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डार्क जोन के भयावह हालात, 12 साल में सात से तीस मीटर पहुंचा भूजल स्तर
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फतेहाबाद। पिछले पांच साल से मानसून के दौरान कम बारिश और धान की फसल में पानी का अधिक इस्तेमाल होने से भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। यह किसानों के साथ-साथ कृषि विभाग के लिए अत्यंत चिंता का विषय है। उधर, मौसम विभाग का कहना है कि इस बार मानसून की बरसात सामान्य से कम होगी। जिससे इस बार गिरते जलस्तर के लिए हालात और भी भयावह हो सकते हैं। खासकर टोहाना जैसे डार्कजोन एरिया में। हिसार के भूजल वैज्ञानिक डॉ. राकेश के अनुसार 2006 में फतेहाबाद में भूजल स्तर सात मीटर तक था। धान की फसल में अत्यधिक जल दोहन व बरसात कम होने के कारण 2012 में 9 मीटर और नीचे जाकर 16 मीटर तक हो गया। अब जून 2018 के सर्वे के अनुसार फतेहाबाद का जलस्तर 14 मीटर और नीचे गिरकर 30 मीटर तक चला गया है। प्रदेश सरकार द्वारा धान के रकबे को कम करके मक्का व दलहन की खेती की योजना गिरते जलस्तर के लिए रामबाण साबित हो सकती है। प्रदेश सरकार ने इस योजना के तहत मक्का की बिजाई के लिए 2 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा भी की है। मौसम विभाग की मानें तो पिछले पांच सालों में मानसून की बारिश 50 फीसदी तक कम हुई है। साल 2014 से लेकर 2018 तक एक भी वर्ष ऐसा नहीं बीता जब मानसून के दौरान बारिश सामान्य रही हो। इस बार भी मौसम विभाग ने मानसून के सीजन में सामान्य से कम बारिश की भविष्यवाणी की है। बारिश का पानी भूजल स्तर बढ़ाने में सबसे अधिक सहायक होता है, लेकिन जिले में बारिश ही कम रही है तो भूजल का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। ऐसे में अगर स्थितियां अभी भी नहीं सुधरती हैं तो आने वाले साल फतेहाबाद जिले के निवासियों के लिए परेशानी भरे हो सकते हैं।
टोहाना पहले ही डार्क जोन में, अब भट्टू-नागपुर के सौ से अधिक गांव खतरे के निशान पर
फतेहाबाद जिले का टोहाना कई सालों से भूजल स्तर के मामले में डार्क जोन में शामिल है। लाख प्रयत्नों के बावजूद जिला प्रशासन व सरकार टोहाना को डार्क जोन से बाहर निकालने में कामयाब नहीं हो सकी है। ऐसे में कमजोर मानूसन एवं लापरवाहियों ने जिले के दो और ब्लॉक भट्टू और नागपुर के सौ से अधिक गांवों को भी इसी मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। इन सौ से अधिक गांवों में स्थितियां चेतावनी भरी हैं कि अगर समय रहते यहां पर व्यवस्थाएं नहीं बदली गई तो इन दोनों ब्लॉकों के गांव भी डार्क जोन के घेरे में आ जाएंगे। इन सौ गांवों में बड़ोपल, खाराखेड़ी, चिंदड़, कुम्हारिया, गोरखपुर, धांगड़ के साथ सटी ढाणियां, भट्टू के खाबड़ा, दैयड़, रामसरा, मेहूवाला, ढाबीकलां, पीलीमंदौरी, सूलीखेड़ा, किरढान, ढाबीखुर्द, ढाबीकलां, जांडवाला बागड़ एवं राजस्थान सीमा से सटे अधिकतर गांव इसी श्रेणी में शामिल हैं।
मानसून की बरसात औसत से कम होने पर जिले के किसानों को दोहरा नुकसान झेलना पड़ रहा है। जलस्तर तो कम हो ही रहा है। साथ ही फसलों का उत्पादन भी प्रभावित होने की पूरी आशंका है। एक अनुमान के अनुसार बरसात ना होने से किसानों ने धान की फसल पर दो से तीन गुणा कीटनाशक का अधिक प्रयोग किया। बिजली की मोटर चलाने से बिजली खर्च बढ़ा जिससे फसलों की लागत भी ज्यादा आई। भूजल लेने के लिए जनरेटर चलाना पड़ा तो इसके चलते डीजल का खर्च भी काफी बढ़ा है। ऐसे में किसान की लागत भी ज्यादा होती है। धान का लगातार बढ़ता रकबा भी एक बड़ी वजह 2006 में जिले में 60 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की बिजाई की गई थी, 2010 में ये बढ़कर 80 हजार हेक्टेयर एवं अब पिछले दो तीन साल में नरमे पर बीटी कॉटन के प्रकोप के चलते धान का क्षेत्रफल बढ़ा है। इस बार जिले में 1 लाख 19 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई की गई है।
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पिछले पांच साल से जिले में 56 से 150 एमएम बारिश हो रही है जबकि मौसम विभाग के अनुसार मानसून के दौरान 300 एमएम बारिश सामान्य बारिश के तौर पर मानी जाती है। इस बार भी मानसून की बरसात जिले में 50 फीसदी कम दर्ज की गई। - सुरेश दहिया, आपदा प्रबंधन अधिकारी
