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अब फतेहाबाद के काले हिरणों को मिलेगा बीकानेरी सेवण घास का स्वाद, चार गांवों की दो सौ एकड़ में होगी बिजाई
Updated Sun, 01 Jul 2018 12:04 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। फतेहाबाद जिले के वन्य प्राणी अब बीकानेरी घास का स्वाद चखेंगे। जिले के गांव बड़ोपल, धांगड़, काजलहेड़ी और चिंदड़ में बीकानेरी घास के नाम से मशहूर सेवण घास की बिजाई की जाएगी। ये घास काले हिरणों की सबसे पसंदीदा घास मानी जाती है। पर्यावरण एवं जीव रक्षा बिश्नोई सभा के प्रदेश महासचिव विनोद कड़वासरा ने इसकी पुष्टि की है। कड़वासरा ने बताया कि रविवार तक विशेष सेवण घास के बीज बीकानेर से फतेहाबाद पहुंच जाएंगे और सोमवार से इसकी बिजाई का काम शुरू कर दिया जाएगा। इन चार गांवों में काले हिरणों की संख्या काफी अधिक है और इसलिए ही इन गांवों में सेवण घास को प्रथम चरण में लगभग दो सौ एकड़ में बिजाई की जाएगी।
विनोद कड़वासरा ने बताया कि काले हिरणों के अलावा सेवण घास को नील गाय व खरगोश भी चाव से खाते हैं। इसके अलावा इस घास में पौष्टिकता का स्तर बाकी घास के मुकाबले काफी अधिक होता है। विनोद कड़वासरा के अनुसार सेवण घास लंबी होती है तो कई बार वन्य जीव शिकारियों की नजर से बचाने के लिए अपने बच्चों को इस घास में छिपा देते हैं। उन्होंने बताया कि इस घास का बीज काफी महंगा होता है और सामान्यत: इसका मूल्य 550 रु प्रति किलो होता है लेकिन राजस्थान विश्वविद्यालय ने वन्य प्राणी जीवों के लिए इसे किसानों को सब्सिडी देकर 300 रु किलो की दर से दिया है।
जीव रक्षा सभा संस्थापक सदस्य सतपाल भादू ने बताया कि इससे वन्य जीवों के साथ किसानों को भी फायदा होगा। भादू ने बताया कि अक्सर नील गाय और काले हिरण भोजन की तलाश में किसानों के खेतों में घुसकर फसल खराब कर देते हैं। लेकिन अब उनकी पसंदीदा घास उन्हें उपलब्ध होगी तो वो किसान के खेत में नहीं जाएंगे। इससे वो शिकारी कुत्तों के हमले से भी बचे रहेंगे।
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गौरतलब है कि पर्यावरण एवं जीव रक्षा बिश्नोई सभा के प्रदेश महासचिव विनोद कड़वासरा ने लगभग दो माह पहले इस सेवण घास के बीज एवं वन्य प्राणियों की सुविधा के लिए सोशल मीडिया पर लोगों से मदद का आहवान किया था जिसके बाद लोगों ने सेवण घास के बीज व अन्य सुविधाओं के लिए आगे आकर मदद की। कड़वासरा ने बताया कि पुलिस अधीक्षक दीपक सहारण ने इसके लिए जहां पांच हजार रुपये की मदद के साथ शिकारियों पर नजर रखने के लिए दो विशेष कर्मचारियों की तैनाती की। इसके अलावा जिला आबकारी एवं कराधान आयुक्त ने हिरणों के लिए पीने के पानी के लिए पाइपलाइन उपलब्ध करवाई।
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फतेहाबाद। फतेहाबाद जिले के वन्य प्राणी अब बीकानेरी घास का स्वाद चखेंगे। जिले के गांव बड़ोपल, धांगड़, काजलहेड़ी और चिंदड़ में बीकानेरी घास के नाम से मशहूर सेवण घास की बिजाई की जाएगी। ये घास काले हिरणों की सबसे पसंदीदा घास मानी जाती है। पर्यावरण एवं जीव रक्षा बिश्नोई सभा के प्रदेश महासचिव विनोद कड़वासरा ने इसकी पुष्टि की है। कड़वासरा ने बताया कि रविवार तक विशेष सेवण घास के बीज बीकानेर से फतेहाबाद पहुंच जाएंगे और सोमवार से इसकी बिजाई का काम शुरू कर दिया जाएगा। इन चार गांवों में काले हिरणों की संख्या काफी अधिक है और इसलिए ही इन गांवों में सेवण घास को प्रथम चरण में लगभग दो सौ एकड़ में बिजाई की जाएगी।
विनोद कड़वासरा ने बताया कि काले हिरणों के अलावा सेवण घास को नील गाय व खरगोश भी चाव से खाते हैं। इसके अलावा इस घास में पौष्टिकता का स्तर बाकी घास के मुकाबले काफी अधिक होता है। विनोद कड़वासरा के अनुसार सेवण घास लंबी होती है तो कई बार वन्य जीव शिकारियों की नजर से बचाने के लिए अपने बच्चों को इस घास में छिपा देते हैं। उन्होंने बताया कि इस घास का बीज काफी महंगा होता है और सामान्यत: इसका मूल्य 550 रु प्रति किलो होता है लेकिन राजस्थान विश्वविद्यालय ने वन्य प्राणी जीवों के लिए इसे किसानों को सब्सिडी देकर 300 रु किलो की दर से दिया है।
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जीव रक्षा सभा संस्थापक सदस्य सतपाल भादू ने बताया कि इससे वन्य जीवों के साथ किसानों को भी फायदा होगा। भादू ने बताया कि अक्सर नील गाय और काले हिरण भोजन की तलाश में किसानों के खेतों में घुसकर फसल खराब कर देते हैं। लेकिन अब उनकी पसंदीदा घास उन्हें उपलब्ध होगी तो वो किसान के खेत में नहीं जाएंगे। इससे वो शिकारी कुत्तों के हमले से भी बचे रहेंगे।
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गौरतलब है कि पर्यावरण एवं जीव रक्षा बिश्नोई सभा के प्रदेश महासचिव विनोद कड़वासरा ने लगभग दो माह पहले इस सेवण घास के बीज एवं वन्य प्राणियों की सुविधा के लिए सोशल मीडिया पर लोगों से मदद का आहवान किया था जिसके बाद लोगों ने सेवण घास के बीज व अन्य सुविधाओं के लिए आगे आकर मदद की। कड़वासरा ने बताया कि पुलिस अधीक्षक दीपक सहारण ने इसके लिए जहां पांच हजार रुपये की मदद के साथ शिकारियों पर नजर रखने के लिए दो विशेष कर्मचारियों की तैनाती की। इसके अलावा जिला आबकारी एवं कराधान आयुक्त ने हिरणों के लिए पीने के पानी के लिए पाइपलाइन उपलब्ध करवाई।