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Fatehabad News: गांव हसंगा में हंगामे के बीच प्रशासन ने खाली करवाई 11 कनाल 15 मरले जमीन
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भूना। गांव हसंगा में वीरवार को अदालत के आदेश पर प्रशासनिक अधिकारियों ने भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में लोगों के विरोध के बीच 11 कनाल 15 मरले जमीन से कब्जा खाली करवा लिया। विवादित जमीन में बिजी गई मूंग की लाखों रुपये की फसल को ट्रैक्टर व रोटावेटर की मदद से मिट्टी में रौंद दिया गया। ड्यूटी मजिस्ट्रेट एवं नायब तहसीलदार अचीन, कानूनगो पृथ्वीराज, पटवारी सुरेंद्र और थानाध्यक्ष अनूप कुमार के नेतृत्व में कार्रवाई की गई।
जमीन के पहले मालिक बद्री प्रसाद शर्मा, भादर सिंह, नरेश कुमार व सतपाल शर्मा तथा महेंद्र शर्मा के समर्थन में गांव के कई महिला व पुरुषों ने प्रशासनिक कार्रवाई का खुलकर विरोध किया। मूंग की खेती में जैसे ही ट्रैक्टर को चलाने की कार्रवाई शुरू की गई तो विरोध में महिलाएं ट्रैक्टर के आगे लेट गईं। मगर पुलिसकर्मियों ने उन्हें ट्रैक्टर के आगे से उठाकर कुछ देर के लिए हिरासत में लेकर पुलिस बस में बिठाए रखा। पीड़ित महेंद्र शर्मा ने बताया कि हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है और आगामी 4 जुलाई को दोनों पक्षों को तलब किया हुआ है। परंतु प्रशासनिक अधिकारियों ने गलत तरीके से उनकी जमीन को छीन लिया है।
जमीन का कब्जा देने से पहले निशानदेही नहीं हुई और न ही कच्ची फसल का मुआवजा तय हुआ
गांव हसंगा निवासी महेंद्र शर्मा व उसके चार चचेरे भाई बद्री प्रसाद, भादर सिंह, नरेश शर्मा व सतपाल शर्मा आदि ने आरोप लगाया कि नायब तहसीलदार के सामने न्याय के लिए गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि कब्जा दिलाने से पहले प्रशासनिक स्तर पर कोई भी निशानदेही या विवादित जमीन को नापा नहीं गया। इसके अतिरिक्त कब्जा खाली करने से संबंधित पहले कोई भी नोटिस नहीं दिया गया। जल्दबाजी में मैना पत्नी रामनिवास धौलू को 11 कनाल 15 मरले जमीन पर कब्जा दिला दिया। कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कच्ची फसल का नुकसान करने से पहले मुआवजे को निर्धारित करना होता है, मगर ऐसा नहीं किया गया और धक्केशाही से मूंग की फसल को तबाह कर दिया। इसलिए नायब तहसीलदार व संबंधित कानूनों तथा पटवारी के खिलाफ न्यायालय में चुनौती देंगे।
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लाठी के बल पर गरीब के साथ अन्याय हुआ
पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश मंडा, ब्लॉक अध्यक्ष कमल बराड़, सरपंच वकील सहारण, जिला पार्षद प्रतिनिधि बंटी सिहाग, पूर्व सरपंच सुरेंद्र लांबा, पूर्व सरपंच सतबीर टांडी, पंचायत समिति सदस्य कमला देवी, किसान नेता सुरेश लाखलान, रामकिशन जेवलिया आदि ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने लाठी के बल पर गरीब परिवार की रोजी-रोटी को छीनकर दूसरे को दे दी है। शर्मा परिवार के साथ अन्याय किया गया है। इनकी पुश्तैनी जमीन होने के साथ-साथ मालिकाना हक और 80 वर्षों से गिरदावरी इनके नाम चली आ रही है। परंतु दो सौ लोगों की साझी खेवट में तक्सीम होना और एक व्यक्ति विशेष को खास किले नंबर देना सवालों के घेरे में है। वहीं, दूसरे पक्ष के मैना व रामनिवास ने बताया कि उपरोक्त जमीन में उनके बुजुर्गों का मालिकाना हक था। बंटवारे के दौरान तक्सीम में 11 कनाल 15 मरले खास किला नंबर से मैना के नाम हुई थी, जिस पर कब्जा लिया गया है।
कोट
