{"_id":"5c2bb35cbdec2257114a972f","slug":"111546367836-fatehabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकारी स्कूलों पर केजरीवाल की चुनौती का हरियाणवी जवाब बन सकता है हिजरावांकलां का प्राइमरी स्कूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकारी स्कूलों पर केजरीवाल की चुनौती का हरियाणवी जवाब बन सकता है हिजरावांकलां का प्राइमरी स्कूल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शिक्षकों और ग्रामीणों ने 3 महीने में बदली हिजरावांकलां के प्राइमरी स्कूल की तस्वीर
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। प्रदेश के सरकारी स्कूलों की हालत को लेकर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की चुनौती भले ही बीजेपी सरकार पर भारी पड़ रही हो, लेकिन जिले के गांव हिजरावांकलां प्राइमरी स्कूल ने इस चुनौती को गंभीरता से लिया और इसका जवाब दे दिया है। गांव हिजरावांकलां प्राइमरी स्कूल प्रबंधन ने पिछले तीन माह में ही इस स्कूल का कायाकल्प कर दिया है और वो भी बिना किसी सरकारी ग्रांट के। स्कूल स्टाफ एवं ग्रामीणों के सहयोग ने इस स्कूल का नक्शा ही बदल दिया है। छह माह पहले तक जिस स्कूल को देखने तक जी नहीं करता था, वहीं स्कूल अब मुख्यमंत्री स्कूल सौंदर्यीकरण की रेस में सबसे आगे चल रहा है।
नए साल से बच्चों को मिली स्मार्ट क्लास की भी सुविधा
हिजरावांकलां प्राइमरी स्कूल के विद्यार्थियों के लिए नया साल दोहरी खुशी लेकर आया है। नए साल से इस स्कूल के बच्चों को स्मार्ट क्लास की भी सुविधा मिलनी शुरू हो गई हैं। मंगलवार को स्कूल में स्मार्ट क्लास सुविधा का शुभारंभ किया गया। इसके लिए स्कूल प्रांगण में बकायदा प्रोजेक्टर भी लगाया गया है, ताकि छोटे बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ प्रैक्टीकल ज्ञान भी दिया जाए। सबसे अहम बा त यह हैं कि इस स्मार्ट क्लास के लिए भी विभाग से किसी प्रकार की कोई ग्रांट नहीं ली गई बल्कि स्कूल स्टाफ ने इसके लिए अपने स्तर पर इंतजाम किए हैं।
छात्र-छात्राओं के लिए 8 नए आधुनिक शौचालय, लाइब्रेरी के अलावा इंडोर गेम्स के लिए मनोरंजन कक्ष
हिजरावांकलां प्राइमरी स्कूल में स्वच्छता परमो धर्म के सिद्धांत पर खासा ध्यान दिया जाता है। जिले के अधिकतर स्कूलों में जहां सार्वजनिक शौचालय ही पर्याप्त नहीं हैं, वहीं इस स्कूल में 8 नए आधुनिक शौचालय बनाए गए हैं। इसमें छात्र-छात्राओं के लिए चार अलग शौचालय हैं। इसके अलावा स्कूल में बच्चों के बौद्धिक ज्ञान को बढ़ाने के लिए लाइब्रेरी भी है, जिसमें तकरीबन दो हजार से अधिक किताबें रखी गई हैं जो उनके पाठ्यक्रम के साथ- साथ, व्यवहार को बेहतर बनाने में मदद करती हैं। इसके अलावा मनोरंजन कक्ष भी इस स्कूल में स्थापित किया गया है, जिसमें बच्चों को इंडोर गेम्स के अलावा योगा की भी तैयारी करवाई जाती है।
विज्ञापन
शुद्ध पेयजल के लिए आरओ सिस्टम, गैस चूल्हे पर बनता है मिड-डे मील
बच्चों को पीने के लिए स्कूल में आरओ सिस्टम लगाया गया है ताकि उन्हें पीने के लिए शुद्ध पानी उपलब्ध करवाया जा सके। इसके अलावा गैस चूल्हे पर ही मिड-डे मील पकाया गया है। इसके अतिरिक्त हिजरावांकलां प्राइमरी स्कूल जिले के उन चुनिंदा स्कूलों में शामिल है, जिसमें विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार पूर्णत: डाइट प्लान के अनुसार ही मिड-डे मील बनता है।
एक रुपये की भी सरकारी ग्रांट नहीं
हिजरावांकलां प्राइमरी स्कूल में दो साल पहले तक 242 बच्चे थे। अध्यापकों के शानदार प्रयासों के चलते अब स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़कर 347 तक पहुंच गई है। यह स्कूल जिले के उन चुनिंदा स्कूलों में शुमार है जिसमें कोई ड्राप आउट नहीं है। सक्षम परीक्षाओं के लिए अतिरिक्त कक्षाओं की मदद ली जा रही है। इस स्कूल के कायाकल्प में एक रुपये की भी सरकारी ग्रांट का इस्तेमाल नहीं किया गया, बल्कि सामाजिक सहभागिता से ही इस स्कूल का सिस्टम सुधारा गया है।
