युद्ध से संकट: यूक्रेन में हंगरी सीमा पर फंसे 200 भारतीय छात्र, खाने के लिए कुछ नहीं, भूख से पड़ रहे बीमार
यूक्रेन के हंगरी बॉर्डर पर फंसे हरियाणा के फतेहाबाद जिले के गांव समैन के अमित गिल ने बताया कि खाने के लिए कुछ नहीं है। विद्यार्थी भूख-प्यास से बीमार पड़ने लगे हैं।
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रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच यूक्रेन में पढ़ाई करने गए विद्यार्थियों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। यूक्रेन-हंगरी सीमा पर ही 200 भारतीय विद्यार्थी फंसे हैं। इनमें से हरियाणा के फतेहाबाद जिले के टोहाना क्षेत्र के गांव समैन का अमित गिल भी है। परिजन लगातार वीडियो कॉल के माध्यम से बच्चों का हालचाल जान रहे हैं। मगर वहां से आ रही सूचनाएं परिजनों की चिंता और बढ़ा रही है।
सूचनाओं के अनुसार हंगरी सीमा पर फंसे विद्यार्थियों के पास खाने का सामान भी खत्म हो गया है। कड़ाके की ठंड में भूख-प्यास के कारण कई विद्यार्थियों की तबीयत भी बिगड़ने लगी है। चिंतित परिजनों से लेकर यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों ने भारत सरकार से तत्काल राहत देते हुए वहां से निकालने की मांग की है। गौरतलब है कि जिले के 41 नागरिकों के यूक्रेन में होने की सरकारी स्तर पर पुष्टि हुई थी। इनमें से कुछ विद्यार्थी लौट आएं हैं।
निकालने के प्रयास होते भी नजर नहीं आ रहे
यूक्रेन के ओडेसा शहर में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गए गांव समैन निवासी अमित गिल ने अपने परिजनों को बताया है कि वह यूक्रेन छोड़ने के लिए हंगरी बॉर्डर पर पहुंच गए है। यूक्रेन में भारतीय विद्यार्थियों की हालत खराब होती जा रही है। अमित ने अपने चाचा मनजीत गिल से हुई बातचीत में बताया है कि फिलहाल उनके पास खाने-पीने के लिए कुछ भी नहीं है। खाने-पीने का सारा सामान खत्म हो गया है। वह करनाल, कुरुक्षेत्र व उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों के साथ बड़ी मुश्किल से हंगरी बॉर्डर पर पहुंचे हैं। अमित के अनुसार वहां से निकलने के लिए कोई प्रयास होते नजर नहीं आ रहे हैं।
परिजन बोले, संकट में है बेटा, जल्द मदद पहुंचाए सरकार
अमित के चाचा मनजीत गिल व अन्य परिजनों ने कहा कि उनका बेटा संकट में हैं। जान का जोखिम बना हुआ है। भारत सरकार से आग्रह है कि तत्काल उनके बेटे तक पहुंचकर मदद करें और उसको वहां से निकालकर सकुशल भारत लेकर आएं। अमित के चाचा मनजीत गिल ने बताया कि उनकी अमित से लगातार बातचीत हो रही है। फिलहाल वहां पर इंटरनेट की स्पीड कम हो गई है।
दोपहर बाद से टूट गया संपर्क
मनजीत गिल के अनुसार सोमवार दोपहर 3 बजे के बाद भतीजे अमित का कोई जवाब नहीं मिल रहा है। उन्होंने 23 फरवरी को दो लाख रुपये यूनिवर्सिटी की फीस के तौर पर भेजी थी। मगर यूक्रेन में एमरजेंसी लग जाने के कारण यह पैसे अमित के बैंक खाते में नहीं पहुंच पाए हैं।
यूक्रेन में फंसे भारतीय विद्यार्थियों व अन्य नागरिकों को लाने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है। हमारे पास भी जो सूचनाएं आ रही है, उन्हें उच्चाधिकारियों से साझा किया जा रहा है। - प्रदीप कुमार, उपायुक्त, फतेहाबाद