीवी, हेपेटाइटिस बी,
छह सप्ताह पर : ओपीवी पहली, पेंटावेलेंट पहली, आइपीवी पहली, रोटा पहली और पीसीवी पहली डोज
10 सप्ताह पर : ओपीवी दूसरी, पेंटावेलेंट और रोटा की दूसरी डोज
14 सप्ताह पर : ओपीवी तीसरी, पेंटावेलेंट तीसरी, आईपीवी, रोटा तीसरी और पीसीवी दूसरी डोज
9 से 12 माह : एमआर पहली डोज, पीसीवी बूस्टर, जेई
16 से 24 माह : एमआर दूसरी डोज, डीपीटी बी, ओपीवी बी, जेई
5 से 6 साल : डीपीटी बूस्टर डोज
10 साल : टीडी
16 साल : टीडी
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