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कभी बचाई थी 57 लोगों की जान, आज भटक रहा नौकरी के लिए दर-दर
Updated Thu, 25 Jan 2018 11:49 PM IST
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सुशील सिंगला
टोहाना।
करीब 9 वर्ष पूर्व नैना देवी स्थल पर अपनी जान पर खेलते हुए 57 लोगों की जान बचाने वाला राष्ट्रीय वीरता का पुरस्कार विजेता टोहाना का गौरव सैनी आज स्थायी नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है। उसे परिवार का गुजर बसर करना मुश्किल हो गया है। उसका घर पिता की दुकानदारी के सहारे चल रहा है। हादसे के दौरान गौरव की बहन व फुफेरे भाई की भी मौत हो गई थी। वीरता पुरस्कार जीत चुका गौरव सैनी आज नौकरी के लिए घूमता फिर रहा है।
गौरव के पिता मोहनलाल सैनी ने बताया कि वर्ष 2008 में उसका बेटा गौरव अपनी बड़ी बहन सपना व अन्य लोगों के साथ हिमाचल में स्थित नैना देवी माता के दर्शन के लिए गए थे। जब वे सुबह के समय दर्शन के लिए जा रहे थे तो अचानक चट्टान के खिसकने की अफवाह फैल गई तो ऊपर से हजारों लोग भागकर नीचे आने लगे। जिसके बाद गौरव ने ऊपर से आ रहे लगभग 57 लोगों को कांटे की तार की मदद से बचाया था, हालांकि गौरव की बहन सपना व फुफेरा भाई इस हादसे का शिकार हो गए थे।
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प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति कर चुके हैं सम्मानित
गौरव को उसकी बहादुरी के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल, उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी वर्ष 2009 में राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित कर चुके है। गौरव जब ये बहादुरी का कार्य करके वापिस लौटा तो उस समय हलके के विधायक परमवीर सिंह, वर्तमान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला, वर्तमान एडीसी जेके आभीर, तत्कालीन एसडीएम, नगर परिषद ईओ सहित कई अधिकारियों ने उसे सम्मानित किया था। जिसके बाद गौरव को बिरला ग्रुप ने गोद लेकर उसे बेहतर शिक्षा देने का निर्णय लिया था। इसके बाद उसकी पढ़ाई के लिए नैनीताल में भेजा गया। वह बारहवीं में पास नहीं हो पाया तो वहां से वापिस आ गया। गौरव ने वहां से आने के बाद सीबीएसई बोर्ड से बारहवी की परीक्षा को पास कर लिया।
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पिता की दुकानदारी से चल रहा गुजारा
गौरव के पिता मोहनलाल घंटाघर चौक पर एक छोटी सी दुकान चलाते है। गौरव सैनी के पिता कहते हैं कि वर्ष 2013 में उसका बेटा नरवाना मार्केट कमेटी में डीसी रेट पर मार्केट कमेटी फीस की पर्ची काटने के लिए लगा। जिसके बाद उसे वर्ष 2014 में कुछ समय बाद ही हटा दिया गया। भाजपा की सरकार बनने के बाद वे विधायक सुभाष बराला से मिलने के लिए भी गए, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो पाई। उसके बाद से ही उसका बेटा बेरोजगार ही है। उसने बताया कि उसकी दोनों बेटियों की पढ़ाई का खर्च व घर का गुजर बसर वे दुकान से ही मुश्किल से चलाते हैं।
21 बच्चों में पहले नंबर पर था गौरव सैनी
वार्ड-19 निवासी गौरव सैनी के स्कूल सरस्वती विद्या मंदिर के डायरेक्टर बलदेव सैनी ने बताया कि गौरव उस समय उनके पास आठवीं कक्षा का छात्र था। जब उसने नैना देवी में 57 लोगों की जान बचाई थी। जिसके बाद उसे तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार दिया गया तो उस समय देशभर से 21 बच्चों का चयन किया गया था। जिनमें गौरव का नाम पहले नंबर पर था। बलदेव ने बताया कि गौरव को उस समय दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित एवं कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष रही सोनिया गांधी भी सम्मानित कर चुकी है। सचमुच में गौरव सैनी ने मुसीबत में फंसे लोगों की जान बचाकर गणतंत्र के सच्चे सपूत की भूमिका निभाई है। जिसके बाद गौरव को वर्ष 2010 में दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होकर गौरव ने पूरे देश का गौरव बढ़ाया था।