जिले में धान की खेती का क्षेत्रफल लगातार बढ़ रहा है। जबकि धान की फसल के लिए सुनिश्चित पानी की आवश्यकता होती है। धान की खेती के लिए हम बारिश पर निर्भर नहीं रह सकते हैं। लेकिन बढ़ रहे रकबे के कारण अब जहां पानी नहीं था, वहां भी धान की रोपाई की गई। इस बार सरकार ने गैर बासमती वाले धान में क्षेत्र में मक्का की बिजाई को प्रोत्साहन देने के लिए प्रति एकड़ 2 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि की घोषणा की है। अगले सप्ताह कृषि विभाग के पास जिले में मक्का की बिजाई का लक्ष्य आ जाएगा। - डॉ. बलवंत सहारण, उपनिदेशक कृषि विभाग, फतेहाबाद।
साल बारिश
2014 56 एमएम
2015 78 एमएम
2016 96 एमएम
2017 101 एमएम
2018 192 एमएम
(बारिश के ये आंकड़े मानसून के जून से सितंबर तक के दौरान के हैं। स्त्रोत : राजस्व विभाग)
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टोहाना पहले ही डार्क जोन में, अब भट्टू-नागपुर के सौ से अधिक गांव खतरे के निशान पर
फतेहाबाद जिले का टोहाना कई सालों से भूजल स्तर के मामले में डार्क जोन में शामिल है। लाख प्रयत्नों के बावजूद जिला प्रशासन व सरकार टोहाना को डार्क जोन से बाहर निकालने में कामयाब नहीं हो सकी है। ऐसे में कमजोर मानूसन एवं लापरवाहियों ने जिले के दो और ब्लॉक भट्टू और नागपुर के सौ से अधिक गांवों को भी इसी मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। इन सौ से अधिक गांवों में स्थितियां चेतावनी भरी हैं कि अगर समय रहते यहां पर व्यवस्थाएं नहीं बदली गई तो इन दोनों ब्लॉकों के गांव भी डार्क जोन के घेरे में आ जाएंगे। इन सौ गांवों में बड़ोपल, खाराखेड़ी, चिंदड़, कुम्हारिया, गोरखपुर, धांगड़ के साथ सटी ढाणियां, भट्टू के खाबड़ा, दैयड़, रामसरा, मेहूवाला, ढाबीकलां, पीलीमंदौरी, सूलीखेड़ा, किरढान, ढाबीखुर्द, ढाबीकलां, जांडवाला बागड़ एवं राजस्थान सीमा से सटे अधिकतर गांव इसी श्रेणी में शामिल हैं।
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मानसून की बरसात औसत से कम होने पर जिले के किसानों को दोहरा नुकसान झेलना पड़ रहा है। जलस्तर तो कम हो ही रहा है। साथ ही फसलों का उत्पादन भी प्रभावित होने की पूरी आशंका है। एक अनुमान के अनुसार बरसात ना होने से किसानों ने धान की फसल पर दो से तीन गुणा कीटनाशक का अधिक प्रयोग किया। बिजली की मोटर चलाने से बिजली खर्च बढ़ा जिससे फसलों की लागत भी ज्यादा आई। भूजल लेने के लिए जनरेटर चलाना पड़ा तो इसके चलते डीजल का खर्च भी काफी बढ़ा है। ऐसे में किसान की लागत भी ज्यादा होती है। धान का लगातार बढ़ता रकबा भी एक बड़ी वजह 2006 में जिले में 60 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की बिजाई की गई थी, 2010 में ये बढ़कर 80 हजार हेक्टेयर एवं अब पिछले दो तीन साल में नरमे पर बीटी कॉटन के प्रकोप के चलते धान का क्षेत्रफल बढ़ा है। इस बार जिले में 1 लाख 19 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई की गई है।
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पिछले पांच साल से जिले में 56 से 150 एमएम बारिश हो रही है जबकि मौसम विभाग के अनुसार मानसून के दौरान 300 एमएम बारिश सामान्य बारिश के तौर पर मानी जाती है। इस बार भी मानसून की बरसात जिले में 50 फीसदी कम दर्ज की गई। - सुरेश दहिया, आपदा प्रबंधन अधिकारी
जिले में धान की खेती का क्षेत्रफल लगातार बढ़ रहा है। जबकि धान की फसल के लिए सुनिश्चित पानी की आवश्यकता होती है। धान की खेती के लिए हम बारिश पर निर्भर नहीं रह सकते हैं। लेकिन बढ़ रहे रकबे के कारण अब जहां पानी नहीं था, वहां भी धान की रोपाई की गई। इस बार सरकार ने गैर बासमती वाले धान में क्षेत्र में मक्का की बिजाई को प्रोत्साहन देने के लिए प्रति एकड़ 2 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि की घोषणा की है। अगले सप्ताह कृषि विभाग के पास जिले में मक्का की बिजाई का लक्ष्य आ जाएगा। - डॉ. बलवंत सहारण, उपनिदेशक कृषि विभाग, फतेहाबाद।
साल बारिश
2014 56 एमएम
2015 78 एमएम
2016 96 एमएम
2017 101 एमएम
2018 192 एमएम
(बारिश के ये आंकड़े मानसून के जून से सितंबर तक के दौरान के हैं। स्त्रोत : राजस्व विभाग)