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जाखल के सरकारी अस्पताल में नहीं खून जांच की पूरी सुविधा
Updated Sun, 18 Jun 2017 07:07 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
जाखल। भले ही करोड़ों की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण किया हुआ है लेकिन इसके बावजूद यहां पर आने वाले मरीजों को अत्याधिक जरूरी माने जाने वाले बायो केमिस्ट्री के टेस्ट की सुविधा न मिलने से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान समय में अति जरूरी माने जाने वाले इन बायो केमिस्ट्री टेस्ट के लिए मरीजों को अस्पताल से बाहर खुली निजी लेबोरेट्रियों की शरण लेनी पड़ रही है। इसमें उनसे मुंह मांगे दाम वसूल जा रहे हैं। ऐसे में मरीजों को अन्य परेशानियों के साथ साथ आर्थिक रूप से भी चूना लग रहा है। हालांकि अस्पताल में लेबोरेट्री होते हुए नियमित टेस्ट की सुविधा तो उपलब्ध है लेकिन ब्लड यूरिया, यूरिक एसिड, क्रिटनिन, कॉलेस्ट्राल, बिल्लिरूबीन, एसजीओटी, एसजीपीटी इत्यादि कई अत्याधिक महत्वपूर्ण टेस्ट नहीं होते हैं। बताया जाता है कि ब्लड यूरिया टेस्ट गुर्दों की बीमारी का पता लगाने, यूरिक एसिड सामान्य बॉय का दर्द का कारण जानने, क्रिटनिन किड़नी की बीमारी जांचने के लिए, कोलेस्ट्रोल व एसजीओटी, एसजीपीटी के टेस्ट हार्ट की बीमारी को जांचने जबकि बिल्लिरूबीन पीलिया की बीमारी का पता लगने के लिए कराए जाते हैं। आम तौर पर यह टेस्ट अब हर मरीज के करवाए जाने लगे हैं। सामान्य स्तर पर देखा जाए तो इन बीमारियों के अनेक लोग पीड़ित हैं जिन्हें समय पर जांच इत्यादि की सुविधा न मिलने के कारण निजी लेबोरेट्रियों में सैंकड़ों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
जिसका कारण यह है कि इन टेस्टों के लिए एक मशीन होनी जरूरी है। एनालाइजर नामक मशीन करीब 3 लाख रुपये की है लेकिन अस्पताल में इस मशीन के अभाव के कारण यह टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं। लेबोरेट्री टैकनिशियनों की मानें तो हालांकि इन टेस्टों को मैनुअल तरीके से भी किया जा सकता है लेकिन मैनुअल तरीके से किए गए टेस्टों की जहां लागत अत्याधिक होती है वहीं समय भी काफी ज्यादा लगता है। अगर यह मशीन उपलब्ध हो तो इन टेस्टों की भी सुविधा उपलब्ध हो सकती है।
निजी लेबोरेट्री संचालक उठा रहे हैं लाभ
विभागीय एवं सरकार की इस अनदेखी का लाभ निजी लेबोरेट्री संचालक खूब लाभ उठा रहे हैं। जाखल में कुकरमुत्तों की खुली आधा दर्जन से भी अधिक लेबोरेट्रियां मरीजों से मनमाने दाम वसूल कर यह सुविधा दे रही हैं। जबकि मरीज भी मजबूरी में इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
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टोहाना में आई मशीन, जाखल में आनी बाकी
सरकारी अस्पताल के अतिरिक्त वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. एचएस सागु ने कहा कि बायो केमिस्ट्री टेस्ट के लिए एनालाइजर मशीन की मांग विभाग से कर रखी है। टोहाना में तो यह मशीन आ चुकी है लेकिन जाखल में आनी बाकी है। जल्द ही इसके बारे में पता लगाकर प्राथमिकता पर इसे लगवाने का प्रबंध करेंगे।
सरकारी अस्पताल में नहीं खून जांच की पूरी सुविधा
लोगों की मजबूरी का खूब लाभ उठा रहे हैं निजी लेबोरेट्री संचालक
