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हरियाणा के इन जिलों में आवारा कुत्तों के काटने से 361 काले हिरणों की हुई मौत, पढ़ें- चौंकाने वाले आंकड़े

Mon, 11 Jan 2021 10:08 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहाबाद (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहाबाद (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Mon, 11 Jan 2021 10:08 PM IST
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361 Black deer killed by stray dogs in Hisar division Of Haryana
काला हिरण। - फोटो : अमर उजाला

हरियाणा के हिसार मंडल के चार जिलों हिसार, फतेहाबाद, सिरसा व भिवानी में पांच साल में हुई वन्यजीवों की मौत का बड़ा कारण आवारा कुत्तों का काटना रहा। 411 काले हिरणों में से 361 की मौत आवारा कुत्तों के काटने से हुई है। यह चौंकाने वाला आंकड़ा बड़ोपल निवासी विनोद कड़वासरा की ओर से मांगी गई आरटीआई के जवाब में सामने आया है। 

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रिकॉर्ड के मुताबिक इन चार जिलों में कुल 411 काले हिरण, 68 मोर, 35 चिंकारा हिरण, 74 बंदर, 2005 नीलगाय और 89 अन्य वन्यजीव मौत का शिकार हुए हैं। इनमें 361 काला हिरणों की मौत आवारा कुत्तों से काटने के अलावा चार काले हिरणों का शिकार किया गया है। जबकि 23 बीमारी से और 23 सड़क दुर्घटना या ब्लेड वाले तारों के कारण मौत हुई है। 68 राष्ट्रीय पक्षी मोर में से 25 मोर आवारा कुत्तों के काटने से मरे हैं। 12 मोर का शिकार हुआ है या जहरीले दाने खाने से मरे हैं। 23 मोर बीमारी से और 08 अन्य कारणों से मरे हैं।
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दुर्लभ प्रजाति के 29 चिंकारा हिरणों को काट गए कुत्ते
35 चिंकारा हिरणों में से 29 आवारा कुत्तों के काटने से मरे हैं। दो हिरणों का शिकार हुआ है जबकि चार बीमारी से मरे हैं। कुल 74 बंदरों में से 35 बंदर आवारा कुत्तों के काटने से मरे हैं। तीन बंदरों का शिकार हुआ है। तीन बीमारी से और 33 आपसी लड़ाई या करंट जैसे अन्य कारणों से मरे हैं।

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2005 में से 1641 नीलगायों को कुत्तों ने काटा, 46 का हुआ शिकार
इसके अलावा 2005 नीलगायों में से 1641 नीलगाय आवारा कुत्तों के काटने से मौत का शिकार हुए हैं। 46 नीलगायों का शिकार हुआ है। 31 बीमारी से और 287 रोड दुर्घटना या ब्लेड वाले तारों से मरे हैं। कुछ अन्य वन्य जीव भी मरे हैं, जिनकी संख्या 89 हैं। इनमें से 53 का इंसानों द्वारा शिकार किया गया है।
 

  • वन्य प्राणी    काला हिरण - मोर - चिंकारा   बंदर   नीलगाय   अन्य जीव
  • कुत्तों द्वारा         361        25     29      35      1641          14
  • शिकार -                04        12     02       03       46             53
  • बीमारी -                23        23      04      03       31             07
  • अन्य कारण -         23        08       0       33        287         15
  • कुल -                   411       68      35      74      2005          89

- यह है हिसार मंडल में पशुओं की मौत व कारणों का आंकड़ा


प्राथमिक समस्या कुत्ते नहीं है, बल्कि ब्लेड वाले तार या करंट के झटकों से जीव कटकर कुत्तों का आसान शिकार हो जाते हैं। पूरे इलाके में टोपीदार बंदूकों के साथ शिकारी फसल की रखवाली की आड़ में खेतों में घूमते हैं, जो बारूद के साथ मसाला/रांग/लोहे के दाने मारते हैं, जिससे जीव घायल हो जाता है। वन्य प्राणी विभाग के पास न ही कोई विशेषज्ञ चिकित्सक है और न ही समस्याओं के समाधान के लिए कोई सुविधा व कर्मचारी। - विनोद कड़वासरा, प्रदेशाध्यक्ष, अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई सभा, हरियाणा।

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