अदालत के आदेश पर 11 कनाल 15 मरले जमीन का कब्जा मैना पत्नी रामनिवास को दिलाया है। कुछ लोगों ने विरोध की कोशिश की तो पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बनाकर कार्रवाई को अंजाम दिया। नोटिस व निशानदेही सब कुछ कानून अनुसार हुआ है। जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वह निराधार हैं।
-अचीन, नायब तहसीलदार, भूना
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जमीन के पहले मालिक बद्री प्रसाद शर्मा, भादर सिंह, नरेश कुमार व सतपाल शर्मा तथा महेंद्र शर्मा के समर्थन में गांव के कई महिला व पुरुषों ने प्रशासनिक कार्रवाई का खुलकर विरोध किया। मूंग की खेती में जैसे ही ट्रैक्टर को चलाने की कार्रवाई शुरू की गई तो विरोध में महिलाएं ट्रैक्टर के आगे लेट गईं। मगर पुलिसकर्मियों ने उन्हें ट्रैक्टर के आगे से उठाकर कुछ देर के लिए हिरासत में लेकर पुलिस बस में बिठाए रखा। पीड़ित महेंद्र शर्मा ने बताया कि हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है और आगामी 4 जुलाई को दोनों पक्षों को तलब किया हुआ है। परंतु प्रशासनिक अधिकारियों ने गलत तरीके से उनकी जमीन को छीन लिया है।
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जमीन का कब्जा देने से पहले निशानदेही नहीं हुई और न ही कच्ची फसल का मुआवजा तय हुआ
गांव हसंगा निवासी महेंद्र शर्मा व उसके चार चचेरे भाई बद्री प्रसाद, भादर सिंह, नरेश शर्मा व सतपाल शर्मा आदि ने आरोप लगाया कि नायब तहसीलदार के सामने न्याय के लिए गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि कब्जा दिलाने से पहले प्रशासनिक स्तर पर कोई भी निशानदेही या विवादित जमीन को नापा नहीं गया। इसके अतिरिक्त कब्जा खाली करने से संबंधित पहले कोई भी नोटिस नहीं दिया गया। जल्दबाजी में मैना पत्नी रामनिवास धौलू को 11 कनाल 15 मरले जमीन पर कब्जा दिला दिया। कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कच्ची फसल का नुकसान करने से पहले मुआवजे को निर्धारित करना होता है, मगर ऐसा नहीं किया गया और धक्केशाही से मूंग की फसल को तबाह कर दिया। इसलिए नायब तहसीलदार व संबंधित कानूनों तथा पटवारी के खिलाफ न्यायालय में चुनौती देंगे।
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लाठी के बल पर गरीब के साथ अन्याय हुआ
पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश मंडा, ब्लॉक अध्यक्ष कमल बराड़, सरपंच वकील सहारण, जिला पार्षद प्रतिनिधि बंटी सिहाग, पूर्व सरपंच सुरेंद्र लांबा, पूर्व सरपंच सतबीर टांडी, पंचायत समिति सदस्य कमला देवी, किसान नेता सुरेश लाखलान, रामकिशन जेवलिया आदि ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने लाठी के बल पर गरीब परिवार की रोजी-रोटी को छीनकर दूसरे को दे दी है। शर्मा परिवार के साथ अन्याय किया गया है। इनकी पुश्तैनी जमीन होने के साथ-साथ मालिकाना हक और 80 वर्षों से गिरदावरी इनके नाम चली आ रही है। परंतु दो सौ लोगों की साझी खेवट में तक्सीम होना और एक व्यक्ति विशेष को खास किले नंबर देना सवालों के घेरे में है। वहीं, दूसरे पक्ष के मैना व रामनिवास ने बताया कि उपरोक्त जमीन में उनके बुजुर्गों का मालिकाना हक था। बंटवारे के दौरान तक्सीम में 11 कनाल 15 मरले खास किला नंबर से मैना के नाम हुई थी, जिस पर कब्जा लिया गया है।
कोट
अदालत के आदेश पर 11 कनाल 15 मरले जमीन का कब्जा मैना पत्नी रामनिवास को दिलाया है। कुछ लोगों ने विरोध की कोशिश की तो पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बनाकर कार्रवाई को अंजाम दिया। नोटिस व निशानदेही सब कुछ कानून अनुसार हुआ है। जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वह निराधार हैं।
-अचीन, नायब तहसीलदार, भूना