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टोहाना।
करीब 9 वर्ष पूर्व नैना देवी स्थल पर अपनी जान पर खेलते हुए 57 लोगों की जान बचाने वाला राष्ट्रीय वीरता का पुरस्कार विजेता टोहाना का गौरव सैनी आज स्थायी नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है। उसे परिवार का गुजर बसर करना मुश्किल हो गया है। उसका घर पिता की दुकानदारी के सहारे चल रहा है। हादसे के दौरान गौरव की बहन व फुफेरे भाई की भी मौत हो गई थी। वीरता पुरस्कार जीत चुका गौरव सैनी आज नौकरी के लिए घूमता फिर रहा है।
गौरव के पिता मोहनलाल सैनी ने बताया कि वर्ष 2008 में उसका बेटा गौरव अपनी बड़ी बहन सपना व अन्य लोगों के साथ हिमाचल में स्थित नैना देवी माता के दर्शन के लिए गए थे। जब वे सुबह के समय दर्शन के लिए जा रहे थे तो अचानक चट्टान के खिसकने की अफवाह फैल गई तो ऊपर से हजारों लोग भागकर नीचे आने लगे। जिसके बाद गौरव ने ऊपर से आ रहे लगभग 57 लोगों को कांटे की तार की मदद से बचाया था, हालांकि गौरव की बहन सपना व फुफेरा भाई इस हादसे का शिकार हो गए थे।
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प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति कर चुके हैं सम्मानित
गौरव को उसकी बहादुरी के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल, उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी वर्ष 2009 में राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित कर चुके है। गौरव जब ये बहादुरी का कार्य करके वापिस लौटा तो उस समय हलके के विधायक परमवीर सिंह, वर्तमान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला, वर्तमान एडीसी जेके आभीर, तत्कालीन एसडीएम, नगर परिषद ईओ सहित कई अधिकारियों ने उसे सम्मानित किया था। जिसके बाद गौरव को बिरला ग्रुप ने गोद लेकर उसे बेहतर शिक्षा देने का निर्णय लिया था। इसके बाद उसकी पढ़ाई के लिए नैनीताल में भेजा गया। वह बारहवीं में पास नहीं हो पाया तो वहां से वापिस आ गया। गौरव ने वहां से आने के बाद सीबीएसई बोर्ड से बारहवी की परीक्षा को पास कर लिया।
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पिता की दुकानदारी से चल रहा गुजारा
गौरव के पिता मोहनलाल घंटाघर चौक पर एक छोटी सी दुकान चलाते है। गौरव सैनी के पिता कहते हैं कि वर्ष 2013 में उसका बेटा नरवाना मार्केट कमेटी में डीसी रेट पर मार्केट कमेटी फीस की पर्ची काटने के लिए लगा। जिसके बाद उसे वर्ष 2014 में कुछ समय बाद ही हटा दिया गया। भाजपा की सरकार बनने के बाद वे विधायक सुभाष बराला से मिलने के लिए भी गए, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो पाई। उसके बाद से ही उसका बेटा बेरोजगार ही है। उसने बताया कि उसकी दोनों बेटियों की पढ़ाई का खर्च व घर का गुजर बसर वे दुकान से ही मुश्किल से चलाते हैं।
21 बच्चों में पहले नंबर पर था गौरव सैनी
वार्ड-19 निवासी गौरव सैनी के स्कूल सरस्वती विद्या मंदिर के डायरेक्टर बलदेव सैनी ने बताया कि गौरव उस समय उनके पास आठवीं कक्षा का छात्र था। जब उसने नैना देवी में 57 लोगों की जान बचाई थी। जिसके बाद उसे तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार दिया गया तो उस समय देशभर से 21 बच्चों का चयन किया गया था। जिनमें गौरव का नाम पहले नंबर पर था। बलदेव ने बताया कि गौरव को उस समय दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित एवं कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष रही सोनिया गांधी भी सम्मानित कर चुकी है। सचमुच में गौरव सैनी ने मुसीबत में फंसे लोगों की जान बचाकर गणतंत्र के सच्चे सपूत की भूमिका निभाई है। जिसके बाद गौरव को वर्ष 2010 में दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होकर गौरव ने पूरे देश का गौरव बढ़ाया था।