14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन जहां लोगों को खून जांच की पूरी सुविधा भी नहीं मिल पा रही।
जाखल। भले ही करोड़ों की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण किया हुआ है लेकिन इसके बावजूद यहां पर आने वाले मरीजों को अत्याधिक जरूरी माने जाने वाले बायो केमिस्ट्री के टेस्ट की सुविधा न मिलने से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान समय में अति जरूरी माने जाने वाले इन बायो केमिस्ट्री टेस्ट के लिए मरीजों को अस्पताल से बाहर खुली निजी लेबोरेट्रियों की शरण लेनी पड़ रही है। इसमें उनसे मुंह मांगे दाम वसूल जा रहे हैं। ऐसे में मरीजों को अन्य परेशानियों के साथ साथ आर्थिक रूप से भी चूना लग रहा है। हालांकि अस्पताल में लेबोरेट्री होते हुए नियमित टेस्ट की सुविधा तो उपलब्ध है लेकिन ब्लड यूरिया, यूरिक एसिड, क्रिटनिन, कॉलेस्ट्राल, बिल्लिरूबीन, एसजीओटी, एसजीपीटी इत्यादि कई अत्याधिक महत्वपूर्ण टेस्ट नहीं होते हैं। बताया जाता है कि ब्लड यूरिया टेस्ट गुर्दों की बीमारी का पता लगाने, यूरिक एसिड सामान्य बॉय का दर्द का कारण जानने, क्रिटनिन किड़नी की बीमारी जांचने के लिए, कोलेस्ट्रोल व एसजीओटी, एसजीपीटी के टेस्ट हार्ट की बीमारी को जांचने जबकि बिल्लिरूबीन पीलिया की बीमारी का पता लगने के लिए कराए जाते हैं। आम तौर पर यह टेस्ट अब हर मरीज के करवाए जाने लगे हैं। सामान्य स्तर पर देखा जाए तो इन बीमारियों के अनेक लोग पीड़ित हैं जिन्हें समय पर जांच इत्यादि की सुविधा न मिलने के कारण निजी लेबोरेट्रियों में सैंकड़ों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
जिसका कारण यह है कि इन टेस्टों के लिए एक मशीन होनी जरूरी है। एनालाइजर नामक मशीन करीब 3 लाख रुपये की है लेकिन अस्पताल में इस मशीन के अभाव के कारण यह टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं। लेबोरेट्री टैकनिशियनों की मानें तो हालांकि इन टेस्टों को मैनुअल तरीके से भी किया जा सकता है लेकिन मैनुअल तरीके से किए गए टेस्टों की जहां लागत अत्याधिक होती है वहीं समय भी काफी ज्यादा लगता है। अगर यह मशीन उपलब्ध हो तो इन टेस्टों की भी सुविधा उपलब्ध हो सकती है।
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निजी लेबोरेट्री संचालक उठा रहे हैं लाभ
विभागीय एवं सरकार की इस अनदेखी का लाभ निजी लेबोरेट्री संचालक खूब लाभ उठा रहे हैं। जाखल में कुकरमुत्तों की खुली आधा दर्जन से भी अधिक लेबोरेट्रियां मरीजों से मनमाने दाम वसूल कर यह सुविधा दे रही हैं। जबकि मरीज भी मजबूरी में इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
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टोहाना में आई मशीन, जाखल में आनी बाकी
सरकारी अस्पताल के अतिरिक्त वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. एचएस सागु ने कहा कि बायो केमिस्ट्री टेस्ट के लिए एनालाइजर मशीन की मांग विभाग से कर रखी है। टोहाना में तो यह मशीन आ चुकी है लेकिन जाखल में आनी बाकी है। जल्द ही इसके बारे में पता लगाकर प्राथमिकता पर इसे लगवाने का प्रबंध करेंगे।
सरकारी अस्पताल में नहीं खून जांच की पूरी सुविधा
लोगों की मजबूरी का खूब लाभ उठा रहे हैं निजी लेबोरेट्री संचालक
14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन जहां लोगों को खून जांच की पूरी सुविधा भी नहीं मिल पा रही।