हिजरावांकलां प्राइमरी स्कूल सामाजिक सहभागिता का एक शानदार उदाहरण है। स्कूल स्टाफ ने ये साबित कर दिया है कि अगर सही नीयत से काम किया जाए तो सरकारी ग्रांट न होना कोई रुकावट नहीं हो सकती। हमें यह उम्मीद हैं कि हिजरावांकलां प्राइमरी स्कूल मुख्यमंत्री सौंदर्यीकरण पुरस्कार का प्रबल दावेदार है।
देवेंद्र कुंडू, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, फतेहाबाद ।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। प्रदेश के सरकारी स्कूलों की हालत को लेकर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की चुनौती भले ही बीजेपी सरकार पर भारी पड़ रही हो, लेकिन जिले के गांव हिजरावांकलां प्राइमरी स्कूल ने इस चुनौती को गंभीरता से लिया और इसका जवाब दे दिया है। गांव हिजरावांकलां प्राइमरी स्कूल प्रबंधन ने पिछले तीन माह में ही इस स्कूल का कायाकल्प कर दिया है और वो भी बिना किसी सरकारी ग्रांट के। स्कूल स्टाफ एवं ग्रामीणों के सहयोग ने इस स्कूल का नक्शा ही बदल दिया है। छह माह पहले तक जिस स्कूल को देखने तक जी नहीं करता था, वहीं स्कूल अब मुख्यमंत्री स्कूल सौंदर्यीकरण की रेस में सबसे आगे चल रहा है।
नए साल से बच्चों को मिली स्मार्ट क्लास की भी सुविधा
हिजरावांकलां प्राइमरी स्कूल के विद्यार्थियों के लिए नया साल दोहरी खुशी लेकर आया है। नए साल से इस स्कूल के बच्चों को स्मार्ट क्लास की भी सुविधा मिलनी शुरू हो गई हैं। मंगलवार को स्कूल में स्मार्ट क्लास सुविधा का शुभारंभ किया गया। इसके लिए स्कूल प्रांगण में बकायदा प्रोजेक्टर भी लगाया गया है, ताकि छोटे बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ प्रैक्टीकल ज्ञान भी दिया जाए। सबसे अहम बा त यह हैं कि इस स्मार्ट क्लास के लिए भी विभाग से किसी प्रकार की कोई ग्रांट नहीं ली गई बल्कि स्कूल स्टाफ ने इसके लिए अपने स्तर पर इंतजाम किए हैं।
विज्ञापन
छात्र-छात्राओं के लिए 8 नए आधुनिक शौचालय, लाइब्रेरी के अलावा इंडोर गेम्स के लिए मनोरंजन कक्ष
हिजरावांकलां प्राइमरी स्कूल में स्वच्छता परमो धर्म के सिद्धांत पर खासा ध्यान दिया जाता है। जिले के अधिकतर स्कूलों में जहां सार्वजनिक शौचालय ही पर्याप्त नहीं हैं, वहीं इस स्कूल में 8 नए आधुनिक शौचालय बनाए गए हैं। इसमें छात्र-छात्राओं के लिए चार अलग शौचालय हैं। इसके अलावा स्कूल में बच्चों के बौद्धिक ज्ञान को बढ़ाने के लिए लाइब्रेरी भी है, जिसमें तकरीबन दो हजार से अधिक किताबें रखी गई हैं जो उनके पाठ्यक्रम के साथ- साथ, व्यवहार को बेहतर बनाने में मदद करती हैं। इसके अलावा मनोरंजन कक्ष भी इस स्कूल में स्थापित किया गया है, जिसमें बच्चों को इंडोर गेम्स के अलावा योगा की भी तैयारी करवाई जाती है।
विज्ञापन
शुद्ध पेयजल के लिए आरओ सिस्टम, गैस चूल्हे पर बनता है मिड-डे मील
बच्चों को पीने के लिए स्कूल में आरओ सिस्टम लगाया गया है ताकि उन्हें पीने के लिए शुद्ध पानी उपलब्ध करवाया जा सके। इसके अलावा गैस चूल्हे पर ही मिड-डे मील पकाया गया है। इसके अतिरिक्त हिजरावांकलां प्राइमरी स्कूल जिले के उन चुनिंदा स्कूलों में शामिल है, जिसमें विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार पूर्णत: डाइट प्लान के अनुसार ही मिड-डे मील बनता है।
एक रुपये की भी सरकारी ग्रांट नहीं
हिजरावांकलां प्राइमरी स्कूल में दो साल पहले तक 242 बच्चे थे। अध्यापकों के शानदार प्रयासों के चलते अब स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़कर 347 तक पहुंच गई है। यह स्कूल जिले के उन चुनिंदा स्कूलों में शुमार है जिसमें कोई ड्राप आउट नहीं है। सक्षम परीक्षाओं के लिए अतिरिक्त कक्षाओं की मदद ली जा रही है। इस स्कूल के कायाकल्प में एक रुपये की भी सरकारी ग्रांट का इस्तेमाल नहीं किया गया, बल्कि सामाजिक सहभागिता से ही इस स्कूल का सिस्टम सुधारा गया है।
हिजरावांकलां प्राइमरी स्कूल सामाजिक सहभागिता का एक शानदार उदाहरण है। स्कूल स्टाफ ने ये साबित कर दिया है कि अगर सही नीयत से काम किया जाए तो सरकारी ग्रांट न होना कोई रुकावट नहीं हो सकती। हमें यह उम्मीद हैं कि हिजरावांकलां प्राइमरी स्कूल मुख्यमंत्री सौंदर्यीकरण पुरस्कार का प्रबल दावेदार है।
देवेंद्र कुंडू, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, फतेहाबाद ।