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Fatehabad News: जिले में 25 हजार एकड़ रकबा अब भी नहरी पानी से वंचित
Sat, 22 Aug 2026 10:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 22 Aug 2026 10:51 PM IST
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गांव मेहूवाला की बारानी जमीन जहां तक नहीं पहुंच पाया नहरी पानी। संवाद
फतेहाबाद। जिले में घग्घर नदी और यमुना नहर की विभिन्न शाखाएं होने के बावजूद करीब 25 हजार एकड़ रकबा अब भी नहरी पानी से वंचित है। किसान सिंचाई के लिए बारिश और ट्यूबवेल पर निर्भर हैं। हर खेत तक नहरी पानी पहुंचाने का लक्ष्य अभी अधूरा है।
नहरी पानी नहीं पहुंचने से यह रकबा बरानी बना हुआ है। बारिश होने पर ही किसान फसल ले पाते हैं। बारिश कम होने पर फसल उत्पादन प्रभावित होता है। इससे किसानों को सिंचाई के लिए ट्यूबवेल पर निर्भर रहना पड़ता है।
पिछले दो वर्षों में जिले में करीब चार हजार एकड़ बरानी रकबे को नहरी क्षेत्र में बदला गया है। इसमें सबसे अधिक रकबा खेड़ी डिस्ट्रीब्यूटरी का है। वहीं मोहम्मदपुर डिस्ट्रीब्यूटरी में सबसे कम बरानी रकबा नहरी किया गया है।
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किसानों का कहना है कि जिले में नहरों का नेटवर्क होने के बावजूद हजारों एकड़ जमीन तक पानी नहीं पहुंच रहा है। नहरी सिंचाई की सुविधा मिलने से किसानों की ट्यूबवेल पर निर्भरता घट सकती है। साथ ही बारिश पर आधारित खेती का जोखिम भी कम होगा।
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राजस्थान व पंजाब सीमा से सटे गांवों का है ज्यादातर रकबा
सिंचाई विभाग के अनुसार बारानी रकबे में कुछ जमीन पंचायती है तो ज्यादातर रकबा राजस्थान और पंजाब की सीमा से सटे गांवों का है। खेड़ी डिस्ट्रीब्यूटरी में भट्टू क्षेत्र के गांव भट्टू, दैयड़, जांडवाला बागड़, रामसरा और ढाबी कलां शामिल हैं जबकि मोहम्मदपुर डिस्ट्रीब्यूटरी में रतिया क्षेत्र का रकबा शामिल है। इन गांवों के किसानों ने उम्मीद जताई है कि एक दिन बरानी रकबे तक नहरी पानी पहुंचेगा और उनके खेत भी फसलों से लहलहाएंगे।
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नहर की सीमा पर लगते खेत भी सूखे
भट्टू क्षेत्र के गांव मेहूवाला और बनमंदोरी के किसान श्रवण कुमार, संदीप, अनिल और सुरेश कुमार ने बताया कि उनके खेत नहर की पटरी को छूते हैं लेकिन सिंचाई विभाग की ओर से उनके लिए फिर भी उनके खेतों काे नहरी पानी नहीं मिल सका है। इसके लिए उन्होंने कई बार सिंचाई विभाग के अधिकारियों और नेताओं से बातचीत की है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। सिंचाई के पानी की कमी के चलते उन्हें ट्यूबवेलों से सिंचाई करनी पड़ रही है। अगर नहर का पानी खेतों को मिल जाए तो वह भी अच्छी फसलें लेकर अपना जीवन यापन और बेहतर तरीके से कर सकते हैं।
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:: जिले के लगभग हर खंड में कुछ जमीन बारानी है। सिंचाई विभाग के पास जैसे ही जमीन का अनकमांड से कमांड होने की फाइल आती है तो उसकी जांच करके तुरंत आगामी कार्रवाई शुरू दी जाती है। हर साल हजारों एकड़ जमीन को बरानी से नहरी बनाया जा रहा है।
- नरेश कुमार भोला, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई एवं जलसंसाधन विभाग, फतेहाबाद।
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नहरी पानी नहीं पहुंचने से यह रकबा बरानी बना हुआ है। बारिश होने पर ही किसान फसल ले पाते हैं। बारिश कम होने पर फसल उत्पादन प्रभावित होता है। इससे किसानों को सिंचाई के लिए ट्यूबवेल पर निर्भर रहना पड़ता है।
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पिछले दो वर्षों में जिले में करीब चार हजार एकड़ बरानी रकबे को नहरी क्षेत्र में बदला गया है। इसमें सबसे अधिक रकबा खेड़ी डिस्ट्रीब्यूटरी का है। वहीं मोहम्मदपुर डिस्ट्रीब्यूटरी में सबसे कम बरानी रकबा नहरी किया गया है।
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किसानों का कहना है कि जिले में नहरों का नेटवर्क होने के बावजूद हजारों एकड़ जमीन तक पानी नहीं पहुंच रहा है। नहरी सिंचाई की सुविधा मिलने से किसानों की ट्यूबवेल पर निर्भरता घट सकती है। साथ ही बारिश पर आधारित खेती का जोखिम भी कम होगा।
राजस्थान व पंजाब सीमा से सटे गांवों का है ज्यादातर रकबा
सिंचाई विभाग के अनुसार बारानी रकबे में कुछ जमीन पंचायती है तो ज्यादातर रकबा राजस्थान और पंजाब की सीमा से सटे गांवों का है। खेड़ी डिस्ट्रीब्यूटरी में भट्टू क्षेत्र के गांव भट्टू, दैयड़, जांडवाला बागड़, रामसरा और ढाबी कलां शामिल हैं जबकि मोहम्मदपुर डिस्ट्रीब्यूटरी में रतिया क्षेत्र का रकबा शामिल है। इन गांवों के किसानों ने उम्मीद जताई है कि एक दिन बरानी रकबे तक नहरी पानी पहुंचेगा और उनके खेत भी फसलों से लहलहाएंगे।
नहर की सीमा पर लगते खेत भी सूखे
भट्टू क्षेत्र के गांव मेहूवाला और बनमंदोरी के किसान श्रवण कुमार, संदीप, अनिल और सुरेश कुमार ने बताया कि उनके खेत नहर की पटरी को छूते हैं लेकिन सिंचाई विभाग की ओर से उनके लिए फिर भी उनके खेतों काे नहरी पानी नहीं मिल सका है। इसके लिए उन्होंने कई बार सिंचाई विभाग के अधिकारियों और नेताओं से बातचीत की है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। सिंचाई के पानी की कमी के चलते उन्हें ट्यूबवेलों से सिंचाई करनी पड़ रही है। अगर नहर का पानी खेतों को मिल जाए तो वह भी अच्छी फसलें लेकर अपना जीवन यापन और बेहतर तरीके से कर सकते हैं।
:: जिले के लगभग हर खंड में कुछ जमीन बारानी है। सिंचाई विभाग के पास जैसे ही जमीन का अनकमांड से कमांड होने की फाइल आती है तो उसकी जांच करके तुरंत आगामी कार्रवाई शुरू दी जाती है। हर साल हजारों एकड़ जमीन को बरानी से नहरी बनाया जा रहा है।
- नरेश कुमार भोला, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई एवं जलसंसाधन विभाग, फतेहाबाद।