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धान के अवशेष जलाने पर सख्ती से भड़के किसान, सौंपा ज्ञापन
Updated Wed, 27 Sep 2017 12:41 AM IST
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धान के अवशेष जलाने पर सख्ती से भड़के किसान, सौंपा ज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
धान के अवशेष जलाने पर प्रशासन की सख्ती के खिलाफ किसान उठ खड़े हुए हैं। मंगलवार को जिले के अनेक किसान लघुसचिवालय पहुंचे और डीसी दफ्तर के बाहर हंगामा किया। किसानों का आरोप था कि सरकार ने पराली का विकल्प तो दिया नहीं और इसके जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया। किसानों का ये भी कहना था कि सरकार मशीन निर्माताओं को फायदा पहुंचाने के लिए जानबूझ कर ऐसे तुगलकी आदेश जारी कर रही है। इसके बाद किसानों ने कृषि विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में किसानों ने धान के अवशेषों के प्रबंध के लिए कई तरह की मांगें रखी। मांग पत्र में किसानों ने मांग की कि धान की पराली को खेत से बाहर निकालने वाली मशीन किसानों को मुहैया करवाई जाए, गायों के लिए प्रत्येक जिले को आवंटित 50 लाख की राशि में से धान की पराली को खेतों से काटकर गोशालाओं में भेजने के लिए खर्च की जाए। मनरेगा मजदूरों को धान के अवशेष खेतों से निकालने के लिए लगाया जाए। यदि ये सब नहीं हो सकता तो किसानों को आठ हजार रुपये प्रति एकड़ की आर्थिक सहायता दी जाए। किसानों को आर्थिक दंड लगाने के जो नोटिस भेजे जा रहे हैं, उन्हें वापस लिया जाए। किसानों को शांत करने पहुंचे डीडीए बलवंत सहारण व डीडीपीओ राजेश खोथ ने बताया कि किसानों की समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने सब्सिडी का प्रावधान रखा है। खेतों से भूसा निकालने के लिए जो खर्च है, उस पर सरकार सब्सिडी दे रही है।
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
धान के अवशेष जलाने पर प्रशासन की सख्ती के खिलाफ किसान उठ खड़े हुए हैं। मंगलवार को जिले के अनेक किसान लघुसचिवालय पहुंचे और डीसी दफ्तर के बाहर हंगामा किया। किसानों का आरोप था कि सरकार ने पराली का विकल्प तो दिया नहीं और इसके जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया। किसानों का ये भी कहना था कि सरकार मशीन निर्माताओं को फायदा पहुंचाने के लिए जानबूझ कर ऐसे तुगलकी आदेश जारी कर रही है। इसके बाद किसानों ने कृषि विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में किसानों ने धान के अवशेषों के प्रबंध के लिए कई तरह की मांगें रखी। मांग पत्र में किसानों ने मांग की कि धान की पराली को खेत से बाहर निकालने वाली मशीन किसानों को मुहैया करवाई जाए, गायों के लिए प्रत्येक जिले को आवंटित 50 लाख की राशि में से धान की पराली को खेतों से काटकर गोशालाओं में भेजने के लिए खर्च की जाए। मनरेगा मजदूरों को धान के अवशेष खेतों से निकालने के लिए लगाया जाए। यदि ये सब नहीं हो सकता तो किसानों को आठ हजार रुपये प्रति एकड़ की आर्थिक सहायता दी जाए। किसानों को आर्थिक दंड लगाने के जो नोटिस भेजे जा रहे हैं, उन्हें वापस लिया जाए। किसानों को शांत करने पहुंचे डीडीए बलवंत सहारण व डीडीपीओ राजेश खोथ ने बताया कि किसानों की समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने सब्सिडी का प्रावधान रखा है। खेतों से भूसा निकालने के लिए जो खर्च है, उस पर सरकार सब्सिडी दे रही है।
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