{"_id":"5b6de56e4f1c1b827d8b7b82","slug":"61533928814-fatehabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रकारी नौकरी दिलवाने के नाम पर हड़पे थे 24 लाख रूपये, दो दोषियों को तीन-तीन साल की कैद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रकारी नौकरी दिलवाने के नाम पर हड़पे थे 24 लाख रूपये, दो दोषियों को तीन-तीन साल की कैद
Updated Sat, 11 Aug 2018 12:50 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। सरकारी नौकरी लगवाने के बदले पैसे मांगने के एक मामले में दो आरोपियों को अदालत ने दोषी करार देते हुए 3-3 साल की कैद व सात-सात हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। मामला 2012 का है।
मिली जानकारी के मुताबिक बोसवाल निवासी नंदलाल की शिकायत पर भूना पुलिस ने 13 मई 2012 को भूना निवासी अजीत सिंह, जींद के मनोहर पुर निवासी संदीप रेहड़ू व मोती लाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 406, 420 व 120बी के तहत मामला दर्ज किया था। इस मामले में एक अन्य आरोपी अजमेर सिंह रेहड़ू को तत्कालीन डीएसपी दिलबाग सिंह ने जांच के दौरान बेकसूर पाया था। वहीं मोतीलाल पीओ घोषित हो गया था।
पुलिस को दी गई शिकायत में नंद लाल ने बताया कि आरोपियों ने किसी सरकारी विभाग में या आईटीबीपी मिल्ट्री फोर्स में नौकरी दिलाने के नाम पर जनवरी 2010 में 24 लाख रुपये लिए थे, लेकिन न तो आरोपियों ने उसे नौकरी दिलवाई और ना ही उसकी दी हुई 24 लाख की राशि वापस की। शुक्रवार को न्यायिक दंडाधिकारी जतिन गर्ग की अदालत ने अजीत सिंह व संदीप रेहडू को सजा सुनाई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
फतेहाबाद। सरकारी नौकरी लगवाने के बदले पैसे मांगने के एक मामले में दो आरोपियों को अदालत ने दोषी करार देते हुए 3-3 साल की कैद व सात-सात हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। मामला 2012 का है।
मिली जानकारी के मुताबिक बोसवाल निवासी नंदलाल की शिकायत पर भूना पुलिस ने 13 मई 2012 को भूना निवासी अजीत सिंह, जींद के मनोहर पुर निवासी संदीप रेहड़ू व मोती लाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 406, 420 व 120बी के तहत मामला दर्ज किया था। इस मामले में एक अन्य आरोपी अजमेर सिंह रेहड़ू को तत्कालीन डीएसपी दिलबाग सिंह ने जांच के दौरान बेकसूर पाया था। वहीं मोतीलाल पीओ घोषित हो गया था।
विज्ञापन
पुलिस को दी गई शिकायत में नंद लाल ने बताया कि आरोपियों ने किसी सरकारी विभाग में या आईटीबीपी मिल्ट्री फोर्स में नौकरी दिलाने के नाम पर जनवरी 2010 में 24 लाख रुपये लिए थे, लेकिन न तो आरोपियों ने उसे नौकरी दिलवाई और ना ही उसकी दी हुई 24 लाख की राशि वापस की। शुक्रवार को न्यायिक दंडाधिकारी जतिन गर्ग की अदालत ने अजीत सिंह व संदीप रेहडू को सजा सुनाई है।
विज्ञापन